'मोजतबा खामेनेई ईरान में नहीं हैं', तो फिर कहां हैं? ताजा दावे को लेकर बढ़ी हलचल

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रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान में अमेरिका के साथ हुए 14 सूत्रीय समझौते के बाद सत्ता के भीतर संघर्ष और तेज हो गया है। कट्टरपंथी धड़े सरकार पर तख्तापलट करने का आरोप लगा रहे हैं। डील को देश के खिलाफ बताया जा रहा है। 

Saudi news outlet al-Hadath report Iranian Supreme Leader Mojtaba Khamenei is not in Iran news
Saudi news outlet al-Hadath report Iranian Supreme Leader Mojtaba Khamenei is not in Iran

ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई इस समय ईरान में नहीं हैं, सऊदी समाचार चैनल अल-हदथ ने एक इजरायली सुरक्षा सूत्र के हवाले से यह दावा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, उनके नाम से जारी होने वाले संदेश सीधे उनकी ओर से नहीं, बल्कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के नए प्रमुख अहमद वहीदी तैयार कर रहे हैं। हालांकि, इस दावे की ईरान की ओर से कोई पुष्टि नहीं की गई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि ईरान के भीतर गहरे राजनीतिक मतभेद पैदा हो गए हैं, जो IRGC की एकता और देश की सत्ता व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकते हैं।

इजरायली सूत्र ने दावा किया कि अमेरिका नहीं चाहता कि अगर ईरान हमला भी करे, तब भी इजरायल जवाबी कार्रवाई में सीधे शामिल हो। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान में अमेरिका के साथ हुए 14 सूत्रीय समझौते के बाद सत्ता के भीतर संघर्ष और तेज हो गया है। कट्टरपंथी धड़े सरकार पर तख्तापलट करने का आरोप लगा रहे हैं। उनका कहना है कि समझौता करके सरकार ने देश के हितों और मौजूदा सर्वोच्च नेता के निर्देशों की अनदेखी की है। इसे लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा है।

खामेनेई के अंतिम संस्कार के दौरान नाराजगी आई सामने

ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के दौरान भी यह नाराजगी खुलकर सामने आई। विदेश मंत्री अब्बास अराघची पर पथराव किया गया, जिन्होंने अमेरिका के साथ युद्धविराम वार्ता में अहम भूमिका निभाई थी। प्रदर्शनकारियों ने उन्हें डील करने वाला और देश से गद्दारी करने वाला बताते हुए नारे लगाए। रिपोर्ट में कहा गया कि मोजतबा खामेनेई लंबे समय से सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। ऐसे में संसद के पूर्व अध्यक्ष और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गालीबाफ, राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और विदेश मंत्री अब्बास अराघची युद्ध के बाद देश के प्रमुख फैसले लेते दिखाई दे रहे हैं।

मोजतबा खामेनेई की लगातार गैरमौजूदगी से परेशानी

अमेरिकी रिसर्चर अराश अजीजी के अनुसार, मोजतबा खामेनेई की लगातार गैरमौजूदगी के कारण यही नेता सरकार का संचालन कर रहे हैं, जिससे कट्टरपंथी गुट खुद को सत्ता से अलग-थलग महसूस कर रहा है। इसी वजह से वे गालीबाफ और पेजेशकियन पर सत्ता पर कब्जा करने की साजिश रचने का आरोप लगा रहे हैं। कट्टरपंथी सांसद महमूद नबावियान और कमरान गजनफारी जैसे नेताओं ने भी सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया कि सरकार सर्वोच्च नेता और संसद की भूमिका कम करके राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद को अधिक शक्तियां देना चाहती है। उन्होंने कहा कि यह एक सुनियोजित राजनीतिक बदलाव है।

Niteesh Kumar

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पत्रकार नीतीश कुमार 8 साल से अधिक समय से मीडिया इंडस्ट्री में एक्टिव हैं। जनसत्ता डिजिटल से बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर शुरुआत हुई। लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ने से पहले टीवी9 भारतवर्ष और दैनिक भास्कर डिजिटल में भी काम कर चुके हैं। पत्रकार नीतीश कुमार को खबरें लिखने के साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग का शौक है। लाइव हिन्दुस्तान यूट्यूब चैनल के लिए लोकसभा चुनाव 2024, दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 और बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की कवरेज कर चुके हैं। फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान के लिए नेशनल और इंटरनेशनल सेक्शन की खबरें लिखते हैं। पत्रकार नीतीश कुमार को ब्रेकिंग न्यूज लिखने के साथ खबरों का गहराई से विश्लेषण करना पसंद है। राजनीति से जुड़ी खबरों पर मजबूत पकड़ और समझ रखते हैं। समसामयिक राजनीतिक मुद्दों पर कई सारे लंबे लेख लिख चुके हैं। पत्रकार नीतीश कुमार ने पत्रकारिता का पढ़ाई IIMC, दिल्ली (2016-17 बैच) से हुई। इससे पहले दिल्ली यूनिवर्सिटी के महाराजा अग्रसेन कॉलेज से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन किया। पत्रकार नीतीश कुमार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के रहने वाले हैं। राजनीति, खेल के साथ सिनेमा में भी दिलचस्पी रखते हैं। फिल्में देखना और रिव्यू करना व उन पर चर्चा करना हॉबी है।

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