EXPLAINER: 207 साल पहले भारत-नेपाल में हुई थी संधि, फिर शुरू हो गया प्रदर्शन; क्या है पूरा मामला
2020 के बाद से नेपाली युवा भारतीय सेना में भर्ती नहीं हो रहे हैं। इसको लेकर ही नेपाल के पूर्व सैनिकों ने प्रदर्शन शुरू किया और सरकार से मांग की है कि नेपाली युवाओं को भारतीय सेना में भर्ती होने का मौका मिलना चाहिए।

भारतीय सेना में सेवा देने को लेकर नेपाल में प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। नेपाल के पोखरा में पूर्व गोरखा सैनिकों ने प्रदर्शन किया और सरकार से मांग की कि नेपाल के युवाओं को फिर से भारतीय सेना में सेवा देने का मौका मिलना चाहिए। 2020 में कोरोना काल के बाद से ही नेपाल के युवा भारतीय सेना में भर्ती नहीं हो रहे हैं। कोरोना काल में यह भर्ती रोकी गई थी। इसके बाद 2022 में भारत सरकार ने अग्निपथ स्कीम लॉन्च कर दी जिसके तहत चार साल की सेवा के लिए युवाओं को भर्ती किया जाता है। हालांकि उनमें से 25 फीसदी को परमानेंट कर दिया जाता है। इस पर्सेंटेज को और बढ़ाने की भी चर्चा हो रही है। नेपाल की सरकार ने अपने युवाओं पर अग्निपथ स्कीम तहत भर्ती पर रोक लगा दी थी।
नेपाल दौरे पर जाएंगे आर्मी चीफ
बता दें कि भारत की आजादी से पहले नेपाली गोरखा ब्रिटिश इंडियन आर्मी में सेवा देते रहे हैं। वहीं आजादी के बाद भी नेपाल के युवाओं को सेना में भर्ती किया जाता था। बता दें कि जल्द ही आर्मी चीफ जनरल धीरज सेठ नेपाल के दौरे पर जाने वाले हैं। उनके सामने भी यह मुद्दा उठाया जा सकता है। प्रदर्शन करने वाले पूर्व सैनिकों का कहना है कि नेपाली युवाओं के भारतीय सेना में भर्ती होने से दोनों देशों के संबंध भी ज्यादा मजबूत होते थे।
207 साल पहले हुआ था समझौता
प्रदर्शन करने वाले पूर्व सैनिकों ने बालेंद्र शाह सरकार को जिला प्रशासन के माध्यम से दो पॉइंट का ज्ञापन सौंपा है। इसमें कहा गया है कि भारतीय सेना में नेपाली युवाओं की भर्ती को छूट दी जाए और पूर्व सैनिकों के संगठनों को रिन्यू किया जाए। एक्स सर्विसमैन गोरखा ब्रिगेडके चेयरमैन कृष्ण बहादुर खत्री ने कहा कि सुगौली संधि के बाद लगभग दो शताब्दी से भारतीय सेना में नेपाली युवा भर्ती होते चले आए हैं। अगर यह क्रम रुकता है तो ऐतिहासिक महत्व के खोने का खतरा है। उन्होंने कहा, 207 साल पहले सुगौली संधि हुई थी। हालांकि जब भारत में अग्निपथ स्कीम शुरू हुई तो कई कारणों से नेपाली युवाओं की भर्ती रुक गई।
खत्री ने कहा कि भारतीय सेना में नेपालियों की भर्ती रुकने से बेरोजगारी की समस्या बढ़ी है। उन्होंने कहा कि अब गोरखा अग्निपथ स्कीम की वजह से अपने विकल्प तलाशने लगे हैं और खाड़ी देशों में कमाने के लिए जाने लगेहैं। उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों में 50 डिग्री तापमान में जाकर काम करने से लाखों गुना अच्छा है कि भारतीय सेना में सेवा दी जाए। बता दें कि लंबे समय से भारत और नेपाल के बीच गहरे संबंध थे।
आपको बता दें कि सुगौली की संधि ब्रिटिश इंडिया कंपनी और नेपाल के राजा के बीच आंग्ल-नेपाली युद्ध को खत्म करने के लिए की गई थी। 4 मार्च 1816 को यह संधि हुई थी। इसके तीन साल बाद इसी संधि में भारतीय सेना में नेपाली सैनिकों को जगह देने की भी बात जोड़ी गई थी। इसी संधि के आधार पर नेपाल भारत के तीन क्षेत्रों पर अधिकार जता हा है। हालांकि नेपाली सरकार ने संसद में बताया था कि उसे यह पक्का नहीं है कि उसके पास सुगौली संधि के असली दस्तावेज मौजूद हैं या नहीं।
भारतीय सेना की ओर से क्या कहा गया
बता दें कि 16 अगस्त को आर्मी चीफ जनरल धीरज सेठ नेपाल जा सकते हैं। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल उन्हें नेपाली सेना के जनरल की उपाधि से सम्मानित करेंगे। इसके अलावा वह प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से भी मुलाकात करेंगे। वहीं गोरखा प्रदर्शनकारियों ने कहा है कि अगर भारतीय सेना के सामने उनका मुद्दा ना रखा गया तो वह आगे भी प्रदर्शन करेंगे। बता दें कि आजादी से पहले ब्रिटिश इंडियन आर्मी में गोरखा सैनिकों के 6 रेजिमेंट थे। 1947 में देश आजाद होने के बाद भी गोरखा रेजिमेंट भारतीय सेना का हिस्सा था। पूर्व सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने कहा था कि अग्निवीर योजना में नेपाली युवाओं को भेजने का फैसला नेपाल के हाथ में है। उन्होंने कहा था कि भारतीय युवाओं और नेपाली युवाओं के लिए अलग-अलग स्कीम नहीं हो सकती हैं।


