
पाकिस्तान में हिंदू कार्यकर्ता पर 'मौत का फतवा', टीएलपी ने दी जान से मारने की धमकी
पाकिस्तान के सिंध प्रांत में हिंदू अल्पसंख्यक अधिकार कार्यकर्ता शिवा कच्छी ने एक मार्मिक वीडियो अपील जारी की है। उन्होंने बताया कि नाबालिग हिंदू लड़कियों के जबरन अपहरण और धर्म परिवर्तन के खिलाफ आवाज उठाने के कारण उनकी जान को गंभीर खतरा है।
पाकिस्तान के सिंध प्रांत में हिंदू अल्पसंख्यक अधिकार कार्यकर्ता शिवा कच्छी ने एक मार्मिक वीडियो अपील जारी की है। उन्होंने बताया कि नाबालिग हिंदू लड़कियों के जबरन अपहरण और धर्म परिवर्तन के खिलाफ आवाज उठाने के कारण उनकी जान को गंभीर खतरा है। उन्होंने तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) के सरहिंदी गुट से जुड़े मौलवियों पर आरोप लगाया है कि उन्होंने उनके खिलाफ फतवा जारी कर हत्या की धमकी दी है। शिवा कच्छी ने कहा है कि संघीय सरकार, सिंध सरकार और पुलिस की ओर से पूरी तरह चुप्पी और निष्क्रियता बरती जा रही है, जिसे वे 'राज्य की विफलता और आपराधिक मिलीभगत' करार दे रहे हैं। बता दें कि शिवा कच्छी अल्पसंख्यक अधिकार संगठन 'दरवार इत्तेहाद' (Darawar Itehad) के अध्यक्ष और संस्थापक हैं।
सोशल मीडिया पर क्या कहा?
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र, अमेरिकी सरकार, ह्यूमन राइट्स वॉच, एमनेस्टी इंटरनेशनल और अन्य संगठनों को टैग करते हुए लिखा कि अगर उन्हें या उनके परिवार को कोई नुकसान पहुंचता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी पाकिस्तान सरकार की होगी। शिवा कच्छी ने कहा कि मेरा एकमात्र अपराध धार्मिक चरमपंथ, जबरन धर्मांतरण और अन्याय के खिलाफ बोलना है। अगर चरमपंथी खुलेआम धमकी दे सकते हैं और सरकार आंखें मूंद लेती है, तो पाकिस्तान में कोई भी सुरक्षित नहीं है।
सिंध प्रांत में हिंदू समुदाय की स्थिति
सिंध प्रांत में हिंदू समुदाय की सबसे अधिक आबादी रहती है, जहां पाकिस्तान की कुल हिंदू आबादी (लगभग 40-50 लाख) का करीब 94% हिस्सा है। 2023 की जनगणना के अनुसार, देश का एकमात्र हिंदू-बहुसंख्यक जिला उमरकोट है, जहां हिंदुओं की आबादी लगभग 52% है। कार्यकर्ता ने दावा किया है कि उन्होंने दर्जनों अपहृत हिंदू लड़कियों को, जो जबरन धर्म परिवर्तन के बाद मुस्लिम से शादी कराई गई थीं, उनके परिवारों से मिलवाया है। उन्होंने सरहिंदी गुट पर आरोप लगाया है कि वे उन्हें 'इस्लाम विरोधी और राज्य विरोधी' करार देकर हिंसा को उकसा रहे हैं।
मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, सिंध में हर साल सैकड़ों नाबालिग हिंदू और ईसाई लड़कियों के साथ ऐसा होता है, लेकिन अभियोजन बहुत कम होता है। टीएलपी पर अक्टूबर 2025 में प्रतिबंध लगा था, फिर भी उसके गुट सक्रिय हैं और अल्पसंख्यक कार्यकर्ताओं को निशाना बना रहे हैं। शिवा कच्छी ने पहले भी दिसंबर 2025 में इसी तरह की अपील की थी, जहां उन्होंने डॉ शाहनवाज कुम्भार की हत्या का जिक्र किया, जिन्हें ब्लासफेमी के झूठे आरोप में पुलिस हिरासत में मार दिया गया था। गौरतलब है कि नवंबर 2025 में एक नाबालिग हिंदू लड़की के अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और मुस्लिम से शादी का मामला भी सामने आया था।

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