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अमेरिकी डिप्लोमैट ने बताया कि 15 अगस्त से ठीक पहले काबुल में क्या हुआ

हिन्दुस्तान,नई दिल्लीPublished By: Aditya Kumar
Thu, 16 Sep 2021 03:37 PM
अमेरिकी डिप्लोमैट ने बताया कि 15 अगस्त से ठीक पहले काबुल में क्या हुआ

तालिबान के साथ बातचीत के प्रभारी अमेरिकी राजनयिक जाल्मय खलीलजाद ने बताया है कि काबुल को कट्टर इस्लाम को मानने वालों के हाथों से दूर रखने और राजनीतिक परिवर्तन को लेकर तालिबान के साथ अंतिम समय में समझौता किया गया था। उन्होंने बताया कि गनी को तब तक पद पर बने रहना था जब तक कि दोहा में नए सरकार को लेकर समझौता न हो जाता। लेकिन 15 अगस्त को गनी के अफगानिस्तान छोड़ने के बाद तलिबान के काबुल पर कब्जा करना और आसान हो गया।

खलीलजाद ने बताया कि अंत तक भी हमने तालिबान से काबुल में नहीं आने को लेकर समझौता किया था। लेकिन हमें इस बात का जरा भी अंदेशा नहीं था कि अशरफ गनी अफगानिस्तान छोड़ने का प्लान बना चुके हैं। उन्होंने बताया कि गनी के जाने के बाद सुरक्षा व्यवस्था ढीला पड़ गया। ऐसे में तालिबान ने हमने पूछा कि आप काबुल की सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी ले रहे हैं? लेकिन हम इस स्थिति में नहीं थे। 

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक अफगानिस्तान में अमेरिकी दूत ने पहली बार 12 अगस्त को काबुल सरकार के साथ समझौते पर चर्चा की और दो दिन के बाद काबुल की सुरक्षा को लेकर कट्टर इस्लाम को मानने वालों से समझौता किया गया। हालांकि यह सच है कि भविष्य के सरकार में अशरफ गनी नहीं होने वाले थे। गनी का इस्तीफा तालिबान द्वारा पूर्व निर्धारित एक शर्त थी। 13 अगस्त तक तालिबान ने काबुल को चारों ओर से घेर लिया था। तालिबान के सैन्य बढ़त को देखते हुए अमेरिकी प्रशासन ने धीरे-धीरे अपनी मांगों को कम करते गए।

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