
गिरा दो एटम बम; टैंकर जब्त होने से भड़के पुतिन के 'खास', अमेरिका को दी खुली धमकी
रूसी सांसद ने कहा कि यह वास्तव में रूसी क्षेत्र पर हमले के समान है, क्योंकि टैंकर पर हमारा राष्ट्रीय झंडा लगा हुआ था। एलेक्सी जुरावलेव ने आगे कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं कि हमें मजबूत और त्वरित जवाब देना चाहिए, हमारी सैन्य नीति ऐसे हमले के जवाब में परमाणु हथियारों के उपयोग की भी अनुमति देती है।
रूसी झंडे वाले तेल टैंकर की अमेरिकी सेना द्वारा जब्ती के बाद मॉस्को में भारी गुस्सा है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के करीबी माने जाने वाले रूसी स्टेट ड्यूमा के डिफेंस कमिटी के फर्स्ट डिप्टी चेयरमैन और सांसद एलेक्सी जुरावलेव ने इसे 'समुद्री डकैती' और 'रूसी क्षेत्र पर हमला' करार देते हुए कड़ा सैन्य जवाब देने की मांग की है। उन्होंने टॉरपीडो से अमेरिकी जहाजों पर हमला करने या कुछ जहाज डुबोने का सुझाव दिया और रूसी सैन्य नीति का हवाला देते हुए एटम बम गिराने की बात कही। रूसी सांसद ने कहा कि यह वास्तव में रूसी क्षेत्र पर हमले के समान है, क्योंकि टैंकर पर हमारा राष्ट्रीय झंडा लगा हुआ था। एलेक्सी जुरावलेव ने आगे कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं कि हमें मजबूत और त्वरित जवाब देना चाहिए, हमारी सैन्य नीति ऐसे हमले के जवाब में परमाणु हथियारों के उपयोग की भी अनुमति देती है।
टेलीग्राम पर अपने बयान में जुरावलेव ने कहा कि मॉस्को को सैन्य जवाब देना चाहिए। इस दौरान उन्होंने रूस से टॉरपीडो से हमला करके ऑपरेशन में शामिल कुछ अमेरिकी तटरक्षक जहाजों को डुबो देने की वकालत की। उनका तर्क था कि यही अमेरिका को रोकने का एकमात्र तरीका है, जिस पर उन्होंने वेनेजुएला में हालिया अभियानों के बाद मनमानी करने का आरोप लगाया। उन्होंने रूस की सैन्य नीति का हवाला देते हुए दावा किया कि इसमें राष्ट्रीय हितों पर हमलों के जवाब में परमाणु हथियारों के उपयोग की व्यवस्था है।
दरअसल, बुधवार को अमेरिकी सेना ने उत्तर अटलांटिक महासागर में रूसी झंडे वाले तेल टैंकर को जब्त कर लिया, जिसका पीछा अमेरिकी तटरक्षक जहाज ने हफ्तों तक किया था। यह टैंकर वेनेजुएला के प्रतिबंधित तेल व्यापार से जुड़ा था और अमेरिकी नाकाबंदी से दो सप्ताह से अधिक समय तक बचता रहा। इस घटना के बाद मॉस्को ने कड़ी निंदा की और कहा कि किसी देश को खुले समुद्र में दूसरे देश के झंडे वाले कानूनी जहाज पर बल प्रयोग का अधिकार नहीं है।
रूस के परिवहन मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि टैंकर बेला-1 को 24 दिसंबर 2025 को रूसी झंडे के तहत अस्थायी अनुमति मिली थी। बयान में कहा गया कि अमेरिकी नौसेना ने अपने क्षेत्रीय जल से बाहर जहाज पर कब्जा कर लिया, जिसके बाद जहाज से संपर्क टूट गया। मंत्रालय ने आगे कहा कि 1982 के संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन के अनुसार, खुले समुद्र में नौवहन की स्वतंत्रता लागू होती है और किसी राज्य को दूसरे राज्य के पंजीकृत जहाजों पर बल प्रयोग का अधिकार नहीं है।

लेखक के बारे में
Devendra Kasyapदेवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।
देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।
मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।
और पढ़ें
लेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




