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अंतरराष्ट्रीय अदालत: भंडारी की नियुक्ति पर ब्रिटेन का अड़ंगा, थरूर बिफरे

Justice Christopher Greenwood and Justice Dalveer Bhandari

अंतरराष्ट्रीय अदालत (आईसीजे) में जज के एक सीट पर दोबारा नियुक्ति के लिए भारत की ओर से नामित दलवीर भंडारी की राह में ब्रिटेन ने अडंगा डाल दिया है। उसने क्रिस्टोफर ग्रीनवुड को नामित किया है। इस बीच, नियुक्ति पर मुहर लगाने के लिए सोमवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा और सुरक्षा-परिषद की दोबारा बैठक हुई। लेकिन दोनों इकाइयों की अलग-अलग राय होने की वजह से बैठक बेनतीजा रही। 

भारत की ओर से नामांकित 70 वर्षीय भंडारी और ग्रीनवुड हेग स्थिति अंतरराष्ट्रीय अदालत में फिर से चुने जाने के लिए दोबारा मुकाबला कर रहे हैं। आईसीजे की 15 सदस्यीय पीठ के एक तिहाई सदस्य हर तीन साल में नौ वर्ष के लिए चुने जाते हैं। इसके लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा और सुरक्षा परिषद में अलग-अलग, लेकिन एक ही समय चुनाव कराए जाते हैं। इसी कड़ी में सोमवार को दोनों निकायों में मतदान के लिए बैठक हुई। 

सुरक्षा परिषद में ग्रीनवुड भारी 
सुरक्षा परिषद में चुनाव के पांचों दौर में ग्रीनवुड को नौ मत मिले, जबकि भंडारी को पांच मत मिले। सुरक्षा परिषद में बहुमत के लिए आठ मतों की आवश्यकता होती है। ब्रिटेन सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य है। इसके मद्देनजर ग्रीनवुड, भंडारी की तुलना में लाभ की स्थिति में हैं।

महासभा में भंडारी कहीं आगे 
महासभा में हुए मतदान में भंडारी को सभी पांचों दौर के चुनाव में पूर्ण बहुमत मिला। उन्हें गुरुवार को हुए चुनाव में 115 मत मिले थे। सोमवार को हुए मतदान में यह संख्या बढ़कर 121 हो गई, जबकि पूर्ण बहुमत के लिए 97 मत आवश्यक है। इसके उलट  ग्रीनवुड को मिले मतों की संख्या गुरुवार के 76 से घट कर सोमवार को 68 हो रह गई।

चार जज पहले ही चुने गए 
आईसीजे में चुनाव के लिए मैदान में उतरे कुल छह में से चार उम्मीदवारों को संयुक्त राष्ट्र कानूनों के अनुसार पिछले गुरुवार को को संयुक्त राष्ट्र कानूनों के अनुसार चुना गया। उन्हें महासभा एवं सुरक्षा परिषद दोनों में पूर्ण बहुमत मिला। फ्रांस के रोनी अब्राहम, सोमालिया के अब्दुलकावी अहमद यूसुफ, ब्राजील के एंतोनियो अगस्ते कानकाडो त्रिनदादे और लेबनान के नवाफ सलाम को बहस्पतिवार को चार दौर के चुनाव के बाद चुना गया।

आईसीजे जज नियुक्त पर ब्रिटेन के रुख पर थरूर बिफरे  
आईसीजे के जज की नियुक्त पर ब्रिटेन की ओर से अपनाए गए रुख पर कांग्रेस नेता और संयुक्त राष्ट्र में पूर्व शीर्ष अधिकारी शशि थरूर ने नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा, महासभा की आवाज को लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा है।

थरूर ने एक ट्वीट में कहा, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और महासभा ने भारतीय एवं ब्रिटेन के उम्मीदवारों के बीच अंतरराष्ट्रीय अदालत के न्यायाधीश के चयन के लिए मतदान किया। इसमें संयुक्त राष्ट्र की वैधता और प्रभावशीलता दांव पर है। महासभा की आवाज को लंबे समय से नजरअंदाज किया जाता रहा है।  

कांग्रेस नेता ने कहा, संयुक्त राष्ट्र महासभा की एक बड़ी इकाई के सीधे मुकाबले में पहली बार सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के एक स्थायी सदस्य का उम्मीदवार महासभा में पूर्ण बहुमत हासिल नहीं कर पाया। महासभा का चुनाव 70 से अधिक वर्षों के विशेषाधिकार के अवांछित विस्तार के खिलाफ विरोध में बदल गया है। पी-5 (सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्य), 40 मतों से हार गया। 
 
थरूर ने कहा, यह चुनाव किसी न्यायाधीश या जिस देश से वह संबंध रखता है, उसके बारे में नहीं है। बल्कि यह चुनाव महासभा के विशेषाधिकार प्राप्त देशों के एक सदस्य के खिलाफ खड़ा होना है, जो हार गया है। लेकिन सुरक्षा परिषद में उसे छह के मुकाबले नौ सदस्यों से बढ़त मिल गई। ब्रिटेन महासभा में बहुमत की इच्छा को बाधित करने की कोशिश कर रहा है।  

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  • Web Title:Bhandari vs Greenwood: India UK in deadlock over election of ICJ judge
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