होर्मुज का नाम बदलकर ट्रंप स्ट्रेट कर दें...; ईरान युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति का नया दांव

लाइव हिन्दुस्तान, वाशिंगटन
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को होर्मुज स्ट्रेट का नाम बदलकर 'ट्रंप स्ट्रेट' रखने का सुझाव दिया। ईरान युद्ध के बीच ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए उन्होंने दावा किया कि यह रणनीतिक जलमार्ग अब अमेरिका के नियंत्रण में है, इसलिए इसका नाम भी बदला जाना चाहिए।

Donald Trump
होर्मुज का नाम बदलने की तैयारी?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का नाम बदलने का सुझाव दिया। ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए उन्होंने लिखा कि अब जबकि यह अमेरिका के नियंत्रण में है, तो क्या हमें होर्मुज स्ट्रेट का नाम बदलकर ट्रंप स्ट्रेट कर देना चाहिए??? आगे उन्होंने लिखा कि अमेरिका की तरह यह भी पहले से कहीं ज्यादा 'हॉट' होगा! यह सुझाव ईरान के साथ चल रहे युद्ध के बीच आया है। फरवरी 2026 से जारी इस संघर्ष में ट्रंप बार-बार दावा कर रहे हैं कि अमेरिका के पास होर्मुज पर लगभग पूर्ण नियंत्रण है।

वहीं, वाइट हाउस के अनुसार अमेरिकी नौसेना ने जलमार्ग से ईरानी माइन साफ कर दिए हैं और सैकड़ों व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित गुजरने में मदद की है। हालांकि ईरान इन दावों से इनकार करता है और कहता है कि जलमार्ग अभी भी उसके प्रभाव में है। बता दें कि युद्ध शुरू होने के बाद होर्मुज से तेल और गैस की आवाजाही काफी कम हो गई है। युद्ध से पहले दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का करीब 20 से 25 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता था।

बता दें कि ट्रंप का यह बयान उनके पुराने बयानों से भी मेल खाता है। वे भौगोलिक स्थानों के नाम बदलकर अमेरिकी प्रभुत्व जताने की कोशिश करते रहे हैं। कई मौकों पर ये सुझाव पहले मजाक की तरह लगते थे, लेकिन बाद में कार्यकारी आदेश के जरिए आधिकारिक बन गए।

लेक ओंटारियो से ‘लेक अमेरिका’ तक

कनाडा के साथ व्यापार युद्ध और टैरिफ विवाद के बीच 27 अगस्त 2026 को ट्रंप ने कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर लेक ओंटारियो का नाम अमेरिकी सरकारी रिकॉर्ड में 'लेक अमेरिका' कर दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका को अब ओंटारियो प्रांत के साथ ज्यादा कारोबार की उम्मीद नहीं है। आदेश के तहत आंतरिक विभाग और भौगोलिक नाम बोर्ड को 30 दिनों के अंदर सरकारी नक्शों, दस्तावेजों और डेटाबेस में नया नाम दर्ज करना है।

हालांकि कनाडा ने इस बदलाव को खारिज कर दिया। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा कि झील का नाम वेंडाट आदिवासी भाषा से आया है और यह कनाडा के संघ तथा अमेरिका की स्वतंत्रता घोषणा से भी पुराना है। ट्रंप ने ओवल ऑफिस में नक्शा दिखाते हुए कहा था कि अब अमेरिका के पास एक खाड़ी और एक झील है, इसलिए शायद अटलांटिक या प्रशांत महासागर का नाम भी बदलना पड़े।

गल्फ ऑफ मेक्सिको बना 'गल्फ ऑफ अमेरिका'

जनवरी 2025 में दूसरे कार्यकाल की पहली ही दिन ट्रंप ने कार्यकारी आदेश जारी कर मैक्सिको की खाड़ी को संघीय एजेंसियों के लिए 'अमेरिका की खाड़ी' कहने का निर्देश दिया। अमेरिकी सरकारी नक्शों और दस्तावेजों में यह नाम दिखने लगा। गूगल मैप्स ने अमेरिकी यूजर्स के लिए नया नाम दिखाया, जबकि मैक्सिको में पुराना नाम ही बना रहा। मैक्सिको ने इस कदम को सिरे से खारिज कर दिया। तत्कालीन राष्ट्रपति क्लाउडिया शाइनबाम ने कहा कि अमेरिका अपने महाद्वीपीय शेल्फ वाले हिस्से को जो चाहे कह सकता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय जल निकाय मैक्सिको की खाड़ी ही रहेगा।

क्या नाम सच में बदला जा सकता है?

अब सवाल उठता है कि क्या नाम सच में बदला जा सकता है। अंतरराष्ट्रीय कानून के जानकारों का कहना है कि होर्मुज जैसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग का नाम कोई एक देश एकतरफा नहीं बदल सकता। ये नाम संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि, लंबे समय से चले आ रहे भौगोलिक उपयोग, संधियों, नेविगेशन सिस्टम और वैश्विक व्यापार पर आधारित होते हैं। कानूनी तौर पर 'ट्रंप स्ट्रेट' का अस्तित्व नहीं बन सकता। फिर भी भाषा और नामों का इस्तेमाल भू-राजनीति में शक्ति का संकेत माना जाता है।

यहां आपको बता दें कि मार्च 2026 में भी ट्रंप ने एक भाषण में गलती से 'स्ट्रेट ऑफ ट्रंप' कह दिया था। बाद में उन्होंने कहा कि उनकी गलतियां कम होती हैं। अप्रैल में उन्होंने सोशल मीडिया पर ऐसा नक्शा भी शेयर किया था जिसमें जलमार्ग का नया नाम लिखा था। माना जा रहा है कि ट्रंप का ताजा बयान उसी श्रृंखला की कड़ी है, जिसमें वे नियंत्रण के दावे के साथ नाम बदलने की बात कर रहे हैं।

Devendra Kasyap

लेखक के बारे में

Devendra Kasyap

देवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।

देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।

मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।

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