
देश को गृह युद्ध की आग में झोंकना चाहते हैं यूनुस, फांसी की सजा पर भड़क उठे शेख हसीना के करीबी
शेख हसीना को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद उनके सहयोगी लगातार आवाज उठा रहे हैं। इसी कड़ी में अवामी लीग के नेता और हसीना सरकार में मंत्री रहे मोहिबुल हसन चौधरी का भी बयान आया है। चौधरी ने कहा कि मोहम्मद यूनुस बांग्लादेश को गृहयुद्ध की आग में झोंकना चाहते हैं।
शेख हसीना को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद उनके सहयोगी लगातार आवाज उठा रहे हैं। इसी कड़ी में अवामी लीग के नेता और हसीना सरकार में मंत्री रहे मोहिबुल हसन चौधरी का भी बयान आया है। चौधरी ने कहा कि मोहम्मद यूनुस बांग्लादेश को गृहयुद्ध की आग में झोंकना चाहते हैं। गौरतलब है कि मोहिबुल हसन पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के बेहद करीबी रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह फैसला पहले से लिखा हुआ था और हसीना को अपना पक्ष रखने का पूरा मौका नहीं दिया गया।
सब-कुछ ड्रामा
इतना ही नहीं, मोहिबुल हसन चौधरी ने यह भी दावा किया बांग्लादेश में शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग को भरपूर समर्थन हासिल है। एनडीटीवी के साथ बातचीत में चौधरी ने कहा कि शेख हसीना केस में जो भी हुआ वह पूरी तरह से ड्रामा था। उन्हें पता था कि यह फैसला अमल में नहीं लाया जा सकता। यहां तक कि पिछले महीने से ही ट्रिब्यूनल के चेयरमैन कोर्ट में उपस्थित नहीं थे। उन्होंने यह भी कहा कि कोर्ट का संविधान तक अवैध है और अंतरिम सरकार के पास ट्रिब्यूनल के कानून में परिवर्तन का कोई अधिकार नहीं है।
स्टैंडर्ड प्रोसीजर का पालन नहीं
चौधरी ने यह भी दावा किया कि यूनुस सरकार ने हसीना के ट्रायल के दौरान स्टैंडर्ड प्रोसीजर का पालन नहीं किया। उन्होंने कहा कि यहां तक कि हमें अपना वकील तक रखने की अनुमति नहीं थी। इन लोगों ने इस भगोड़ा की श्रेणी में डाल दिया। ढाका में कुछ वकील शेख हसीना का केस लड़ना चाहते थे, लेकिन उन सभी को मना कर दिया गया। उन्हें कोर्ट जाने की अनुमति नहीं थी। ऐसे में ट्रायल के दौरान शेख हसीना का प्रतिनिधित्व तक नहीं हुआ।
यूनुस सरकार को चुनौती
यूनुस सरकार ने अवामी लीग पर प्रतिबंध लगा दिया है और उसे बांग्लादेश में चुनाव लड़ने से रोक दिया गया है। ऐसे में इस पार्टी का भविष्य क्या होगा? इसके जवाब में हसीना सरकार में मंत्री रहे चौधरी ने कहा कि उनकी पार्टी को अपने देश में भरपूर समर्थन हासिल है। उन्होंने कहा कि साल 1975 से अवामी लीग इन चीजों का सामना कर रही है। पूर्व में भी हमारे ऊपर प्रतिबंध लगाया गया था और हम धूल से उठकर खड़े हुए। इस बार भी हम ऐसा ही करेंगे। उन्होंने यूनुस सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि अगर इन्हें खुद के समर्थन को लेकर इतना ही भरोसाा है तो क्यों नहीं यह लोग हमें चुनाव में हिस्सा लेने की इजाजत देते हैं।

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