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अल्बर्ट आइंस्टीन बनने वाले थे इजरायल के राष्ट्रपति, फिर क्या हुआ कि बदलना पड़ा प्लान

इजरायल के पहले राष्ट्रपति के निधन के बाद अल्बर्ट आइंस्टीन को राष्ट्रपति बनने का ऑफर दिया गया। हालांकि उन्होंने कहा कि वह इस पद के योग्य नहीं हैं और ऑफर ठुकरा दिया।

अल्बर्ट आइंस्टीन बनने वाले थे इजरायल के राष्ट्रपति, फिर क्या हुआ कि बदलना पड़ा प्लान
Ankit Ojhaलाइव हिन्दुस्तान,तेल अवीवMon, 13 May 2024 01:17 PM
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इजरायल जैसे छोटे से देश ने दुनिया के कई ताकतवर देशों को अपनी ताकत का लोहा मनवा दिया। इजरायल दुनिया का एक मात्र यहूदी देश है। वहीं बीती सदी के सबसे प्रतिभाशाली व्यक्ति माने जाने वाले महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन भी यहूदी थी। आपको शायद ही बता हो कि अल्बर्ट आइंस्टीन को इजरायल का दूसरा राष्ट्रपति बनने का प्रस्ताव दिया गया था। हालांकि उन्होंने यह कहते हुए इनकार कर दिया कि उनमें राजनीतिक योग्यता नहीं है। उनके इस फैसले पर कई लोगों ने ऐतराज किया तो बहुत सारे लोगों ने तारीफ भी की। बता दें कि अगर आइंस्टीन इजरायल के राष्ट्रपति बन भी जाते तो ज्यादा परिवर्तन नहीं आने वाला था। क्योंकि इजरायल में राष्ट्रपति पद का सम्मान होता है लेकिन शासन की व्यवस्था पूरी तरह से प्रधानमंत्री के ही हाथों में होती है। 

इजरायल ने खुद को 1948 में स्वतंत्र घोषित कर दिया था। इजरायल के पहले राष्ट्रपति चेम वीजमन थे। चार साल बाद 1952 में उनका निधन हो गया। इसके बाद नए राष्ट्रपति की खोज शुरू हो गई। यह जिम्मेदारी विदेश मंत्रालय के पास थी। वहीं पहले राष्ट्रपति चेम वीजमन अल्बर्ट आइंस्टीन के बड़े  प्रशंसक थे। उनका कहना था कि जो आइंस्टीन ही इस धरती पर सबसे महान जीवित यहूदी हैं। उनकी बातों को ध्यान में रखते हुए विदेश मंत्रालय ने आइंस्टीन के सामने राष्ट्रपति बनने की पेशकश की। 

उस समय अमेरिका में इजरायल के राजदूत रहे अब्बा एबन ने भी उनसे राष्ट्रपति बनने की सिफारिश की। प्रधानमंत्री डेबिड बेन गुरियन भी चाहते थे कि आइंस्टीन इस ऑफऱ को स्वीकार कर लें। इतने दबाव के बाद भी महान वैज्ञानिक ने आदर सहित राष्ट्रपति बनने से इनकार कर दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा और उसमें धन्यवाद देते हुए कहा कि उनका अनुभव इस पद के लिए नहीं है और ना ही वह खुद को योग्य समझते हैं। वह विज्ञान की दुनिया में ही रहना चाहते थे। 

उनके प्रस्ताव को ठुकराने के बाद बहस छिड़ गई। बहुत सारे लोगों ने कहा कि यह एक अच्छा मौका था जिसका फायदा पूरे देश को मिलता। आइंस्टीन के पास बहुत क्षमता थी और इस पद पर उसका अच्छा उपयोग हो सकता था। वहीं कुछ लोगों ने यह कहते हुए तारीफ की कि आइंस्टीन को अपनी सीमाओं के बारे में पता है। बता दें कि आइंस्टीन इजरायल की काफी मदद करते थे। वह नस्लवाद से नफरत करते थे।