खतरनाक मिसाइलें बनाने में ईरान की मदद कर रहा रूस, अमेरिका के खिलाफ हो सकती हैं इस्तेमाल

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ऐसी मिसाइलों का इस्तेमाल ईरान अमेरिका के साथ चल रहे जंग में कर सकता है। युद्धपोतों को टारगेट करने के लिए ईरान ये मिसाइलें दाग सकता है। एक्सपर्ट्स ने बताया कि यह टेक्नोलॉजी लगभग पक्का एंटी-शिप और लैंड-अटैक क्रूज मिसाइलों के लिए थी।

Russia is helping Iran build missiles that could be used against the US
मिसाइलों का इस्तेमाल ईरान अमेरिका के साथ चल रहे जंग में कर सकता है

ईरान से युद्ध लड़ रहे अमेरिका को रूस बड़ा झटका दे रहा है। दरअसल, रूस 2023 से ईरान को सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें बनाने में मदद कर रहा है। ये ऐसी मिसाइलें हैं, जोकि अमेरिकी युद्धपोतों को निशाना बना सकती हैं। मालूम हो कि अमेरिका और रूस के बीच कई सालों से तनाव बना है। रूस और यूक्रेन युद्ध की वजह से अमेरिका समेत पश्चिमी देशों ने रूस पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए हैं। उधर, ईरान और अमेरिका के बीच जंग चल रही है।

फाइनेंशियिल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, सालों से चल रहे इस सीक्रेट प्रोग्राम का कोडनेम C430L है। यह अमेरिका और इजरायल के ईरान के खिलाफ जंग शुरू करने के बाद भी जारी रहा है। रूस ने लंबे समय से वेस्ट एशिया में ईरान का साथ दिया है और दोनों देश चीन और नॉर्थ कोरिया के साथ एंटी-वेस्ट 'क्रिंक' ब्लॉक का हिस्सा हैं। सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल आवाज की स्पीड से भी ज्यादा स्पीड से उड़ती है। यह अक्सर जमीन या समुद्र की सतह के पास कम ऊंचाई पर उड़ती है। इसकी तेज गति होने की वजह से यह रडार की पकड़ में भी मुश्किल से ही आ पाती है, जोकि इसे और खतरनाक बना देता है।

अमेरिका के युद्धपोतों पर इस्तेमाल कर सकता है मिसाइल

रिपोर्ट में बताया गया है कि ऐसी मिसाइलों का इस्तेमाल ईरान अमेरिका के साथ चल रहे जंग में कर सकता है। युद्धपोतों को टारगेट करने के लिए ईरान ये मिसाइलें दाग सकता है। एक्सपर्ट्स ने बताया कि यह टेक्नोलॉजी लगभग पक्का एंटी-शिप और लैंड-अटैक क्रूज मिसाइलों के लिए थी। रूस ईरान को रैमजेट प्रोपल्शन सिस्टम बनाने में मदद कर रहा है। इस प्रोजेक्ट में रूस का मुख्य रोल ईरान को रैमजेट प्रोपल्शन सिस्टम बनाने में मदद करना है।

इसके लिए रूस में ऊपर से क्लीयरेंस की जरूरत

ईरानी मिसाइलों के एक्सपर्ट और ब्रिटेन में मौजूद हथियारों का पता लगाने वाली संस्था कॉन्फ्लिक्ट आर्मामेंट रिसर्च के सीनियर एनालिस्ट फैबियन हिंज ने 'द फाइनेंशियल टाइम्स' को बताया, "यह रूस से एक बहुत ही स्ट्रेटेजिक रूप से सेंसिटिव मिलिट्री टेक्नोलॉजी का ट्रांसफर है, जिसे ईरानी दशकों से हासिल करना चाहते थे। इस तरह के प्रोग्राम के लिए रूस में सबसे ऊपर से पॉलिटिकल क्लीयरेंस की जरूरत होगी।"

Madan Tiwari

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Madan Tiwari

लखनऊ के रहने वाले मदन तिवारी वरिष्ठ पत्रकार हैं और मीडिया में एक दशक से ज्यादा का अनुभव है।
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वर्तमान में मदन हिन्दुस्तान अखबार की न्यूज वेबसाइट लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स डिजिटल) में डिप्टी न्यूज एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से पत्रकारिता की पढ़ाई की। कक्षा 12वीं के बाद से ही दैनिक जागरण, अमर उजाला, जनसत्ता समेत तमाम अखबारों में संपादकीय पृष्ठ पर लिखना शुरू किया। महज दो सालों में विभिन्न राष्ट्रीय और क्षेत्रियों अखबारों में दो सौ से अधिक आलेख प्रकाशित हुए। ग्रेजुएशन करते समय ही मीडिया में नौकरी की शुरुआत की। लाइव हिन्दुस्तान में अभी दूसरी पारी है और दोनों पारियों को मिलाकर यहां आठ साल से ज्यादा हो चुके हैं। कुल एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। मदन आजतक जैसे अन्य संस्थानों में भी काम कर चुके हैं।

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