ईरान के होर्मुज स्ट्रेट कांड से थक गए खाड़ी देश, अब नए रास्ते पर निगाहें; तुर्कीए भी साथ
US iran war update: ईरान द्वारा होर्मुज पर प्रतिबंध लगाने के बाद खाड़ी देश अब वैकल्पिक रास्तों पर निवेश करने की तरफ देख रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और तुर्किए ने इसको लेकर योजनाएं बनाना शुरू कर दी हैं।
अमेरिका के साथ युद्ध शुरू होने के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर प्रतिबंध लगाकर रखा है। ईरान में इस्लामिक क्रांति के बाद होर्मुज खाड़ी देशों के लिए एक परेशानी का सबब बना हुआ है। इसी परेशानी को दूर करने के लिए खाड़ी देश अब वैकल्पिक रास्तों पर निवेश कर रहे हैं, जिससे कि आपात स्थिति में इन मार्गों का उपयोग करके होर्मुज और लाल सागर के ऊपर की निर्भरता को कम किया जा सके।
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, होर्मुज को साइडलाइन करने वाली इस योजना में मुख्य तौर पर सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और तुर्किए शामिल हैं। हालांकि, होर्मुज का विकल्प खोजना आसान नहीं है, लेकिन जैसे की भारत को मध्य-एशिया तक जाने के लिए सुरक्षा कारणों से पाकिस्तान को बायपास करके जाना पड़ता है, वैसा ही कुछ खाड़ी देश योजना बना रहे हैं। इसी क्रम में पाइपलाइन्स, रेलवे लाइन्स और समुद्री मार्गों पर काम करने की योजना है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के साथ अमेरिका के युद्ध के बाद से होर्मुज पर लगातार खतरा बना हुआ है। इससे न केवल इन देशों का व्यापार कम हुआ है, बल्कि खाने-पीने की चीजों के लिए आयात खर्च बढ़ा है। विश्लेषकों के मुताबिक, इसी परेशानी को दूर करने के लिए इन देशों ने कुछ मार्गों पर ध्यान लगाया है। इन प्रस्तावित जलमार्गों में सबसे प्रमुख फारस की खाड़ी के बाहर संयुक्त अरब अमीरात और ओमान के बंदरगाहों से माल की आवाजाही शामिल है, यहां से रेल के द्वारा सऊदी अरब होते हुए, जॉर्डन तक ले जाया जाएगा। इसके बाद मिस्त्र से स्वेज नहर के जरिए अंतर्राष्ट्रीय जलक्षेत्र में उतारा जाएगा। इतना ही नहीं इसमें सीरियाई बंदरगाहों का भी उपयोग किया जाएगा।
पहले से होर्मुज को बायपास करने की कोशिश में खाड़ी देश
होर्मुज को बायपास करने का प्रयास खाड़ी देश काफी पहले से करते हुए आ रहे हैं। लेकिन अत्यधिक गर्मी और होर्मुज के मुकाबले इन रास्तों का बेहद खर्चीला होना, इस योजना के लिए बड़ा रोड़ा है। लेकिन ईरान के साथ बढ़ते तनाव के कारण खाड़ी देश लगातार इस खर्चीली प्रणाली पर काम करते रहे हैं। अभी जो नए मार्ग ध्यान में आए हैं, उनमें से काफी पहले से ही संचालित करने की कोशिश होती रही है। उदाहरण के तौर पर संयुक्त अरब अमीरात के फुजैराह और खोर फक्कन पोर्ट्स को जोड़ने वाला रास्ता। इसके साथ ही इन देशों से लेकर जॉर्डन के लिए रेलवे लाइन बिछाने का काम शुरू हो चुका है।
खाड़ी देशों के नए प्रोजेक्ट
सऊदी अरब होर्मुज पर अपनी निर्भरता को कम कम करना चाहता है। इसी क्रम में पहले से ही उसकी दक्षिण वाली पाइप लाइन चालू है। इसके अलावा उसने अपने नियोम पोर्ट को सीधे स्वेज नहर और खाड़ी देशों, इराक से जोड़ने के लिए माल ढुलाई सेवा भी शुरू कर दी है। इसके अलावा सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, जॉर्डन और तुर्किे ने मिलकर जेद्दा से लेकर अम्मान और दमिश्क होते हुए इंस्तांबुल को जोड़ने वाली ऐतिहासिक हेजाज रेलवे लाइन को फिर से चालू करने की योजना की शुरुआत की है।
ईरान और होर्मुज संकट से उभरने और भविष्य के लिए इसके असर से बचने के लिए यह देश लगातार एक-दूसरे के साथ इन योजनाओं पर काम कर रहे हैं। इसी क्रम में आबू धाबी पोर्ट्स ने जॉर्डन और सीरिया में पोर्ट्स के संचालन में रियायतें हासिल की हैं। वहीं, जेद्दा में हाल ही में हुए जीसीसी शिखर सम्मेलन में भी खाड़ी देशों के नेताओं ने सऊदी अरब को संयुक्त अरब अमीरात, कतर, ओमान, कुवैत और बहरीन से जोड़ने वाले एक क्षेत्रीय रेलवे नेटवर्क को तेजी से विकसित करने पर सहमति व्यक्त की है। इससे इन देशों के बीच का आपसी व्यापार भी तेजी के साथ आगे बढ़ पाएगा।
इस मामले से जुड़े लोगों के आधार पर बताया गया कि खाड़ी देशों के नेता आने वाले किसी भी संकट से बचने के लिए लगातार इस पर निवेश कर रहे हैं। इसके अलावा यह निवेश वैश्विक ऊर्जा सप्लाई के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण हैं।
लेखक के बारे में
Upendra Thapakउपेंद्र ने डिजिटल पत्रकारिता की शुरुआत लाइव हिन्दुस्तान से की है। पिछले एक साल से वे होम टीम में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर कार्यरत हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024, ऑपरेशन सिंदूर और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की कवरेज की है। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली (बैच 2023-24) से पूरी करने वाले उपेंद्र को इतिहास, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, राजनीति, खेल, विज्ञान और समसामयिक घटनाओं से जुड़े विषयों में गहरी रुचि है। स्नातक स्तर पर बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने के कारण उन्हें मेडिकल और वैज्ञानिक विषयों की भाषा की भी अच्छी समझ है। वे मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के निवासी हैं।
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