फीका पापड़ नहीं फाइन तंदूरी… जब भारत संग ट्रेड डील को लेकर ब्रिटिश संसद में छिड़ गई मजेदार बहस
कुछ संसद भारत संग हुए ट्रेड डील को ब्रिटेन के लिए घाटे का सौदा बता रहे थे। हालांकि ट्रेड मंत्री क्रिस ब्रायंट ने समझौते का बचाव किया। उन्होंने कहा कि यह ब्रेक्जिट के बाद ब्रिटेन का सबसे महत्वपूर्ण द्विपक्षीय फ्री ट्रेड समझौता है।

भारत और ब्रिटेन के बीच बीते साल ऐतिहासिक FTA पर सहमति बनी थी। दोनों देशों ने 24 जुलाई, 2025 को मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर किए थे जिसका लक्ष्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर 120 अरब डॉलर तक पहुंचाना है। अब इस डील को लेकर हाल ही में ब्रिटिश संसद में एक दिलचस्प बहस देखने को मिली। ब्रिटेन की संसद के हाउस ऑफ कॉमन्स में जहां एक तरफ कुछ सांसद इसे ब्रिटेन के लिए घाटे का सौदा बताते दिखे, वहीं सरकार ने इसका बचाव किया। इस दौरान एक सांसद ने डील को ‘सॉगी पॉपडम’ यानी फीके और नरम पापड़ जैसा बता दिया, तो दूसरी ओर देश के व्यापार मंत्री ने डील की तुलना ‘फाइन तंदूरी’ यानी दमदार और स्वादिष्ट तंदूरी खाने से की।
सांसदों ने उठाए सवाल
ट्रेड सेक्रेटरी एंड्रयू ग्रिफिथ ने समझौते की आलोचना करते हुए कहा कि यह डील ब्रिटेन के लिए उम्मीद के मुताबिक मजबूत नहीं है। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश बिजनेस को देश की अर्थव्यवस्था को बढ़ाने के लिए जबरदस्त मसालेदार डील की जरूरत थी, लेकिन प्रधानमंत्री ‘तीखी डील’ की जगह ‘सोगी पापड़ का बैग’ लेकर लौटे। ग्रिफिथ ने खास तौर पर सेवाओं के क्षेत्र के लिए सीमित प्रावधानों पर चिंता जताई और कहा कि कानूनी सेवाओं जैसे सेक्टर को पर्याप्त समर्थन नहीं मिला।
कुछ सांसदों ने उस प्रावधान पर भी सवाल उठाए, जिसके तहत भारतीय कामगार और उनके नियोक्ता ब्रिटेन में तीन साल तक नेशनल इंश्योरेंस योगदान से बच सकते हैं। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि ब्रिटिश निर्यातकों को टैरिफ कटौती का लाभ मिलने में पांच से दस साल तक का समय लग सकता है। द्विपक्षीय निवेश संधि की कमी को भी मुद्दा बनाया गया। कंजरवेटिव सांसद केटी लैम ने चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिका में पहले से ऐसा मॉडल देखा गया है, जहां भारतीय कंसल्टेंसी कंपनियां अपने कर्मचारियों को अमेरिकी कंपनियों को लीज पर देती हैं, जिससे कम वेतन पर काम करवाया जाता है।
ट्रेड मिनिस्टर ने किया बचाव
दूसरी ओर ट्रेड मंत्री क्रिस ब्रायंट ने समझौते का बचाव किया। उन्होंने कहा कि यह ब्रेक्जिट के बाद ब्रिटेन का सबसे महत्वपूर्ण द्विपक्षीय फ्री ट्रेड समझौता है। एक सेलेक्ट कमिटी रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि यूके इंडिया व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता ब्रिटेन के लिए यूरोपीय संघ से बाहर निकलने के बाद का सबसे बड़ा आर्थिक समझौता है।
ब्रायंट ने सेवाओं के क्षेत्र की अनदेखी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि इस डील को फेडरेशन ऑफ स्मॉल बिजनेस, एचएसबीसी, स्टैंडर्ड चार्टर्ड, ईवाई, द सिटी यूके और रिवोल्यूट जैसे प्रमुख बिजनेस समूहों का समर्थन मिला है। उन्होंने कहा कि ये संस्थाएं इस डील को ‘सोगी पॉपडम’ नहीं बल्कि 'फाइन तंदूरी' मानती हैं।
ब्रायंट के मुताबिक यह समझौता 2040 तक ब्रिटेन के सकल घरेलू उत्पाद में 4.8 अरब पाउंड यानी 0.13 प्रतिशत की बढ़ोतरी करेगा। इससे वेतन में 2.2 अरब पाउंड की वृद्धि और द्विपक्षीय व्यापार में सालाना 25.5 अरब पाउंड का इजाफा होने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि भारत 90 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शुल्क घटाएगा और औसत ड्यूटी 15 प्रतिशत से घटाकर 3 प्रतिशत कर देगा, जिससे ब्रिटिश निर्यातकों को हर साल लगभग 400 मिलियन पाउंड की बचत होगी।
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Jagriti Kumariजागृति को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 2 साल पहले लाइव हिन्दुस्तान के साथ करियर की शुरुआत हुई। उससे पहले डिग्री-डिप्लोमा सब जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में। भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और संत जेवियर्स कॉलेज रांची से स्नातक के बाद से खबरें लिखने का सिलसिला जारी। खबरों को इस तरह से बताना जैसे कोई बेहद दिलचस्प किस्सा, जागृति की खासियत है। अंतर्राष्ट्रीय संबंध और अर्थव्यवस्था की खबरों में गहरी रुचि। लाइव हिन्दुस्तान में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शानदार कवरेज के लिए इंस्टा अवॉर्ड जीता और अब बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर रोजाना कुछ नया सीखने की ललक के साथ आगे बढ़ रही हैं। इसके अलावा सिनेमा को समझने की जिज्ञासा है।
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