इस ज्वालामुखी द्वीप को कहते हैं सोने का कारखाना, एक खोज ने दुनिया में मचा दी हलचल
रिसर्च के अनुसार, प्रशांत महासागरीय प्लेट ऑस्ट्रेलियाई प्लेट के नीचे सबडक्शन प्रक्रिया से गुजर रही है। पानी से भरपूर तरल पदार्थ सबडक्टिंग प्लेट से निकलकर मेंटल में एंट्री करते हैं, जिससे मेंटल का पिघलने का तापमान कम हो जाता है।

वैज्ञानिकों ने पृथ्वी के सबसे बड़े सोने के भंडार बनाने वाले रहस्य को सुलझा लिया है। जर्मनी के GOMAR हेल्महोल्ट्ज सेंटर फॉर ओशन रिसर्च के डॉ. क्रिश्चियन टिम्म के नेतृत्व में एक टीम ने दक्षिण प्रशांत महासागर के गहरे इलाके में सोने की जमा होने की प्रक्रिया का पता लगाया। रिसर्च के अनुसार, ज्वालामुखी द्वीप चाप जैसे केरमाडेक द्वीप समूह को सोने का कारखाना कहा जा सकता है। यह शोध कम्युनिकेशंस अर्थ एंड एनवायरनमेंट जर्नल में प्रकाशित हुआ है। केरमाडेक द्वीप समूह न्यूजीलैंड के पास स्थित है।
यहां प्रशांत महासागरीय प्लेट ऑस्ट्रेलियाई प्लेट के नीचे सबडक्शन प्रक्रिया से गुजर रही है। पानी से भरपूर तरल पदार्थ सबडक्टिंग प्लेट से निकलकर मेंटल में एंट्री करते हैं, जिससे मेंटल का पिघलने का तापमान कम हो जाता है। बार-बार पिघलने के कई चक्रों के बाद चाल्कोफाइल तत्वों जैसे सोना और तांबा मैग्मा में केंद्रित हो जाते हैं। वैज्ञानिकों ने समुद्र तल से एकत्रित ज्वालामुखी ग्लास के 66 सैंपल्स का विश्लेषण किया। इन नमूनों में सामान्य मिड-ओशन रिज की तुलना में सोने की मात्रा अधिक पाई गई, जो दर्शाता है कि गहरे मेंटल में ही सोना केंद्रित होता है।
रिसर्च में क्या निकलकर आया सामने
ज्वालामुखी ग्लास समुद्री पानी से लावा के तेजी से ठंडा होने पर बनता है, जो मैग्मा की मूल संरचना को बनाए रखता है। रिसर्च में पाया गया कि हाइड्रस यानी पानी-समृद्ध परिस्थितियों में ही कई चरणों वाले पिघलने से सोना पकता जाता है। यह प्रक्रिया बताती है कि टेक्टोनिक प्लेटों के पानी के प्रभाव से मेंटल में सोने का आगमन होता है और फिर यह समुद्र तल तक पहुंचकर हाइड्रोथर्मल वेंट्स में जमा होता है।
इससे पहले वैज्ञानिक इस बात को नहीं समझ पाए थे कि कुछ क्षेत्रों में सोना इतना अधिक क्यों जमा होता है। यह खोज भविष्य में समुद्री खनिज संसाधनों की खोज के लिए नया ब्लूप्रिंट पेश करती है। अब भूवैज्ञानिक विशाल समुद्री सल्फाइड डिपॉजिट्स का पता लगाने में सक्षम होंगे, जहां सोना और अन्य कीमती धातुएं प्रचुर मात्रा में हो सकती हैं। इससे पृथ्वी पर नोबल मेटल्स के जीवन चक्र की समझ बढ़ेगी, गहरे मेंटल से लेकर समुद्री वेंट्स तक।
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Niteesh Kumarपत्रकार नीतीश कुमार 8 साल से अधिक समय से मीडिया इंडस्ट्री में एक्टिव हैं। जनसत्ता डिजिटल से बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर शुरुआत हुई। लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ने से पहले टीवी9 भारतवर्ष और दैनिक भास्कर डिजिटल में भी काम कर चुके हैं। पत्रकार नीतीश कुमार को खबरें लिखने के साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग का शौक है। लाइव हिन्दुस्तान यूट्यूब चैनल के लिए लोकसभा चुनाव 2024, दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 और बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की कवरेज कर चुके हैं। फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान के लिए नेशनल और इंटरनेशनल सेक्शन की खबरें लिखते हैं। पत्रकार नीतीश कुमार को ब्रेकिंग न्यूज लिखने के साथ खबरों का गहराई से विश्लेषण करना पसंद है। राजनीति से जुड़ी खबरों पर मजबूत पकड़ और समझ रखते हैं। समसामयिक राजनीतिक मुद्दों पर कई सारे लंबे लेख लिख चुके हैं। पत्रकार नीतीश कुमार ने पत्रकारिता का पढ़ाई IIMC, दिल्ली (2016-17 बैच) से हुई। इससे पहले दिल्ली यूनिवर्सिटी के महाराजा अग्रसेन कॉलेज से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन किया। पत्रकार नीतीश कुमार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के रहने वाले हैं। राजनीति, खेल के साथ सिनेमा में भी दिलचस्पी रखते हैं। फिल्में देखना और रिव्यू करना व उन पर चर्चा करना हॉबी है।
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