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जर्मनी में कोरोना टीकाकरण के बाद दस लोगों की मौत, कनाडा में फाइजर वैक्सीन लगाने वाले डॉक्टर ने तोड़ा दम

जर्मनी में कोरोना संक्रमण से बचाव में कारगर टीका लगवाने के बाद दस लोगों की मौत की खबर सामने आई है। पॉल एर्लिश इंस्टीट्यूट (पीईआई) के विशेषज्ञ मामले में मौत की वजहें खंगालने की कोशिशों में जुट गए हैं।...

जर्मनी में कोरोना टीकाकरण के बाद दस लोगों की मौत, कनाडा में फाइजर वैक्सीन लगाने वाले डॉक्टर ने तोड़ा दम
एजेंसियां,बर्लिनFri, 15 Jan 2021 07:24 PM
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जर्मनी में कोरोना संक्रमण से बचाव में कारगर टीका लगवाने के बाद दस लोगों की मौत की खबर सामने आई है। पॉल एर्लिश इंस्टीट्यूट (पीईआई) के विशेषज्ञ मामले में मौत की वजहें खंगालने की कोशिशों में जुट गए हैं। यह इंस्टीट्यूट जर्मनी में चिकित्सकीय उत्पादों की सुरक्षा जांच का जिम्मा संभालता है।

पीईआई से जुड़ी ब्रिगिट केलर-स्टेनिसलॉस्की ने संवाददाताओं को बताया कि सभी मृतक गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे। उनकी उम्र 79 से 93 साल के बीच थी। टीकाकरण और मौत की अवधि के बीच चंद घंटों से लेकर चार दिन तक का फासला बताया जा रहा है। ब्रिगिट ने कहा, ‘सभी मृतक गंभीर अवस्था में थे। उनका विभिन्न बीमारियों को लेकर इलाज चल रहा था। हम दसों मामलों का अध्ययन कर रहे हैं। शुरुआती जांच से लगता है कि मरीजों की जान बीमारियों की वजह से गई। कोविड टीकाकरण का संभवत: इससे कोई संबंध नहीं है।’

8.42 लाख लोगों को लग चुका है टीका
जर्मनी ने दिसंबर 2020 के अंत में राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान की शुरुआत की थी। देश में फाइजर और बायोएनटेक की ओर से विकसित वैक्सीन लगाई जा रही है। गुरुवार तक 8.42 लाख लोगों को पहली खुराक दी जा चुकी है। सबसे पहले 80 पार बुजुर्गों, नर्सिंग होम में रह रहे मरीजों-स्टाफ और स्वास्थ्यकर्मियों का टीकाकरण किया जा रहा है।

साइडइफेक्ट के छह नए मामले सामने आए
पॉल एर्लिश इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञों ने शुक्रवार को जर्मनी में कोविड टीके से गंभीर साइडइफेक्ट के छह नए मामले दर्ज किए। देश में अब तक वैक्सीन से जुड़े कथित दुष्परिणाम के 325 मामले रिकॉर्ड किए जा चुके हैं। इनमें 51 गंभीर मामले में शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि ये आंकड़े अप्रत्याशित नहीं हैं। अमेरिका में भी साइडइफेक्ट के कई मामले सामने आ चुके हैं।

फाइजर का टीका लगवाने वाले डॉक्टर ने दम तोड़ा
दूसरी ओर, कनाडा में फाइजर-बायोएनटेक की ओर से विकसित टीका लगवाने के तीन दिन बाद एक डॉक्टर की मौत से हड़कंप मच गया। स्वास्थ विभाग के अधिकारियों ने गुरुवार को मामले की जांच शुरू कर दी। वे डॉक्टर की मौत में टीके की भूमिका का भी पता लगाएंगे। इस बीच, फाइजर ने सफाई दी कि मामले की जांच जारी है। हालांकि, हमारा मानना है कि फ्लोरिडा के डॉक्टर की मौत में वैक्सीन की कोई भूमिका नहीं है। माउंट सिनाई मेडिकल सेंटर के शीर्ष प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. ग्रेगरी माइकल ने 18 दिसंबर को टीका लगवाया था। तीन दिन बाद 21 दिसंबर को उनकी मौत हो गई थी।

80 पार बुजुर्गों को खतरा संभव: नॉर्वे
इस बीच, नॉर्वे सरकार ने शुक्रवार को चेताया कि 80 पार बुजुर्ग, जो कि गंभीर रूप से बीमार हैं, उनके लिए कोविड टीकाकरण बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। देश में कोरोना टीका की पहली खुराक लेने के कुछ समय बाद ऐसे 23 मरीजों की मौत की खबर सामने आ चुकी है। नॉर्वे मेडिसिन एजेंसी के मुताबिक अब तक प्राप्त 13 मृतकों की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में अंदेशा जताया गया है कि वैक्सीन से होने वाले आम साइडइफेक्ट मरीजों में गंभीर रिएक्शन का सबब बने। पहले से कमजोर और बीमार बुजुर्ग इन दुष्परिणामों को झेल नहीं पाए।

फिलीपींस में फाइजर के टीके के आपात इस्तेमाल को मंजूरी
वहीं, फिलीपींस ने फाइजर और बायोएनटेक की ओर से विकसित कोविड टीके को आपात परिस्थितियों में इस्तेमाल करने की शुक्रवार को मंजूरी दे दी। खाद्य एवं औषधि प्राधिकरण ने बताया कि फाइजर का टीका कोरोना से बचाव में कारगर मिला है। 16 साल से अधिक उम्र के लोगों में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। फाइजर की वैक्सीन फिलीपींस में आपात स्थितियों में इस्तेमाल की मंजूरी पाने वाली पहली वैक्सीन है। सरकार चीनी कंपनी साइनोवैक के आवेदन पर भी विचार कर रही है। उसकी फरवरी में कंपनी से 2.5 करोड़ वैक्सीन खरीदने की योजना है।

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