पहले माननी होंगी ये 13 शर्तें, तभी होगी बातचीत; शहबाज-मुनीर को PoK कमेटी का सख्त अल्टीमेटम

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जम्मू-कश्मीर संयुक्त अवामी कार्रवाई समिति ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में नई प्रशासनिक व्यवस्था के साथ कोई भी बातचीत शुरू करने से पहले 13 तत्काल शर्तें रखी हैं। समिति के कोर कमेटी सदस्यों ने ये मांगें जारी की हैं।

PoK Awami Action Committee
शहबाज-मुनीर को PoK कमेटी की दो टूक चेतावनी

पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में महीनों से चल रहे आंदोलन के बीच जम्मू-कश्मीर संयुक्त अवामी कार्रवाई समिति (JKJAAC) ने साफ कर दिया है कि नई प्रशासनिक व्यवस्था के साथ कोई भी बातचीत तभी शुरू होगी, जब उसकी 13 तत्काल शर्तें पूरी होंगी। समिति की कोर कमेटी के सदस्यों ने ये मांगें जारी की हैं। समिति का कहना है कि प्रतिबंध संबंधी अधिसूचना वापस लिए बिना, कर्फ्यू हटाए बिना, शहरों से सुरक्षा बल निकाले बिना, हिरासत में लिए गए और कथित रूप से अपहृत लोगों को रिहा किए बिना तथा लापता व्यक्तियों का पता लगाए बिना वार्ता का कोई मतलब नहीं है।

इसके साथ ही जेकेजेएएसी उन लोगों के शव परिवारों को सौंपने की भी मांग कर रही है, जिन्हें उसने शहीद बताया है। विरोध प्रदर्शनों के दौरान घायल हुए लोगों को इलाज उपलब्ध कराने की बात कही गई है। समिति की सबसे संवेदनशील मांगों में से एक यह है कि 'निर्दोष और निहत्थे' नागरिकों की मौत के लिए जिम्मेदार बताए गए लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। समिति ने इंटरनेट सेवा समेत नागरिक स्वतंत्रता पूरी तरह बहाल करने और पुराने समझौतों को खत्म करने वाली अधिसूचनाएं वापस लेने की मांग की है। 9 मई 2023 के बाद समिति के सदस्यों, स्थानीय अवामी एक्शन कमेटियों और आंदोलन से जुड़े लोगों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर रद्द करने की भी मांग की गई है।

आंदोलन क्यों?

बता दें कि जेकेजेएएसी पिछले कई वर्षों से बिजली बिल, गेहूं सब्सिडी, संसाधनों पर स्थानीय हक और पीओके विधानसभा में शरणार्थी सीटों जैसे मुद्दों पर आंदोलन चला रही है। जून 2026 में तनाव फिर तेज हुआ। 5 जून को क्षेत्रीय प्रशासन ने समिति को आतंकवाद निरोधक कानून के तहत गैरकानूनी और प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया। उसी दौर में कई शहरों में कर्फ्यू लगाया गया, इंटरनेट सेवाएं बाधित हुईं और सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई।

समिति का आरोप है कि विरोध और अंत्येष्टि के दौरान गोलीबारी हुई, कई नागरिक मारे गए, बड़ी संख्या में लोग घायल हुए तथा कुछ लोग लापता बताए गए। प्रशासन का पक्ष अलग रहा है। अधिकारियों ने पहले प्रदर्शनकारियों पर हिंसा और अशांति फैलाने का आरोप लगाया था। हाल के हफ्तों में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच बहाल करने को लेकर भी नए प्रदर्शनों की अपील की गई। अब नई प्रशासनिक व्यवस्था के साथ संभावित वार्ता की चर्चा के बीच समिति ने पहले शर्तें पूरी करने की बात कही है।

आइये अब जानते हैं समिति की 13 मुख्य मांगें

  • जम्मू-कश्मीर संयुक्त अवामी कार्रवाई समिति को गैरकानूनी और प्रतिबंधित समिति घोषित करने वाली अधिसूचना तुरंत वापस ली जाए।
  • आजाद कश्मीर के सभी शहरों से कर्फ्यू हटाया जाए और सभी सुरक्षा बल तत्काल वापस बुलाए जाएं।
  • सभी शहीदों के शव परिवारों को सौंपे जाएं, घायलों को इलाज दिया जाए, गिरफ्तार और अपहृत लोगों को बिना शर्त रिहा किया जाए तथा लापता व्यक्तियों की तलाश की जाए।
  • राज्य के निर्दोष और निहत्थे नागरिकों को शहीद करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए।
  • इंटरनेट सेवा समेत नागरिक स्वतंत्रता पर लगी सभी पाबंदियां तुरंत पूरी तरह हटाई जाएं।
  • पुराने समझौतों को समाप्त करने वाली अधिसूचनाएं और अन्य सूचनाएं वापस ली जाएं।
  • 9 मई 2023 से अब तक जेकेजेएएसी, स्थानीय अवामी एक्शन कमेटियों और आंदोलन से जुड़े सभी व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द की जाएं।
  • गृह/आंतरिक मंत्रालय जेकेजेएएसी कोर कमेटी के तीन सदस्यों और स्थानीय अवामी कार्रवाई समिति के एक सदस्य पर घोषित इनाम या सरप्राईज राशि तत्काल वापस ले।
  • 5 जून से अब तक वाहनों, घरों, दुकानों को हुए नुकसान, तोड़फोड़ और लूटपाट समेत सभी नागरिक नुकसान का तुरंत मुआवजा दिया जाए।
  • 9 मई 2023 से ईसीएल (निकास नियंत्रण सूची) और पीसीएल (पासपोर्ट नियंत्रण सूची) में शामिल सभी कश्मीरियों के नाम हटाने के आदेश जारी किए जाएं।
  • अवामी आंदोलन के नेताओं, कार्यकर्ताओं और आम जनता के खिलाफ दायर सभी मामले रद्द किए जाएं।
  • चौथी अनुसूची में नाम दर्ज करने और प्रोफाइलिंग से जुड़ी अधिसूचनाएं वापस ली जाएं।
  • 5 जून 2026 से अब तक मारे गए लोगों के परिवारों को प्रत्येक को 5 करोड़ पाकिस्तानी रुपये का मुआवजा दिया जाए और परिवार के दो सदस्यों को सरकारी नौकरी दी जाए। गंभीर रूप से घायलों को 50 लाख पाकिस्तानी रुपये और मामूली रूप से घायलों को 20 लाख पाकिस्तानी रुपये मुआवजा दिया जाए।

Devendra Kasyap

लेखक के बारे में

Devendra Kasyap

देवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।

देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।

मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।

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