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US के भरोसे नहीं चलेगा, युद्ध के लिए कमाई के नए रास्ते पर यूक्रेन; जेलेंस्की ने बताया

US के भरोसे नहीं चलेगा, युद्ध के लिए कमाई के नए रास्ते पर यूक्रेन; जेलेंस्की ने बताया

संक्षेप:

जेलेंस्की ने कहा यह फैसला उन हथियारों के निर्यात और सह उत्पादन के बारे में है, जिन्हें हम खुद बना और बेच सकते हैं। अगर हम इन्हें बेचने में सफल होते हैं, तो हमारे पास उत्पादन बढ़ाने के लिए ज्यादा पैसे होंगे और इससे हम दूसरे हथियार भी खरीद सकते हैं।

Tue, 4 Nov 2025 05:47 AMUpendra Thapak लाइव हिन्दुस्तान
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रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध और लंबा खिंचता हुआ नजर आ रहा है। इसी बीच अब यूक्रेन भी इस युद्ध में अपने पैर मजबूत करने के लिए दूसरे देशों से मिलने वाली मदद के बजाय खुद से कमाई करने के रास्ते खोज रहा है। पिछले तीन सालों में अपने देश में रक्षा उद्योग को बड़े स्तर पर तैयार कर चुका यूक्रेन अब यहां से निर्यात की संभावना तलाश रहा है, जिससे यह उद्योग उसकी सैन्य शक्ति के साथ-साथ आर्थिक शक्ति को भी बढ़ा सकें।

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राष्ट्रपति जेलेंस्की ने सोमवार को ऐलान किया कि बर्लिन और कोपेनहेगन में यूक्रेन अपने कार्यालय खोलेगा। इसके तहत हथियारों के निर्यात और उन देशों में इनके संयुक्त निर्माण पर चर्चा होगी। यूक्रेनी सरकार के मुताबिक इस कदम का उद्देश्य यूक्रेन को एक सहायता प्राप्त करने वाले देश से हाईटेक हथियारों का निर्यात करने वाले देश के रूप में बदलना है।

रूस के साथ युद्ध में उलझे यूक्रेन को यूरोप और अमेरिका ने काफी हद तक मदद दी है। हालांकि, युद्ध के इस समय में यूक्रेन ने खुद भी हथियारों के घरेलू उत्पादन में बढ़त हासिल की है। विशेष रूप से ड्रोन और मिसाइलों को बनाने में यूक्रेन ने महारत हासिल कर ली है।

हथियार बेचेगा यूक्रेन

ऐसे में कीव में पत्रकारों से बात कर रहे जेलेंस्की ने अपनी आगे की रणनीति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “हमारा यह फैसला उन हथियारों के निर्यात और सह उत्पादन के बारे में है, जिन्हें हम खुद बना और बेच सकते हैं। अगर हम इन्हें बेचने में सफल होते हैं, तो हमारे पास उत्पादन बढ़ाने के लिए ज्यादा पैसे होंगे और इससे हम दूसरे हथियार भी खरीद सकते हैं।” जेंलेंस्की ने कहा कि हमारा उद्देश्य बाहरी आपूर्तिकर्ताओं पर से अपनी निर्भरता को कम करना है।

विशेषज्ञों के मुताबिक यूक्रेन का एक हथियार निर्यातक के रूप में स्थापित होने का प्रयास करना यूरोप और यूक्रेन दोनों के लिए फायदेमंद है। क्योंकि इस साझेदारी के बढ़ने पर यूरोप को रूसी हथियारों से डिफेंस की टेक्नोलॉजी हासिल करने में मदद मिलेगी। इन साझेदारियों को यूक्रेन के लिए आर्थक जड़ी-बूटी की तरह महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अगर यह हो जाता है, तो यूक्रेन के पास आय का एक महत्वपूर्ण जरिया तैयार हो सकता है।

जेलेंस्की चाहें कितने ही प्रयास क्यों न कर लें, लेकिन आज के समय की सच्चाई यही है कि उन्हें कदम-कदम पर अमेरिका की जरूरत रही है। ऐसे में हथियार बेचने का सपना देख रहे जेलेंस्की ने इस बात का खुलासा किया कि अगले हफ्ते यूक्रेनी प्रतिनिधिमंडल वाशिंगटन का दौरा करेगा। यहां पर यूक्रेन-अमेरिका ड्रोन संबंधीं सौदे पर आगे की बातचीत की जाएगी। कीव को उम्मीद है कि यह समझौता ट्रम्प प्रशासन के साथ संबंधों को और गहरा करेगा और यूक्रेन के बढ़ते ड्रोन क्षेत्र में हाईटेक मैन्यूफैक्चरिंग क्षमताएँ लाएगा।

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक, रूस से जारी युद्ध ने यूक्रेन को मानव रहित ड्रोन्स, एयर डिफेंस का एक मजबूत खिलाड़ी बना दिया है। ऐसा खिलाड़ी जो इनके नए रास्ते देने वाला बन गया है। यूक्रेन इस समय पर रूस पर सटीक हमलों के लिए अपने इन्हीं ड्रोन्स का इस्तेमाल कर रहा है। अगर अमेरिका के साथ ड्रोन्स से जुड़ा सौदा हो जाता है, तो यूक्रेनी मशीनों को अमेरिकी टेक्नोलॉजी मिल सकती है, जिससे यह और भी ज्यादा शक्ति शाली हो जाएंगे।

हालांकि, यूक्रेन के लिए हथियारों का एक्सपोस्ट करना या किसी और देश में जाकर बनाना आसान नहीं है। क्योंकि युद्ध की जरूरत के अलावा रक्षा उद्योग पर ज्यादा दबाव डालना हानिकारक हो सकता है। फिर भी जेलेंस्की का यह निर्णय यूक्रेन के लिए एक नए बदलाव का संकेत है। युद्ध के मैदान में टिके रहने का हौसला देने वाले यह हथियार अब आर्थिक मैदान पर भी यूक्रेन की सहायता देंगे।

Upendra Thapak

लेखक के बारे में

Upendra Thapak
उपेन्द्र पिछले कुछ समय से लाइव हिन्दुस्तान के साथ बतौर ट्रेनी कंटेंट प्रोड्यूसर जुड़े हुए हैं। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली (2023-24 बैच) से पूरी की है। इससे पहले भोपाल के बरकतउल्ला विश्वविद्यालय से अपना ग्रैजुएशन पूरा किया। मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के रहने वाले हैं। अंतर्राष्ट्रीय संबंधों, राजनीति के साथ-साथ खेलों में भी दिलचस्पी रखते हैं। और पढ़ें

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