जिन्हें सुनाई थी सजा, आज बने जान के दुश्मन, देश छोड़कर भाग रही हैं अफगान महिला जज

Sep 03, 2021 10:32 pm ISTDeepak Mishra एजेंसियां, काबुल ,
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जो कभी न्याय की देवियां थीं, आज अपनी जान बचाने के लिए देश छोड़कर भाग रही हैं। यह हालात हैं अफगानिस्तान के, जहां महिला जज अलग देशों में शरण लेने को मजबूर हैं। इन महिला जजों की संख्या 250 है। असल में...

जिन्हें सुनाई थी सजा, आज बने जान के दुश्मन, देश छोड़कर भाग रही हैं अफगान महिला जज

जो कभी न्याय की देवियां थीं, आज अपनी जान बचाने के लिए देश छोड़कर भाग रही हैं। यह हालात हैं अफगानिस्तान के, जहां महिला जज अलग देशों में शरण लेने को मजबूर हैं। इन महिला जजों की संख्या 250 है। असल में तालिबान की सरकार बनने के बाद यहां पर तमाम कैदियों को जेल से रिहा कर दिया गया है। इनमें वे तालिबान लड़ाके भी हैं, जिन्हें इन महिला जजों ने सजा दी थी। इनके जेल से छूटने के बाद महिला जजों को चिंता सताने लगी है कि कहीं वो इन्हें अपना शिकार न बना लें। 

लगातार बना हुआ है जान का खतरा
अफगानिस्तान में तालिबान का कब्जा होने के बाद से ही बड़ी संख्या में लोग देश छोड़कर भाग रहे हैं। इनमें महिला जजों की संख्या भी काफी है। कुछ तो पहले ही देश छोड़कर भाग चुकी हैं। वहीं कुछ अभी भी यहां फंसी हुई हैं और यहां से निकलने की जुगत लगा रही हैं। महिला जजों और इन्हें बचाने में लगे एक्टिविस्ट्स ने इस बात की जानकारी दी है। गौरतलब है कि तालिबान ने शासन में आने के बाद से महिलाओं को काम पर जाने से रोक दिया है। हालांकि उसने महिला अधिकारों की रक्षा का दावा किया है, लेकिन इस बारे में अभी कोई कदम नहीं उठाया गया है। इस बात ने वहां पर तमाम कामकाजी महिलाओं को असुरक्षा की भावना से भर दिया है। 

तालिबान लड़ाके घर आकर पूछ रहे हैं कहां हैं जज
अफगानिस्तान में न्याय के क्षेत्र से जुड़ी महिलाएं पहले से ही निशाने पर रही हैं। इसी साल जनवरी में सुप्रीम कोर्ट की दो महिला जजों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। अब जबकि देश भर में तमाम अपराधियों को जेल से छोड़ दिया गया है तो न्याय क्षेत्र से जुड़ी महिलाओं को जिंदगी का खतरा महसूस होने लगा है। ऐसे ही खतरे का सामना करने के बाद एक अफगान महिला जज ने यूरोप की शरण ले ली है। इस महिला जज ने बताया कि करीब चार-पांच तालिबान लड़ाके उनके घर पर आए थे। यहां उन्होंने पूछा कि महिला जज कहां है? यह वो तालिबान लड़ाके थे, जिन्हें मैंने जेल में डाला था। बाद में यह महिला जज एक ग्रुप के साथ यहां से निकलने में कामयाब रही थी। उन्हें यहां निकालने में महिला जजों के अंतर्राष्ट्रीय संगठन (आईएडब्लूजे) ने मदद की थी। 

महिला वकील, पुलिस और ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट का यही हाल
यहां से निकलने के बाद से यह महिला जज अफगानिस्तान में फंसी हुई अन्य महिला जजों के लगातार संपर्क में हैं। उन्होंने बताया कि यह महिला जज उन्हें बताती हैं कि अगर जल्द कुछ नहीं किया गया तो उनकी जान जा सकती है। महिला जजों के अलावा कई महिला अफगान ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स भी अफगानिस्तान में फंसी हुई हैं। इनके ऊपर भी जान का खतरा है। होरिया मोसादिक नाम की महिला अफगान एक्टिविस्ट ने यह बात कही है। उन्होंने बताया कि जेल से छूट तालिबान लड़ाके, महिला जजों, वकीलों और पुलिसकर्मियों को धमकी दे रहे हैं। वह कह रहे हैं कि वो हमें छोड़ेंगे नहीं। 

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मूल रूप से आजमगढ़ के रहने वाले दीपक मिश्रा के लिए पत्रकारिता में आना कोई संयोग नहीं था। घर में आने वाली तमाम मैगजीन्स और अखबार पढ़ते-पढ़ते खुद अखबार में खबर लिखने तक पहुंच गए। हालांकि सफर इतना आसान भी नहीं था। इंटरमीडिएट की पढ़ाई के बाद जब घरवालों को इस इरादे की भनक लगी तो खासा विरोध भी सहना पड़ा। फिर मन में ठाना कि चलो जमीनी अनुभव लेकर देखते हैं। इसी मंशा के साथ ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान आजमगढ़ के लोकल टीवी में काम करना शुरू किया। कैमरे पर शहर की गतिविधियां रिकॉर्ड करते, न्यूज बुलेटिन लिखते और कुछेक बार उन्हें कैमरे के सामने पढ़ते-पढ़ते इरादा मजबूत हो गया कि अब तो मीडिया में ही जाना है।

आजमगढ़ के डीएवी डिग्री कॉलेज से इंग्लिश, पॉलिटिकल साइंस और हिस्ट्री विषयों में ग्रेजुएशन के बाद वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में मास्टर डिग्री। इसके बाद अखबारों में नौकरी का सिलसिला शुरू हुआ आज अखबार से। फिर दैनिक जागरण के बाइलिंगुअल अखबार आई नेक्स्ट में वाराणसी में डेस्क पर नौकरी। वहां से सेंट्रल डेस्क कानपुर का सफर और फिर पत्रिका अखबार के इवनिंगर न्यूज टुडे में सेंट्रल डेस्क हेड की जिम्मेदारी। बाद में पत्रिका अखबार के लिए खेल डेस्क पर भी काम करने का मौका मिला। पत्रिका ग्रुप में काम करते हुए 2014 फीफा वर्ल्ड कप की कवरेज के लिए अवॉर्ड भी मिला।

यूपी में वापसी हुई फिर से दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में और जिम्मेदारी मिली गोरखपुर में डेस्क हेड की। आई नेक्स्ट की दूसरी पारी में दो बार गोरखपुर एडिशन के संपादकीय प्रभारी की भी भूमिका निभाई। वहीं, कुछ अरसे तक इलाहाबाद में डेस्क हेड की जिम्मेदारी भी संभाली। दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में काम करने के दौरान, डिजिटल फॉर्मेट के लिए वीडियो स्टोरीज करते रहे। इसमें कुंभ 2019 के लिए वीडियो स्टोरीज भी शामिल हैं। बाद में यहां पर पॉडकास्ट के दो शो किए। जिनमें से एक आईपीएल रिकॉर्ड बुक और दूसरा शहर का किस्सा रहा।

जून 2021 से लाइव हिन्दुस्तान में होम टीम का हिस्सा। इस दौरान तमाम चुनाव, राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रमों की खबरें की। साथ ही क्रिकेट टीम के साथ सहभागिता निभाते हुए आईपीएल और टी-20 विश्वकप, चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान कवरेज में सक्रिय भूमिका निभाई। कुंभ 2025 के दौरान लाइव हिन्दुस्तान के लिए वीडियो स्टोरीज कीं।

अगर रुचि की बात करें तो फिल्में देखना, किताबें पढ़ना, कुछ नई स्किल्स सीखते रहना प्रमुख हैं। मिररलेस कैमरे के साथ वीडियो शूट करना और प्रीमियर प्रो पर एडिटिंग में दक्षता। प्रिय विषयों में सिनेमा और खेल दिल के बेहद करीब हैं।

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