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पुतिन की यात्रा समाप्त, अब जेलेंस्की की बारी? जल्द भारत आ सकते हैं यूक्रेनी राष्ट्रपति

पुतिन की यात्रा समाप्त, अब जेलेंस्की की बारी? जल्द भारत आ सकते हैं यूक्रेनी राष्ट्रपति

संक्षेप:

रूस के राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा के बाद अब यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की की भारत यात्रा की चर्चा तेज है। रिपोर्ट्स के मुताबिक भारतीय और यूक्रेनी अधिकारी इस मामले को लेकर लगातार चर्चा कर रहे हैं। सब कुछ सामान्य रहा तो जेलेंस्की जनवरी में भारत यात्रा पर आ सकते हैं।

Dec 08, 2025 08:17 am ISTUpendra Thapak लाइव हिन्दुस्तान
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रूस और यूक्रेन युद्ध के बीच भारत उन गिने चुने देशों में शामिल है, जिसने दोनों ही पक्षों के बीच में एक संतुलन बनाकर रखा है। इसकी बानगी यह है कि पीएम मोदी युद्ध के बीच यूक्रेन और रूस दोनों जगहों का दौरा कर चुके हैं। रूसी राष्ट्रपति पुतिन के दो दिवसीय भारत दौरे की समाप्ति के बाद अब ऐसी खबर सामने आ रही है कि यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की भी जनवरी 2026 में भारत आ सकते हैं।

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द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय और यूक्रेनी अधिकारी पिछले कई हफ्तों से इस मुद्दे को लेकर बातचीत कर रहे हैं। भारत ने पुतिन की भारत यात्रा के पहले ही यूक्रेन से इस मामले में संपर्क किया था। पुतिन की यात्रा के एक महीने बाद जेलेंस्की की यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि भारत हमेशा से ही दोनों पक्षों के बीच में संतुलन बनाकर चल रहा है। भारत ही वह देश है, जिस पर दोनों पक्ष शुरआत से ही भरोसा करके चल रहे हैं। रूसी राष्ट्रपति पुतिन और यूक्रेनी राष्ट्रपति दोनों ही कह चुके हैं कि इस युद्ध को खत्म करवाने में भारत अपनी भूमिका निभा सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक जेलेंस्की की भारत यात्रा की आधिकारिक घोषणा कई कारकों पर निर्भर करेगी। इसमें अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शांति योजना किस मुकाम पर पहुंचती है और इसके अलावा युद्धक्षेत्र में क्या स्थिति बनती है। इसके अलावा घरेलू राजनीति के स्तर पर भी परेशानी का सामना कर रहे जेलेंस्की के लिए निकल पाना आसान नहीं होगा।

गौरतलब है कि राजनीतिक संबंध स्थापित होने के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति तीन बार 1992, 2002 और 2012 में भारत आ चुके हैं। वहीं, भारत की तरफ से पिछले वर्ष यूक्रेन की यात्रा करने वाले पीएम मोदी पहले थे।

रूस-यूक्रेन संकट पर भारत का रुख

लगभग 4 साल से जारी इस युद्ध को लेकर भारत का रुख हमेशा से संतुलन वाला ही रहा है। भारत ने किसी पक्ष का खुलकर समर्थन किए बिना शांति, संवाद और संप्रभुता का सम्मान करने की बात कही है। अपने पुराने बयान का दोहराते हुए पीएम मोदी ने पिछले सप्ताह भी राष्ट्रपति पुतिन के सामने कहा कि भारत इस युद्ध में तटस्थ नहीं है बल्कि शांति के पक्ष में खड़ा हुआ है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी दोहराया कि हिंसा को रोकना आवश्यक है और कूटनीति ही आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता है, इसके अलावा भारत शांति बहाली के लिए योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है।

Upendra Thapak

लेखक के बारे में

Upendra Thapak
उपेन्द्र पिछले कुछ समय से लाइव हिन्दुस्तान के साथ बतौर ट्रेनी कंटेंट प्रोड्यूसर जुड़े हुए हैं। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली (2023-24 बैच) से पूरी की है। इससे पहले भोपाल के बरकतउल्ला विश्वविद्यालय से अपना ग्रैजुएशन पूरा किया। मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के रहने वाले हैं। अंतर्राष्ट्रीय संबंधों, राजनीति के साथ-साथ खेलों में भी दिलचस्पी रखते हैं। और पढ़ें

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