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98 फीट की सुनामी, दो लाख की जा सकती है जान; क्या है जापान की मेगाक्वैक एडवाइजरी

98 फीट की सुनामी, दो लाख की जा सकती है जान; क्या है जापान की मेगाक्वैक एडवाइजरी

संक्षेप:

जापान इन दिनों भूकंप और सुनामी के संकट से जूझ रहा है। इस बीच मंगलवार को यहां पर मेगाक्वैक एडवायजरी जारी की गई। इसे एक रेयर एडवायजरी कहा जाता है। ओमोरी के पूर्वी तट पर 7.5 मैग्नीट्यूड का भूकंप आने के बाद यह चेतावनी जारी की गई है।

Dec 09, 2025 09:43 pm ISTDeepak Mishra लाइव हिन्दुस्तान, टोक्यो
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जापान इन दिनों भूकंप और सुनामी के संकट से जूझ रहा है। इस बीच मंगलवार को यहां पर मेगाक्वैक एडवायजरी जारी की गई। इसे एक रेयर एडवायजरी कहा जाता है। ओमोरी के पूर्वी तट पर 7.5 मैग्नीट्यूड का भूकंप आने के बाद यह चेतावनी जारी की गई है। इस भूकंप से बहुत ज्यादा नुकसान तो नहीं हुआ है, लेकिन अधिकारियों को आशंका है कि आने वाले दिनों में खतरा बढ़ सकता है। इसी वजह से यह चेतावनी जारी की गई है। अगर यहां पर सुनामी आती है तो यह 98 फीट ऊंची हो सकती है। इससे करीब दो लाख लोगों के मारे जाने की आशंका है।

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जापान सरकार के अनुमानों में चेतावनी दी गई है। इसमें कहा गया है कि होक्काइडो–सैनरिकु क्षेत्र में एक और समुद्री महाभूकंप 30 मीटर (98 फीट) ऊंचाई की सुनामी पैदा कर सकती है। इससे करीब 1,99,000 लोग मारे जा सकते हैं। इसके अलावा 2,20,000 इमारतें नष्ट हो सकती हैं और लगभग 31 ट्रिलियन येन का आर्थिक नुकसान हो सकता है। अगर ऐसी आपदा सर्दियों में होती है तो आशंका है कि 42,000 तक लोग हाइपोथर्मिया से पीड़ित हो सकते हैं। फिलहाल जो सलाह जारी की गई है, वह 182 नगरपालिकाओं तक फैली हुई है, जो होक्काइडो से चिबा प्रान्त तक है। यह हाल के वर्षों में जारी सबसे व्यापक भौगोलिक चेतावनियों में से एक है।

जापान के अधिकारियों पर 2011 का डर हावी है। उस साल भूकंप के चलते काफी तबाही हुई थी। इसमें करीब 20 हजार लोग मारे गए थे। वहीं, फुकुशिमा न्यूक्लियर संकट भी पैदा हुआ था। जापान के मौसम विभाग के मुताबिक इस बात की संभावना है कि अगले हफ्ते 8 से ज्यादा मैग्नीट्यूड का भूकंप आने की आशंका है। इसलिए समुद्र के तटीय इलाकों में रहने वालों से सतर्क रहने के लिए कहा गया है। साथ ही इमरजेंसी किट तैयार रखने और जरूरत होने पर तेजी से जगह खाली करने के लिए कहा गया है।

2011 की सुनामी, कुछ क्षेत्रों में 15 मीटर (50 फीट) तक पहुंची थी। इसने इवाते, मियागी और फुकुशिमा के तटीय समुदायों को तबाह कर दिया और फुकुशिमा डाइइची परमाणु संयंत्र को नष्ट कर दिया। इसके बाद रेडिएशन को लेकर गहरी और लंबे समय तक रहने वाली चिंताएं सामने आई थीं।

Deepak Mishra

लेखक के बारे में

Deepak Mishra
दीपक मिश्र मीडिया इंडस्ट्री में करीब 17 साल का अनुभव रखते हैं। खेल, सिनेमा और राजनीति पर प्रमुखता से काम किया है। खासतौर पर खेल की खबरों से जुनून की हद तक मोहब्बत है। 2011 में क्रिकेट वर्ल्ड कप और 2014 में फीफा फुटबॉल वर्ल्ड कप प्रमुखता से कवर कर चुके हैं। फोटोग्राफी और मोबाइल वीडियो स्टोरी के साथ-साथ पॉडकास्ट में विशेष रुचि रखते हैं। दैनिक जागरण-आई नेक्स्ट के साथ काम करते हुए कई वीडियो स्टोरीज पर काम किया। इसी दौरान आईपीएल पर पॉडकास्ट के साथ एक अन्य पॉडकास्ट ‘शहर का किस्सा’ भी कर चुके हैं। पूर्वांचल विश्वविद्यालय जौनपुर से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद आज अखबार के साथ पत्रकारिता की शुरुआत हुई। इसके बाद दैनिक जागरण-आई नेक्स्ट और पत्रिका अखबार में काम किया है। आई नेक्स्ट की डिजिटल विंग में काम करते हुए कई नए और रोचक प्रयोग किए। लाइव हिन्दुस्तान में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर काम कर रहे हैं। और पढ़ें

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