भारतीय सेना में भर्ती के लिए नेपाल में प्रदर्शन... अग्निवीर के समर्थन में सड़क पर उतरे गोरखा
पूर्व गोरखा सैनिकों और उनके समर्थकों ने नेपाल के पोखरा में विरोध प्रदर्शन कर भारतीय सेना में अग्निवीर भर्ती फिर से शुरू करने की मांग की। उन्होंने खाड़ी देशों की नौकरियों के बजाय अग्निपथ योजना के तहत नेपाली युवाओं की भर्ती तुरंत बहाल करने की अपील की।

पूर्व गोरखा सैनिकों और उनके समर्थकों ने नेपाल के पोखरा शहर में विरोध प्रदर्शन किया। उनका मुख्य मांग है कि अग्निपथ योजना के अंतर्गत भारतीय सेना में नेपाली युवाओं की भर्ती प्रक्रिया तुरंत फिर से शुरू की जाए। यह प्रदर्शन भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ के नेपाल दौरे से कुछ दिन पहले हुआ है। नेपाली समाचार पोर्टल रातोपती के अनुसार, यह प्रदर्शन इंडियन एक्स-सर्विसमैन गोरखा ब्रिगेड नेपाल पोखरा द्वारा आयोजित किया गया। प्रदर्शनकारियों ने जिला प्रशासन कार्यालय के माध्यम से नेपाल सरकार को दो बिंदुओं वाला ज्ञापन सौंपा। इसमें भारतीय सेना में भर्ती तुरंत फिर से शुरू करने तथा सोल्जर शब्द वाले पूर्व सैनिक संगठनों का नवीकरण करने की मांग की गई है।
बता दें कि भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ 16 अगस्त से पांच दिवसीय नेपाल दौरे पर जाएंगे। इस दौरान राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल उन्हें नेपाली सेना के मानद जनरल की उपाधि प्रदान करेंगे। काठमांडू पोस्ट के अनुसार, जनरल सेठ प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से भी शिष्टाचार भेंट कर सकते हैं।
207 वर्षों से भारतीय सेना में नेपाली युवाओं की भर्ती
ब्रिगेड के अध्यक्ष कर्नल कृष्ण बहादुर खत्री ने कहा कि सुगौली संधि के बाद से 207 वर्षों से अधिक समय तक नेपाली युवाओं की भारतीय सेना में भर्ती होती रही है। अग्निपथ योजना लागू होने के बाद नेपाल सरकार ने विभिन्न कारण बताकर इस प्रक्रिया को रोक दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि भर्ती पर रोक से न केवल युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही गोरखा सैनिक परंपरा भी संकट में पड़ गई है।
आगे उन्होंने कहा कि चार वर्ष की सेवा में युवा लगभग 45 से 50 लाख रुपये कमा सकते हैं। यह व्यवसाय खाड़ी देशों में 50 डिग्री सेल्सियस तापमान में न्यूनतम मजदूरी पर काम करने से सैकड़ों गुना बेहतर है। पूर्व सैनिकों का कहना है कि नेपाली युवा खाड़ी देशों की कठिन और कम वेतन वाली नौकरियों के बजाय भारतीय सेना में शामिल होना पसंद करते हैं।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे आगे भी विरोध जारी रखेंगे। गोरखा भर्ती भारत-नेपाल सैन्य संबंधों का ऐतिहासिक स्तंभ रही है, जो 1947 के त्रिपक्षीय समझौते के बाद भी जारी रही।
2022 में शुरू हुई अग्निवीर योजना
बता दें कि भारत सरकार ने 2022 में सशस्त्र बलों के लिए अग्निपथ योजना शुरू की थी। इसके तहत अग्निवीर चार वर्ष तक सेवा करते हैं, जिसके बाद 25 प्रतिशत तक को लंबी सेवा के लिए रखा जा सकता है। कोविड-19 महामारी के कारण 2020 से भर्ती पहले ही प्रभावित हो चुकी थी। अग्निपथ लागू होने के बाद नेपाल ने इस योजना के प्रावधानों और गोरखा भर्ती की पारंपरिक व्यवस्था में तालमेल को लेकर चिंताओं के बीच प्रक्रिया को फिर से शुरू नहीं होने दिया।
पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने हाल ही में कहा था कि अब यह निर्णय काठमांडू पर निर्भर है कि वह अपने युवाओं को अग्निपथ योजना के अंतर्गत भारतीय सेना में भेजना चाहता है या नहीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि नेपाली और भारतीय नागरिकों के लिए अलग-अलग भर्ती योजनाएं संभव नहीं हैं।


