Hindi Newsविदेश न्यूज़Some Call It Mother Of All Deals, Why EU Chief says so On India Trade Pact At Davos
सभी डील्स की जननी... भारत-EU के बीच व्यापार समझौते पर ऐसा क्यों बोलीं गणतंत्र दिवस की अतिथि

सभी डील्स की जननी... भारत-EU के बीच व्यापार समझौते पर ऐसा क्यों बोलीं गणतंत्र दिवस की अतिथि

संक्षेप:

EU प्रमुख वॉन डर लेयेन ने भारत को यूरोप की नई आर्थिक रणनीति का अहम हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र इस सदी का आर्थिक केंद्र है और यूरोप भारत जैसे देशों के साथ अपने रिश्ते और मजबूत करना चाहता है।

Jan 20, 2026 09:57 pm ISTPramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, दावोस
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यूरोपीय संघ (EU) की प्रमुख उर्सुला वॉन डर लेयेन ने कहा है कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच होने वाला मुक्त व्यापार समझौता (FTA) अब अपने निर्णायक चरण में पहुंच गया है। उन्होंने दावोस में चल रहे विश्व आर्थिक मंच (WEF) में कहा कि दोनों पक्ष एक “ऐतिहासिक व्यापार समझौते के बेहद करीब” हैं, जिसे कुछ लोग “मदर ऑफ ऑल डील्स” भी कह रहे हैं। अपने संबोधन में वॉन डर लेयेन ने कहा कि यूरोप टैरिफ की बजाय निष्पक्ष व्यापार, अलगाव की बजाय साझेदारी और शोषण की बजाय टिकाऊ विकास को बढ़ावा देना चाहता है। उन्होंने बताया कि दावोस के तुरंत बाद वह भारत दौरे पर जाएंगी, हालांकि अभी कुछ मुद्दों पर काम बाकी है।

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क्यों है यह समझौता खास?

उन्होंने कहा, “हम एक ऐतिहासिक व्यापार समझौते के मुहाने पर खड़े हैं। कुछ लोग इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहते हैं।” EU प्रमुख के अनुसार, यह समझौता करीब दो अरब लोगों का साझा बाजार बनाएगा और दुनिया की लगभग 25% जीडीपी को कवर करेगा। इससे यूरोपीय कंपनियों को भारत जैसे तेजी से बढ़ते बाजार में पहले कदम का बड़ा फायदा मिलेगा।

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भारत EU की रणनीति का केंद्र

वॉन डर लेयेन ने भारत को यूरोप की नई आर्थिक रणनीति का अहम हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र इस सदी का आर्थिक केंद्र है और यूरोप भारत जैसे देशों के साथ अपने रिश्ते और मजबूत करना चाहता है। उन्होंने कहा कि EU खासतौर पर क्लीन टेक्नोलॉजी, डिजिटल ढांचा, दवाइयों और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे क्षेत्रों में भारत के साथ सप्लाई चेन मजबूत करना चाहता है।

जल्द भारत दौरा

EU प्रमुख के ये बयान ऐसे समय में आया है, जब वह 25 से 27 जनवरी 2026 के बीच भारत के दौरे पर आने वाली हैं। भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंतोनियो कोस्टा और EU प्रमुख उर्सुला वॉन डर लेयेन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर भारत आएंगे। दोनों नेता भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि होंगे, जो भारत-EU संबंधों की बढ़ती अहमियत को दर्शाता है।

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शिखर सम्मेलन और बिजनेस फोरम

27 जनवरी को नई दिल्ली में 16वां भारत-EU शिखर सम्मेलन होगा, जिसकी सह-अध्यक्षता प्रधानमंत्री मोदी करेंगे। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच उच्चस्तरीय बैठकें होंगी और एक भारत-EU बिजनेस फोरम भी आयोजित किया जाएगा। अगर यह व्यापार समझौता पूरा होता है तो यह दुनिया के सबसे बड़े और महत्वाकांक्षी समझौतों में से एक होगा। इसमें केवल टैक्स नहीं, बल्कि सेवाएं, निवेश, डिजिटल व्यापार, पर्यावरण मानक, नियमों में सहयोग जैसे मुद्दे भी शामिल होंगे। भारत को इससे यूरोप जैसे बड़े बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी, जबकि यूरोप को भारत जैसे तेज़ी से बढ़ते देश में मजबूत पकड़ मिलेगी। हालांकि अभी कुछ जटिल मुद्दे बाकी हैं, लेकिन दावोस से आए संकेत बताते हैं कि भारत और यूरोपीय संघ इस ऐतिहासिक समझौते को पूरा करने के बेहद करीब हैं। आने वाले दिनों में नई दिल्ली में होने वाली बैठकें इस दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती हैं।

Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

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