एआई के अत्यधिक इस्तेमाल से दुनिया परेशान
ऑस्ट्रेलिया ने म्यूजिक चार्ट्स से एआई से लिखे गानों पर बैन लगा दिया है, जिससे इंसानों द्वारा रचित गाने ही शामिल होंगे। ब्रिटेन में एआई शिकायतों के कारण सरकारी और स्कूलों का कामकाज प्रभावित हो रहा है। कई देशों में एआई के उपयोग पर नियम लगाए जा रहे हैं।

कहीं शिकायतों का पहाड़ तो कहीं गानों पर बैन ऑस्ट्रेलिया ने एआई से लिखे गानों को संगीत रैंकिंग में बैन किया
इंसानों द्वारा लिखे गाने ही शामिल होंगे
ब्रिटेन में एआई शिकायतें
ब्रिटेन में एआई से लिखी शिकायतों की बाढ़ आ गई है।
नई दिल्ली, एजेंसी। एआई के अत्यधिक इस्तेमाल से पूरी दुनिया में लोग परेशान हैं। ब्रिटेन में एआई से लिखी गई शिकायतों ने सरकारी दफ्तरों व स्कूलों के कामकाज का बोझ बढ़ा दिया है। वहीं ऑस्ट्रेलिया में म्यूजिक चार्ट्स से इंसानी कला को बचाने के लिए एआई गानों पर बैन लगाना पड़ा। भारत सहित दुनियाभर में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिसने एआई के अनियंत्रित इस्तेमाल को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
ऑस्ट्रेलिया में एआई गानों पर लगा बैन
ऑस्ट्रेलिया के आधिकारिक म्यूजिक चार्ट्स से एआई द्वारा बनाए गए गानों को प्रतिबंधित कर दिया गया है। 'ऑस्ट्रेलियन रिकॉर्डिंग इंडस्ट्री एसोसिएशन'के नए नियमों के मुताबिक, अब किसी भी गाने को चार्ट में शामिल होने के लिए इंसानों द्वारा लिखा गया होना अनिवार्य होगा। यह फैसला डीजे जोश फवाज द्वारा मैडोना के गाने 'लाइक अ प्रेयर' के कवर पर हुए विवाद के बाद आया है। इस गाने ने डांस चार्ट में टॉप किया था। यह गाना कमर्शियल रेडियो स्टेशनों की प्लेलिस्ट का अहम हिस्सा बना और अकेले स्पॉटिफाई पर इसे 4.8 करोड़ से ज्यादा बार सुना गया है।
क्या हैं नए नियम
-गाने का लेखन, मुख्य गायकी और प्रमुख वाद्ययंत्र इंसानों द्वारा ही प्रस्तुत होने चाहिए।
- मिक्सिंग, मास्टरिंग, ड्रम मशीन और ऑटो-ट्यून जैसे सपोर्टिव एआई टूल्स के इस्तेमाल की अनुमति बनी रहेगी।
-कलाकारों को एआई के इस्तेमाल की जानकारी देनी होगी। गलत जानकारी पाए जाने पर रैंकिंग वापस ली जा सकती है
ब्रिटेन: स्कूल और दफ्तरों में एआई शिकायतों से कामकाज प्रभावित
ब्रिटेन में एआई की मदद से लिखी जा रही शिकायतों के कारण स्कूलों, नगर निगमों और सार्वजनिक संस्थाओं का कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। आम नागरिक अब पार्किंग फाइन, कचरा न उठने जैसी छोटी समस्याओं के लिए भी एआई से 19 से 27 पन्नों की शिकायतें लिखवा रहे हैं। लॉयर्स इन लोकल गवर्नमेंट की प्रमुख डेबोरा इवांस के अनुसार, शिकायतों से निपटने के लिए स्टाफ दोगुना करना पड़ता है। सरकारी विभागों को वकीलों की सलाह लेनी पड़ रही है, जिससे खर्च और देरी दोनों बढ़ रहे हैं। एआई अक्सर फर्जी या गलत कानूनों का हवाला दे देता है, जिसे क्रॉस-चेक करने में अधिकारियों का काफी समय बर्बाद होता है। डाटा वॉचडॉग के अनुसार, एआई से जनरेट की गई जटिल अर्जियों के कारण जवाब देने में देरी हो रही है।
कई देश एआई पर लगाम की तैयारी में
इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ द फोनोग्राफिक इंडस्ट्री ने कहा कि लैटिन अमेरिका, मध्य पूर्व, अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया में उनके आधिकारिक चार्ट में इस्तेमाल के लिए एआई से जुड़े नियम लागू किए जाएंगे। ऑस्ट्रेलिया से पहले स्वीडन भी एआई गानों को बैन कर चुका है।
भारत में सुप्रीम कोर्ट की जताई थी आपत्ति
अमेरिका और भारत के सर्वोच्च न्यायालय में ऐसे मामले सामने आए जहां वकीलों ने एआई से जनरेट की गई ऐसी नजीरों को अदालत में पेश कर दिया, जो असल में अस्तित्व में ही नहीं थीं। अदालत ने राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण और राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण के उन आदेशों को रद्द कर दिया, जिनमें एआई से तैयार फर्ज़ी न्यायिक मिसालों का सहारा लिया गया था।
विभिन्न देशों में एआई उपयोग की दर
देश एआई उपयोग की दर (प्रतिशत में)
भारत 80%
संयुक्त अरब अमीरात 62%
सिंगापुर 56%
अमेरिका 50%
यूरोपीय संघ 20%
जापान 8.4%
स्रोत: एडीपी,एंथ्रोपिक,ओपनएआई डाटा


