चलते-चलते::अंतरिक्ष का 'डार्क एज' खंगालेगा सूटकेस के आकार का उपग्रह
कैम्ब्रिज के खगोलशास्त्री 13.5 अरब साल से पहले के ब्रह्मांड के रहस्यों को सुलझाने के लिए सूटकेस के आकार के उपग्रह 'कॉस्मोक्यूब' का प्रयोग कर रहे हैं। यह उपग्रह चांद की परिक्रमा करते हुए दुर्लभ रेडियो संकेतों को रिकॉर्ड करेगा। वैज्ञानिक 'डार्क मैटर' और तारों के निर्माण में इसकी भूमिका समझने की कोशिश कर रहे हैं।

कैम्ब्रिज, एजेंसी। खगोलशास्त्री ब्रह्मांड के सबसे शुरुआती दौर (13.5 अरब साल से भी पहले) के रहस्यों को सुलझाने के लिए अनोखा प्रयोग करने जा रहे हैं। इसके लिए सूटकेस के आकार का एक छोटा उपग्रह तैयार किया जा रहा है, जिसका नाम 'कॉस्मोक्यूब' रखा गया है। यह उपग्रह चांद की परikrma करते हुए ब्रह्मांड के पहले सितारे बनने से पहले के समय के दुर्लभ रेडियो संकेतों को रिकॉर्ड करेगा। कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय, सरे स्पेस टेक्नोलॉजी सहित वैज्ञानिकों की अंतरराष्ट्रीय टीम इसपर काम कर रही है。
चांद की ओट से करेगा खोज
बिग बैंग के बाद लगभग 15 करोड़ साल तक ब्रह्मांड में पूरी तरह अंधेरा था, जिसे 'कॉस्मिक डार्क एज' कहा जाता है। इस दौरान कोई तारा मौजूद नहीं था, लेकिन चारों तरफ हाइड्रोजन गैस फैली हुई थी। इस हाइड्रोजन से एक बहुत ही हल्का रेडियो संकेत निकलता है।
पृथ्वी पर एफएम रेडियो, मोबाइल सिग्नल और उपग्रहों के भारी शोर (रेडियो इंटरफेरेंस) के कारण इस हल्के सिग्नल को पकड़ना असंभव होता है। इसलिए कॉस्मोक्यूब को चांद की कक्षा में स्थापित किया जाएगा। जब यह उपग्रह चांद के पिछले हिस्से की ओट में जाएगा, तो चांद एक कुदरती ढाल की तरह काम करके पृथ्वी से आने वाली सभी रेडियो तरंगों को रोक देगा।
कैसे काम करेगा यह मिशन?
उपग्रह अपनी हर 2 घंटे की परikrma में लगभग 40 मिनट चांद के पिछले हिस्से में बिताएगा। अपने 2 साल के मिशन में यह लगभग 1000 घंटे का कीमती डाटा जुटाएगा। वैज्ञानिक इन संकेतों के जरिए यह समझना चाहते हैं कि 'डार्क मैटर' ने हाइड्रोजन गैस को खींचकर पहले तारों और आकाशगंगाओं के निर्माण में कैसे मदद की थी।
कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के अनुसार, इस छोटे से उपग्रह में बेहद एडवांस एंटीना और ऑटोमैटिक सिस्टम लगाए गए हैं जो खुद के शोर और कॉस्मिक शोर में अंतर पहचान सकेंगे। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि यह मिशन अगले पांच वर्षों के भीतर अंतरिक्ष में लॉन्च के लिए तैयार हो जाएगा।


