ईरान पर हमले के कई कारण, भलाई इसी में है...; अमेरिका ने दे दी एक और वॉर्निंग

Feb 19, 2026 09:47 am ISTNisarg Dixit लाइव हिन्दुस्तान
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प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट का बयान ऐसे समय में आया है, जब जिनेवा में अमेरिका-ईरान के बीच परमाणु वार्ता फिर से शुरू हुई है, जिसमें अमेरिका के दूत स्टीव विटकॉफ और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ओमानी मिल रहे हैं।

ईरान पर हमले के कई कारण, भलाई इसी में है...; अमेरिका ने दे दी एक और वॉर्निंग

तनाव के बीच अमेरिका ने ईरान को चेतावनी दे दी है। अमेरिका ने कहा है कि ईरान की डील करने में ही भलाई है। साथ ही कहा कि किसी के भी पास ईरान पर हमला करने के कई कारण हैं। यह बयान ऐसे समय पर सामने आया है, जब आशंका जताई जा रही है कि अमेरिका आने वाले कुछ दिनों में ईरान पर हमला कर सकता है। हालांकि, अमेरिका ने इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है।

प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने गुरुवार को कहा, 'ईरान के खिलाफ हमला करने की कोई भी कई वजह और तर्क दे सकता है। राष्ट्रपति ने कमांडर-इन-चीफ के रूप में 'ऑपरेशन मिडनाइट हैमर' के साथ एक बहुत ही सफल अभियान चलाया था, जिसने ईरान के परमाणु केंद्रों को पूरी तरह से नष्ट कर दिया। हालांकि, राष्ट्रपति ने ईरान या दुनिया के किसी भी देश के मामले में हमेशा यह स्पष्ट किया है कि कूटनीति ही उनका पहला विकल्प है। ईरान के लिए यही समझदारी होगी कि वह राष्ट्रपति ट्रंप और इस प्रशासन के साथ कोई समझौता कर ले।'

जारी है चर्चाओं का दौर

लेविट ने बताया है कि ट्रंप कई लोगों से इस संबंध में बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'राष्ट्रपति कई लोगों से बात कर रहे हैं, जिनमें सबसे महत्वपूर्ण उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम है। राष्ट्रपति इस मामले को बहुत गंभीरता से लेते हैं। वे हमेशा वही सोचते हैं जो अमेरिका, हमारी सेना और अमेरिकी जनता के हित में हो, और किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई का निर्णय वे इसी आधार पर लेते हैं।'

ईरान से बातचीत

लेविट का बयान ऐसे समय में आया है, जब जिनेवा में अमेरिका-ईरान के बीच परमाणु वार्ता फिर से शुरू हुई है, जिसमें अमेरिका के दूत स्टीव विटकॉफ और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ओमानी मिल रहे हैं। हालांकि दोनों पक्षों ने बात कुछ आगे बढ़ने की बात कही है, लेकिन अधिकारियों ने कहा है कि अभी भी काफी कमियां हैं। इधर, अमेरिका सेना लगातार ऐक्शन मोड में नजर आ रही है।

ईरान ने भी धमकाया

एजेंसी वार्ता के अनुसार, विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप की ओर से 2025 की शुरुआत में अपनाई गई अधिकतम दवाब की नीति ने ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव डाला है, जिससे अमेरिका के अधिकारी कूटनीति सफलता के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर पैदा कर रहे हैं। इसके बावजूद ईरान प्रतिबंध में राहत की मांग कर रहा है और उसने चेतावनी दी है कि अमेरिका का कोई भी हमला इस इलाके में अमेरिकी सेना के खिलाफ जवाबी कार्रवाई शुरू कर देगा।

बात फेल तो शुरू होगा वॉर

हाल ही में अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे डी वेंस के हालिया टिप्पणियों के अनुरूप है, जिन्होंने एक न्यूज चैनल को बताया था कि अमेरिकी प्रशासन को कूटनीति के जरिये समस्या का समाधान बहुत पसंद है, लेकिन अगर बातचीत विफल हो जाती है तो सैन्य कार्रवाई लेने का विकल्प भी उसके पास है।

सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से लिखा है कि शीर्ष राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारियों ने ट्रंप को बताया है कि सेना शनिवार तक हमले के लिए तैयार है। हालांकि, कहा जा रहा है कि कोई भी टाइमलाइन इस वीकेंड के बाद तक भी आगे बढ़ सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों ने बताया है कि ट्रंप ने अब तक हमले को लेकर अंतिम फैसला नहीं लिया है।

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लेखक के बारे में

Nisarg Dixit

निसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।

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