
डोनाल्ड ट्रंप के शांति वाले प्रस्ताव पर यूक्रेन ने चलवाई कैंची, कहां फंस रहा है पेंच?
ट्रंप ने नई योजना में यूक्रेन पर दबाव डाल रहे हैं कि यूक्रेन रूस को अपनी जमीन देने और सेना के आकार में भारी कटौती करने पर सहमत हो। साथ ही यूरोप यह भरोसा दे कि वह यूक्रेन को कभी नाटो सैन्य गठबंधन में शामिल नहीं करेगा।
Russia Ukraine War News: रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे जंग में शांति की कई कोशिशें करवाकर हताश हो चुके अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक नया शांति प्रस्ताव पेश किया है, जिसे लेकर घमासान जारी है। अमेरिका के इस पीस प्लान में सीधे-सीधे रूस का फायदा नजर आ रहा है और इसीलिए ट्रंप के दबाव के बाद भी इस पर यूक्रेन की सहमति मिलना मुश्किल है। इस बीच यह खबर सामने आई है कि यूक्रेन ने ट्रंप के इस प्लान पर कैंची चलवाई है और 28 सूत्री समझौते को छोटा कर 19 पॉइंट्स तक सीमित कर दिया गया है।

न्यूज 18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक यूक्रेन के एक अधिकारी ने सोमवार को कहा है कि लगभग चार साल से चल रहे रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए अमेरिका के प्रस्तावित प्लान में अब 28-पॉइंट वाले पीस प्लान के बजाय 19 पॉइंट हैं ताकि ड्राफ्ट प्रपोजल को यूक्रेन के हक में लाया जा सके। हालांकि अधिकारी ने यह नहीं बताया है कि कौन से अमेरिका के प्रस्ताव से कौन-कौन से पॉइंट हटाए गए हैं।
ट्रंप का प्रस्ताव
गौरतलब है कि अमेरिका ने पिछले हफ्ते यूक्रेन और यूरोपीय देशों के सामने एक नया शांति प्रस्ताव पेश किया था। जानकारी के मुताबिक इस प्रस्ताव को अमेरिका और रूस के अधिकारियों ने मिलकर तैयार किया था और इस फ्रेमवर्क पर सहमत होने के लिए पश्चिमी देशों को गुरुवार तक का समय दिया गया था।
कहां फंस रहा है पेंच?
इस प्रस्ताव में यूक्रेन से दोनबास का इलाका छोड़ने, अपनी सेना में कटौती करने और NATO में शामिल होने की अपनी इच्छाओं को छोड़ने के लिए कहा गया है। वहीं इसके तहत अमेरिका क्रीमिया को रूस के आधिकारिक हिस्से में भी मान्यता दे सकता है। हालांकि रूस की इस तरह की मांगों को यूक्रेन काफी समय से खारिज करता रहा है और युक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने कई मौकों पर कहा है कि इस तरह की मांगें यूक्रेन के लिए ‘लाल रेखा’ है।
जेलेंस्की ने कही बड़ी बात
इससे पहले जेलेंस्की ने सोमवार को कहा है कि उनका देश एक नाजुक स्थिति में है। उन्होंने जोर देकर कहा था कि यूक्रेन के लिए एक तरफ अपनी इज्जत खोने तो दूसरी तरफ अमेरिका को एक साथी के तौर पर खोने का रिस्क है। जेलेंस्की ने कहा, “असली शांति पाने के लिए हमें ज्यादा की जरूरत है। बेशक हम सभी पार्टनर्स, खासकर अमेरिका के साथ काम करना जारी रखेंगे और ऐसे समझौतों की तलाश करेंगे जो हमें मजबूत करें लेकिन कमजोर न करें।”

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