स्मार्ट चश्मे बन रहे जासूसी का नया हथियार! स्कूल-कॉलेजों में बढ़ा प्राइवेसी का खतरा

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कई मामलों में आर्टिस्ट्स के पैंतरों की नकल करते हुए लड़कियों से उनके फोन नंबर मांगने और उन्हें रिकॉर्ड करने की घटनाएं भी सामने आई हैं। वहीं देश में प्रतियोगी परीक्षाओं में भी स्मार्ट ग्लासेस का इस्तेमाल नकल के लिए हो रहा है।

Smart glasses being used for spying in schools
स्मार्ट चश्मे बन रहे जासूसी का नया हथियार

तकनीक के इस दौर में कैमरे वाले स्मार्ट ग्लासेस (स्मार्ट चश्मे) निजता और सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो डाले गए हैं जिनमें मेटा और रे-बैन के स्मार्ट चश्मों का इस्तेमाल स्कूल-कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्र बिना सहमति रिकॉर्डिंग और जासूसी के लिए कर रहे हैं। यह प्रवृत्ति अमेरिका, भारत सहित दुनिया के कई देशों में बढ़ रही है। इस प्रवृत्ति ने साइबर बुलिंग, प्राइवेसी और सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।

दायरा सिर्फ अनजाने में रिकॉर्डिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि लड़के इन स्मार्ट चश्मों को पहनकर लोगों का पीछा करते हैं, उनके लुक्स पर तंज कसते हैं और भद्दे प्रैंक्स के वीडियो बना रहे हैं। कई मामलों में, आर्टिस्ट्स के पैंतरों की नकल करते हुए लड़कियों से उनके फोन नंबर मांगने और उन्हें रिकॉर्ड करने की घटनाएं भी सामने आई हैं।

देश में प्रतियोगी परीक्षाओं में स्मार्ट ग्लासेस का इस्तेमाल हाई-टेक नकल और जासूसी के लिए किया गया। राजस्थान पुलिस ने इसका खुलासा किया था। वहीं पुणे में दो इंजीनियरिंग छात्रों को मई में परीक्षा के दौरान मेटा स्मार्ट ग्लास पहने पकड़ा गया था। ऐसे ही हार्वर्ड के दो छात्र तकनीक का गलत इस्तेमाल करते पकड़े गए थे।

स्कूलों में सुरक्षित माहौल खत्म हो रहा

विशेषज्ञों के मुताबिक स्मार्ट चश्मों का बढ़ता चलन स्कूलों के सुरक्षित माहौल को खत्म कर रहा है। फ्रेम में छिपे हुए सूक्ष्म कैमरों के कारण किसी के लिए भी यह पहचानना बेहद मुश्किल हो जाता है कि सामने वाला व्यक्ति उनकी वीडियो बना रहा है या सिर्फ चश्मा पहने खड़ा है। कंपनियों का दावा है कि रिकॉर्डिंग के दौरान चश्मे पर एक छोटी इंडिकेटर लाइट जलती है, लेकिन जानकारों का कहना है कि इस लाइट को आसानी से छिपाया या बाईपास किया जा सकता है। इसके चलते, यह फीचर जासूसी को रोकने में अप्रभावी साबित हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि शैक्षणिक संस्थानों में स्मार्ट ग्लासेस को अनुमति देना खतरनाक है। इससे छात्रों की निजता, सुरक्षा और मानसिक सहजता पर गंभीर असर पड़ सकता है। ऐसे में स्कूलों में स्पष्ट नियम और सख्त निगरानी जरूरी हो गई है।

विरोध के बाद कंपनियों ने कुछ कदम भी उठाए हैं। मेटा ने सॉफ्टवेयर अपडेट जारी किया, जिससे अगर लाइट को ढका या क्षतिग्रस्त किया गया, तो चश्मे का कैमरा अपने आप बंद हो जाएगा। वहीं मेटा और अन्य टेक कंपनियों ने नए हार्डवेयर सर्किट पेटेंट कराए हैं, जो सीधे सर्किट लेवल पर कैमरा और माइक को लॉक कर देते हैं। इसे कोई सॉफ्टवेयर हैक, ऐप या रिमोट अपडेट बाइपास नहीं कर सकता। फोटो लेने या वीडियो रिकॉर्ड करने पर चश्मे की फ्रंट एलईडी लाइट जलना अनिवार्य किया गया है और साथ ही एक अलर्ट टोन भी बजता है, ताकि आसपास के लोगों को पता चल सके। यूजर गाइडलाइन में स्कूलों, चेंजिंग रूम में कैमरा बंद रखने की अपील की जा रही है।

Jagriti Kumari

लेखक के बारे में

Jagriti Kumari

जागृति को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 2 साल पहले लाइव हिन्दुस्तान के साथ करियर की शुरुआत हुई। उससे पहले डिग्री-डिप्लोमा सब जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में। भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और संत जेवियर्स कॉलेज रांची से स्नातक के बाद से खबरें लिखने का सिलसिला जारी। खबरों को इस तरह से बताना जैसे कोई बेहद दिलचस्प किस्सा, जागृति की खासियत है। अंतर्राष्ट्रीय संबंध और अर्थव्यवस्था की खबरों में गहरी रुचि। लाइव हिन्दुस्तान में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शानदार कवरेज के लिए इंस्टा अवॉर्ड जीता और अब बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर रोजाना कुछ नया सीखने की ललक के साथ आगे बढ़ रही हैं। इसके अलावा सिनेमा को समझने की जिज्ञासा है।

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