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काबुल में बेपर्दा हुए चीन को राहत, 10 चीनी जासूसों को अफगान सरकार ने किया चुपके से किया माफ, चार्टर्ड प्लेन से लौटे घर

जिस घटना की वजह से पूरी दुनिया में चीन की जगहंसाई होने वाली थी, अब उसमें ड्रैगन को बड़ी राहत मिल गई है। अफगान सरकार ने जासूसी और आतंकी नेटवर्क चलाने के आरोप में पकड़े गए 10 चीनी नागरिकों को चुपके से...

काबुल में बेपर्दा हुए चीन को राहत, 10 चीनी जासूसों को अफगान सरकार ने किया चुपके से किया माफ, चार्टर्ड प्लेन से लौटे घर
शिशिर गुप्ता,नई दिल्लीMon, 04 Jan 2021 12:45 PM
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जिस घटना की वजह से पूरी दुनिया में चीन की जगहंसाई होने वाली थी, अब उसमें ड्रैगन को बड़ी राहत मिल गई है। अफगान सरकार ने जासूसी और आतंकी नेटवर्क चलाने के आरोप में पकड़े गए 10 चीनी नागरिकों को चुपके से माफी दे दी है। इस मामले से परिचित लोगों ने सोमवार को कहा कि अफगानिस्तान ने 10 दिसंबर को काबुल में एक आतंकी सेल चलाने के मामले में गिरफ्तार किए गए 10 चीनी नागरिकों को रिहा कर दिया है और उन्हें देश छोड़ने की मंजूरी दे दी है। जासूसी मॉड्यूल के ये 10 सदस्य चीनी सरकार के द्वारा अरेंज की गई स्पेशल फ्लाइट से अपने देश चले गए। 

हालांकि, किस आधार पर इन 10 चीनी जासूसों को रिहा किया गया है, अब तक इसका पता नहीं चल पाया है। काबुल में राजनयिकों और सुरक्षा अधिकारियों ने हिन्दुस्तान टाइम्स को पुष्टि की है कि राष्ट्रपति अशरफ गनी से इजाजत मिलने के बाद शनिवार को सभी चीनी जासूस चार्टेड प्लेन पर सवार होकर देश छोड़कर चले गए। 23 दिन की हिरासत के बाद छोड़े गए इन दसों जासूसों को औपचारिक रूप से चार्ज्ड नहीं किया गया।

गौरतलब है कि इससे पहले हमारी सहयोगी वेबसाइट हिन्दुस्तान टाइम्स ने 25 दिसंबर को सूचना दी थी कि अफगानिस्तान की एजेंसी राष्ट्रीय सुरक्षा निदेशालय (एनडीएस) ने राजधानी काबुल में एक 10 सदस्यीय चीनी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया था, जो एक आतंकी सेल का संचालन कर रहा था और दस चीनी नागरिकों को गिरफ्तार किया था। अफगानिस्तान ने प्रस्ताव दिया था कि अगर चीन लिखित रूप से मांफी मांगता है तो उसके नागरिकों को माफ कर दिया जाएगा। अफगानिस्तान को शक था कि चीन ने जासूसी के लिए इन लोगों को तैनात किया था, जिसमें एक महिला भी शामिल थी। 

अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी को चीनी जासूसों की गिरफ्तारियों से अवगत करा दिया गया था। जिसके बाद उन्होंनेअफगान इंटेलिजेंस एजेंसी के पूर्व चीफ और पहले उप राष्ट्रपति अमरुल्ला सलेह को पूरे मामले की जांच की जिम्मेदारी सौंप दी थी। हालांकि, जैसा कि अपेक्षित था अमरुल्ला सालेह ने 27 दिसंबर को अपने फेसबुक पेज पर जारी सुरक्षा ब्रीफिंग से चीनी नागरिकों की गिरफ्तारी को एक तरह से सांकेतिक तौर पर खारिज कर दिया था। 

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उन्होंने कहा, 'खैरख्वाह क्षेत्र में ऑपरेशन चलाने के आरोप में किसी भी विदेशी नागरिक को गिरफ्तार नहीं किया गया है। गिरफ्तार किए गए palmadis हैं। अफगानिस्तान के प्रथम उपराष्ट्रपति ने कहा कि उनमें से कई को अपहरण और हत्या में शामिल होने के संदेह में गिरफ्तार किया गया था।' जबकि इससे पहले अमरुल्ला सलेह ने चीनी नागरिकों की गिरफ्तारी के संबंध में काबुल में चीनी राजदूत वांग यु के साथ मुलाकत भी की थी। सलेह ने कहा था कि अफगानिस्तान सरकार चीनी जासूसों को चीन से औपचारिक माफीनामे के बाद छोड़ सकती है। अफगानिस्तान ने कहा था इस माफीनामे में चीन को काबुल का भरोसा तोड़ने और अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन करने की बात स्वीकार करनी होगी। इतना ही नहीं, अमरुल्ला सलेह ने चीनी राजदूत से यह भी कहा था कि अगर चीन ऐसा नहीं करता है, तो अफगानिस्तान की सरकार आपराधिक मामला दर्ज करते हुए कार्रवाई करेगी। 

काबुल में सीनियर डिप्लोमेट के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए 10 जासूसों में दो चीनी नागरिक ली और महिला शा दोनों हक्कानी नेटवर्क के संपर्क में थे। शा हांग काबुल में एक रेस्टोरेंट चलाती थी और यहीं से आतंकी सेल ऑपरेट होता था। एनडीएस टीम ने 10 दिसंबर को जब यांगयांग के घर पर रेड मारी तो वहां से हथियार, कीटामाइन पाउडर और ड्रग बरामद हुए थे।