दुनिया से छिपाकर सऊदी अरब ने ईरान में मचाई तबाही! घर में घुसकर की थी एयरस्ट्राइक

Amit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, रियाद
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सऊदी अरब ने ईरान पर गुप्त रूप से हवाई हमले किए हैं। यह पहली बार है जब सऊदी ने 'जैसे को तैसा' नीति अपनाते हुए सीधे ईरान को निशाना बनाया। जानिए इस सीक्रेट मिशन और मिडिल ईस्ट के बढ़ते तनाव की पूरी इनसाइड स्टोरी।

दुनिया से छिपाकर सऊदी अरब ने ईरान में मचाई तबाही! घर में घुसकर की थी एयरस्ट्राइक

सऊदी अरब की वायु सेना ने मार्च के अंत में ईरान पर कई अघोषित गुप्त हवाई हमले किए हैं। यह कार्रवाई ईरान युद्ध के दौरान सऊदी अरब पर हुए हमलों के जवाब में की गई थी। दो पश्चिमी और दो ईरानी अधिकारियों ने इस खबर की पुष्टि की है।

हमले का पूरा कारण समझिए

रॉयटर्स की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, यह पहली बार है जब सऊदी अरब ने सीधे तौर पर ईरान पर हमला किया है। यह इस बात का संकेत है कि सऊदी अपनी रक्षा के लिए अब अधिक आक्रामक और निडर रुख अपना रहा है। पश्चिमी अधिकारियों ने इसे "जैसे को तैसा" की तर्ज पर की गई जवाबी कार्रवाई बताया है। हालांकि, रॉयटर्स यह पुष्टि नहीं कर सका कि सऊदी अरब ने ईरान में किन विशिष्ट ठिकानों को निशाना बनाया। इस मुद्दे पर सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सीधे तौर पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया, जबकि ईरानी विदेश मंत्रालय ने कोई जवाब नहीं दिया।

कूटनीति और तनाव कम करने के प्रयास

खाड़ी और पश्चिम एशिया क्षेत्र में संघर्ष को और अधिक भड़कने से रोकने के लिए दोनों देशों ने कूटनीतिक रास्तों का इस्तेमाल किया। अधिकारियों के अनुसार, सऊदी ने ईरान को इन हमलों के बारे में पहले ही अवगत करा दिया था। इसके बाद गहन कूटनीतिक बातचीत हुई और सऊदी अरब ने आगे भी जवाबी कार्रवाई करने की चेतावनी दी।

इस कूटनीति का परिणाम यह हुआ कि दोनों देशों के बीच तनाव कम करने को लेकर एक अनौपचारिक सहमति बन गई। एक ईरानी अधिकारी ने पुष्टि की कि इस कदम का उद्देश्य "दुश्मनी को समाप्त करना, आपसी हितों की रक्षा करना और तनाव को बढ़ने से रोकना" था।

अमेरिका-ईरान युद्धविराम से पहले की घटना

दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की यह अनौपचारिक सहमति 7 अप्रैल को अमेरिका और ईरान के बीच हुए व्यापक युद्धविराम से ठीक एक सप्ताह पहले लागू हुई थी। सऊदी अरब द्वारा किए गए इन हमलों से पहले हफ्तों तक तनाव चरम पर था।

19 मार्च: रियाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने स्पष्ट किया कि यदि आवश्यक हुआ तो उनका देश "सैन्य कार्रवाई करने का अधिकार सुरक्षित रखता है।"

22 मार्च: तीन दिन बाद, सऊदी अरब ने ईरान के सैन्य अताशे और दूतावास के चार अन्य कर्मचारियों को 'अवांछित व्यक्ति' घोषित कर दिया।

25-31 मार्च का सप्ताह: इस दौरान सऊदी अरब पर 105 से अधिक ड्रोन और मिसाइल हमले हुए।

मार्च के अंत में: सऊदी वायु सेना ने ईरान पर जवाबी हवाई हमले किए।

1-6 अप्रैल: कूटनीतिक बातचीत के बाद सऊदी अरब पर होने वाले हमलों की संख्या 105 से घटकर मात्र 25 से कुछ अधिक रह गई। पश्चिमी सूत्रों के अनुसार, ये बचे हुए प्रोजेक्टाइल ईरान से नहीं, बल्कि इराक से दागे गए थे। इससे पता चलता है कि ईरान ने सीधे हमले रोक दिए थे, लेकिन उसके सहयोगी गुट अभी भी सक्रिय थे।

7 अप्रैल: अमेरिका और ईरान के बीच व्यापक युद्धविराम हुआ।

7-8 अप्रैल: युद्धविराम की शुरुआत में ही सऊदी अरब पर 31 ड्रोन और 16 मिसाइलें दागी गईं।

12 अप्रैल: सऊदी अरब ने इराकी धरती से हो रहे हमलों का विरोध दर्ज कराने के लिए इराक के राजदूत को तलब किया।

पाकिस्तान और यूएई (UAE) की भूमिका

अप्रैल की शुरुआत में हुए हमलों के कारण सऊदी अरब, ईरान और इराक दोनों पर जवाबी कार्रवाई करने पर विचार कर रहा था। इसी दौरान, रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान ने वहां अपने लड़ाकू विमान तैनात किए।

यूएई के गुप्त हमले

सऊदी अरब के हमलों का यह खुलासा 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' की उस रिपोर्ट के कुछ ही समय बाद हुआ है, जिसमें बताया गया था कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने भी ईरान पर गुप्त हमले किए हैं। यह दर्शाता है कि इस युद्ध में खाड़ी देशों की भूमिका काफी हद तक बढ़ गई है।

यह पूरी रिपोर्ट इस बात को दर्शाती है कि पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष उस स्तर तक फैल चुका है, जिसे पहले सार्वजनिक तौर पर स्वीकार नहीं किया गया था। हालांकि, सऊदी अरब और ईरान के बीच लगातार हो रहे कूटनीतिक संवाद ने फिलहाल एक बड़े युद्ध को टालने में मदद की है।

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डिजिटल पत्रकारिता की बदलती लहरों के बीच समाचारों की तह तक जाने की ललक अमित कुमार को इस क्षेत्र में खींच लाई। समकालीन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पैनी नजर रखने के साथ-साथ अमित को जटिल विषयों के गूढ़ विश्लेषण में गहरी रुचि है। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के रहने वाले अमित को मीडिया जगत में एक दशक का अनुभव है। वे पिछले 4 वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।


अमित न केवल समाचारों के त्वरित प्रकाशन में माहिर हैं, बल्कि वे खबरों के पीछे छिपे 'क्यों' और 'कैसे' को विस्तार से समझाने वाले एक्सप्लेनर लिखने में भी विशेष रुचि रखते हैं। डिजिटल पत्रकारिता के नए आयामों, जैसे कि कीवर्ड रिसर्च, ट्रेंड एनालिसिस और एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन को वे बखूबी समझते हैं। उनकी पत्रकारिता की नींव 'फैक्ट-चेकिंग' और सत्यापन पर टिकी है। एक मल्टीमीडिया पत्रकार के तौर पर अमित का सफर देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ रहा है। उन्होंने अमर उजाला, वन इंडिया, इंडिया टीवी और जी न्यूज जैसे बड़े मीडिया घरानों के साथ काम किया है।


अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।

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