पाक पीएम शहबाज को शिया धर्मगुरू की चेतावनी, कहा- ट्रंप के पीस बोर्ड से नहीं हटे तो...
ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत के बाद पाकिस्तानी शिया समाज के प्रमुख धर्मगुरू ने पीएम शहबाज शरीफ को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर पीएम, ट्रंप द्वारा बनाए उस पीस बोर्ड से नहीं हटे, तो इसके परिणाम गंभीर होंगे।
इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हमले के बाद दुनिया भर में शिया समुदाय ने अपना दुख जाहिर किया था। पाकिस्तान में भी कई लोगों ने अमेरिकी एम्बेसी पर हमला बोल दिया था, जिसके बाद हुई गोलीबारी में कई लोग मारे गए थे। अब यहां के प्रमुख शिया धर्मगुरू ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को ट्रंप के गाजा पीस बोर्ड से तुरंत हटने की चेतावनी दे दी है। उन्होंने कहा कि इस्लामाबाद को इसमें शामिल नहीं होना चाहिए, क्योंकि इसमें जायोनिस्ट (इजरायल समर्थकों) के हित शामिल हैं।
न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक गिलगित बाल्टिस्तान में एक सभा को संबोधित करते हुए प्रमुख शिया धर्मगुरू शेख नजफी ने कहा, "मैं इस सभा का इस्तेमाल राजनीति के लिए नहीं करूंगा, लेकिन एक बात जरूर कहूंगा, जो भी ‘अली-उन-वली-उल्लाह’ का कलमा पढ़ता है, मेरी बात देश के हर कोने तक पहुंचा दो, पूरे पाकिस्तान को सुनने दो।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी चेतावनी सरकार और उसकी सहयोगी पार्टियों के लिए है। उन्होंने कहा, “गिलगित-बाल्टिस्तान और पाकिस्तान के चुनाव से पहले अगर आप ट्रंप के उस पीस बोर्ड से बाहर नहीं निकले, जिसे यहूदियों और जायोनिज्म के नेतृत्व में बनाया गया है, तो पाकिस्तान की हर गली में खासकर गिलगित-बाल्टिस्तान में आपको अपमान और बदनामी का सामना करना पड़ेगा।” नजफी ने गिलगित-बाल्टिस्तान के लोगों से भी सीधे अपील करते हुए पूछा, “क्या आप अपने नेता के समर्थन और आज्ञा के लिए अपना खून देने को तैयार हैं?”
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने जल्दी से जल्दी पीस बोर्ड का मुद्दा हल नहीं किया तो सरकार को अपमान सहने के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने कहा, “हम शहीद (खामेनेई) और आने वाले नेता के साथ अपने वादे को दोहराते हुए प्रतिज्ञा करते हैं। मुस्लम लीग (नवाज) और उसकी समर्थक पार्टियां बदनाम होंगी। यही हमारा अंतिम संदेश है।” गौरतलब है कि शिया धर्मगुरू की तरफ से यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब गिलगित-बाल्टिस्तान में जल्दी ही चुनाव होने वाले हैं।
क्या है ट्रंप का गाजा पीस बोर्ड?
इजरायल और हमास के बीच तथाकथित शांति स्थापित करवाने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति ने संयुक्त राष्ट्र की अनुमति से गाजा पीस बोर्ड की स्थापना की थी। इसे एक अस्थायी व्यवस्था के रूप में शुरू किया गया है, जिसमें तमाम अंतर्राष्ट्रीय हस्तियां, क्षेत्रीय देश और फिलिस्तीनी क्षेत्र के लोग शामिल होंगे। ट्रंप का मानना है कि इस संस्था के जरिए गाजा का पुनर्निर्माण और प्रशासनिक कामकाज किया जाएगा। हालांकि, इस बोर्ड को लेकर वैश्विक राजनीति में असमंजस की स्थिति है। अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने आप को इस बोर्ड का स्थाई अध्यक्ष नियुक्त किया है। इसके अलावा इसमें शामिल होने वाले देश को स्थायी सदस्यता के लिए करीब 1 अरब डॉलर की भारी-भरकम कीमत भी चुकानी होगी। पाकिस्तान उन चुनिंदा देशों में से है, जिसने इस बोर्ड की सदस्यता लेने के लिए हामी भरी है।
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Upendra Thapakलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


