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सऊदी अरब में गुलामी से मिली छुट्टी, कफाला सिस्टम से भारतीयों को भी उठाने पड़ते थे कौन से दुख

सऊदी अरब में गुलामी से मिली छुट्टी, कफाला सिस्टम से भारतीयों को भी उठाने पड़ते थे कौन से दुख

संक्षेप:

सऊदी अरब ने बड़ा कदम उठाते हुए कफाला सिस्टम को खत्म कर दिया है। इससे भारत समेत दुनियाभर के वर्कर्स को काफी राहत मिलेगी। यह एक ऐसी व्यवस्था थी, जो बाहर से आए कामगारों को गुलाम बनाकर रखती थी।

Oct 22, 2025 10:41 pm ISTMadan Tiwari लाइव हिन्दुस्तान, रियाद
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सऊदी अरब ने एक बड़ा रिफॉर्म किया है, जिसकी दुनियाभर में चर्चा हो रही है। उसने अपने 50 साल पुराने वर्कर स्पॉन्सरशिप प्रोग्राम जिसे कफाला सिस्टम कहा जाता था, उसे खत्म कर दिया है। इस फैसले की घोषणा सबसे पहले जून 2025 में की गई थी। इससे मिडिल ईस्ट के देश में रहने वाले करीब 1.34 करोड़ माइग्रेंट वर्कर्स के अधिकारों और जिंदगी पर असर पड़ेगा। इन लोगों में बड़ी संख्या में भारतीय भी शामिल हैं, जो लंबे समय से सऊदी अरब में रह रहे हैं।

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क्या है कफाला सिस्टम

इसे 1950 के दशक में लागू किया गया था, जिसका अरबी में मतलब स्पॉन्सरशिप सिस्टम होता है। यह मालिकों को अपने कर्मचारियों के कानूनी स्टेटस, रहने की जगह, वे देश कब छोड़ सकते हैं, कानूनी मदद ले सकते हैं या नौकरी कब बदल सकते हैं, इसपर पूरा कंट्रोल देता था। यह सिस्टम हर 'कफील' को माइग्रेंट वर्कर से जोड़ता था। हालांकि, इस सिस्टम के जरिए वहां जाने वाले लोग एक तरह से गुलाम बन जाते थे। उन्हें अपने हिसाब से काम करने की सहूलियत नहीं होती थी। उनके मालिक उनका शोषण करते थे, जिससे वे अमानवीय परिस्थितियों में रहने को मजबूर होते थे।

भारतीय वर्कर्स को भी उठाने पड़ते थे दुख

कफाला सिस्टम के तहत पीड़ितों में बड़ी संख्या में भारतीय भी थे। इसी तरह का एक मामला 2016-17 का है, जब कर्नाटक के उडुप्पी जिले की रहने वाली 42 साल की जैसिंथा मेंडोंका इस सिस्टम का शिकार बनी थीं। दरअसल, उन्हें मुंबई की एक एजेंसी ने ज्यादा सैलरी देने के लालच पर कतर के लिए रिक्रूट किया था। पहले उन्हें दुबई ले जाया गया और फिर वहां से सऊदी अरब भेज दिया गया। यहां पर 14 महीनों तक जैसिंथा ने कई तरह के दुख झेले थे। उन्होंने 14 महीने बाद किसी तरह वापस भारत आकर बताया था कि उसके मालिक की मां, उसकी तीन पत्नियों और बच्चों के हवेलियों में उसे दिन-रात काम करवाया गया। उसे जानवरों की तरह टॉर्चर किया जाता था। उसे काफी दुख झेलने पड़े। उसे यहां तक कि घर में टहलने के लिए भी नहीं अनुमति दी गई थी और बच्चे उसे ‘गुलाम’ बुलाते थे। इसके बाद एनजीओ की मदद से वह किसी तरह वापस भारत लौट सकी थी। वापस आने के बाद उन्होंने कसम खा ली कि दोबारा वह गल्फ कंट्रीज में नहीं जाएंगी। इसी तरह के शोषण के कई अन्य मामले भी भारतीयों के खिलाफ सामने आए थे।

MBS ने इसे खत्म करने का क्यों बनाया प्लान?

जून में सऊदी अरब ने क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान जिन्हें एमबीएस के नाम से भी जाना जाता है, उन्होंने विजन 2030 सुधारों के तहत इस प्रोग्राम को खत्म करने का प्लान बनाया था। दरअसल, यह एक मल्टी ट्रिलियन डॉलर का प्लान है, जिसके पीछे असल मकसद सऊदी अरब की इमेज को बेहतर करना है, जिससे ज्यादा से ज्यादा विदेशी इन्वेस्टमेंट को लाया जा सके, क्योंकि 2029 में एशियन गेम्स जैसे बड़े इवेंट्स भी होने वाले हैं।

इससे क्यों आती थी दिक्कत?

दशकों पहले शुरू हुए इस सिस्टम को कम सैलरी वाले माइग्रेंट लेबर के आने-जाने को कंट्रोल करने के लिए बनाया था, लेकिन बाद में इसे गुलामी जैसा माना जाने लगा। इसमें मालिकों द्वारा उनके कर्मचारियों का जमकर शोषण किया जाता। जब भी उनका मन होता, वे कर्मचारियों के आने-जाने पर रोक लगा देते। यहां तक कि पासपोर्ट जब्त कर लेते या फिर सैलरी देने में भी आनाकानी करते थे। वहीं, जो कर्मचारी वापस अपने मन से घर लौटना चाहता था, उसे भी इस कानून की वजह से कई बार दिक्कतों का सामना करना पड़ता था।

भारतीयों के लिए कैसे फायदेमंद है इसका खत्म होना

सऊदी अरब में अभी लगभग 1.34 करोड़ विदेशी वर्कर काम करते हैं। वे आबादी का लगभग 42 प्रतिशत हैं, सऊदी अरब कंस्ट्रक्शन के काम, खेती, घरेलू काम और दूसरे कामों के लिए माइग्रेंट्स पर निर्भर है। इसमें से ज्यादातर बांग्लादेश, भारत, नेपाल और फिलीपींस के रहने वाले हैं। इसे खत्म होने से और नया कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम लागू होने से जॉब मोबिलिटी आसान होगी, जिससे वर्कर्स कॉन्ट्रैक्ट पूरा होने पर बिना एम्प्लॉयर की पहले से मंजूरी के नई नौकरी में जा सकेंगे। यह वर्कर्स को एम्प्लॉयर को इलेक्ट्रॉनिकली बताकर नौकरी छोड़ने, वापस आने और परमानेंट ट्रैवल करने का अधिकार भी देगा।

Madan Tiwari

लेखक के बारे में

Madan Tiwari

लखनऊ के रहने वाले मदन को डिजिटल मीडिया में आठ साल से अधिक का अनुभव है। लाइव हिन्दुस्तान में यह दूसरी पारी है। राजनीतिक विषयों पर लिखने में अधिक रुचि है। नेशनल, इंटरनेशनल, स्पोर्ट्स, यूटीलिटी, एजुकेशन समेत विभिन्न बीट्स में काम किया है। लगभग सभी प्रमुख अखबारों के संपादकीय पृष्ठ पर 200 से अधिक आर्टिकल प्रकाशित हो चुके हैं। खाली समय में लॉन टेनिस खेलना पसंद है।

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