घायल सैनिकों को नहीं बचा पा रहा यूक्रेन, खाने-पीने की भी कमी; यूक्रेनी सैनिक का दावा

Jan 20, 2026 03:13 pm ISTJagriti Kumari वार्ता, मॉस्को
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रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग में समझौता होने की संभावना एक बार फिर टलती नजर आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ध्यान फिलहाल ईरान, ग्रीनलैंड समेत अन्य देशों पर है, जिसके बाद बातचीत ठंडे बस्ते में है।

घायल सैनिकों को नहीं बचा पा रहा यूक्रेन, खाने-पीने की भी कमी; यूक्रेनी सैनिक का दावा

Russia Ukraine War: रूस और यूक्रेन के बीच 4 सालों से जारी जंग के बीच एक यूक्रेनी सेना ने दावा किया है कि यूक्रेन अपने घायल सैनिकों को भी नहीं बचा पा रहा है और कई सैनिक बिना इलाज के मर रहे हैं। यह दावा रूस के कब्जे में मौजूद यूक्रेन के युद्धबंदी एलेक्जेंडर सोतनिवोक ने किया है। सोतनिवोक ने रूसी रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी एक वीडियो में यह दावा किया है

सोतनिवोक ने सोमवार को एक बयान जारी करते हुए कहा, "घायलों को लड़ाई वाले क्षेत्रों से निकालने में एक बड़ी समस्या आ रही है। अगर कोई सैनिक घायलों को ले जाने वाले ट्रक तक नहीं पहुंच पा रहा, तो उसका मरना तय है। यूक्रेनी सेना घायलों को तभी निकाल रही है, जब वह एक खास जगह पहुंच रहे हैं।"

उन्होंने कहा कि दिमित्रोव की ओर पांच-दिन की यात्रा के दौरान उन्होंने कई मृतकों को देखा। एक सैनिक एक पेड़ से लगकर बैठा था। सोतनिवोक और उनके साथी सैनिक को लगा कि वह जिन्दा है, लेकिन वह मर चुका था। उन्होंने कहा कि वह शख्स युद्ध में घायल होने के बाद निकासी बिंदु तक पहुंचने की कोशिश कर रहा था, लेकिन रास्ते में ही मर गया।

सोतनिकोव ने आगे कहा कि उनका चार सैनिकों का समूह दिमित्रोव में युद्धक्षेत्र में पहुंचा, तो उनके ऊपर मोर्टार से हमला हो गया। इस हमले में दो सैनिक घायल हो गये। बचे हुए दोनों सैनिक जैसे-तैसे कुछ दूर चलकर एक घर में घुसे, जहां पहले से रूसी सैनिक मौजूद थे। उन्होंने वहां हथियार डालने का फैसला किया। उन्होंने बताया कि यूक्रेनी सेना के पास खाने-पीने की चीजों की भी कमी है। कभी-कभी ड्रोन खाने का सामान युद्धक्षेत्र में पहुंचाते हैं, लेकिन उनमें भी नाश्ते की ही चीजें होती हैं।

सोतनिकोव ने कहा कि उनके पास कोई सैन्य अनुभव नहीं था, लेकिन यूक्रेन ने उन्हें जबरदस्ती सीमा पर भेज दिया। उन्होंने अफवाहें सुनी थीं कि भर्ती कार्यालय के स्टाफ 15-16 हज़ार डॉलर लेकर लोगों को रिहा कर रहे थे, लेकिन इसकी कोई गारंटी नहीं थी। उन्होंने कहा, " आप एक दरवाजे से निकलते हैं और फौरन ही दूसरे लोग आपको पकड़कर दूसरी दिशा में भेजने के लिए सेना में भर्ती करने आ जाते हैं। "

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Jagriti Kumari

जागृति को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 2 साल पहले लाइव हिन्दुस्तान के साथ करियर की शुरुआत हुई। उससे पहले डिग्री-डिप्लोमा सब जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में। भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और संत जेवियर्स कॉलेज रांची से स्नातक के बाद से खबरें लिखने का सिलसिला जारी। खबरों को इस तरह से बताना जैसे कोई बेहद दिलचस्प किस्सा, जागृति की खासियत है। अंतर्राष्ट्रीय संबंध और अर्थव्यवस्था की खबरों में गहरी रुचि। लाइव हिन्दुस्तान में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शानदार कवरेज के लिए इंस्टा अवॉर्ड जीता और अब बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर रोजाना कुछ नया सीखने की ललक के साथ आगे बढ़ रही हैं। इसके अलावा सिनेमा को समझने की जिज्ञासा है।

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