अमेरिका-इजरायल के खिलाफ ईरान की मदद कर रहे रूसी राष्ट्रपति पुतिन, ट्रंप ने जताया शक

Mar 13, 2026 10:25 pm ISTPramod Praveen एपी, वॉशिंगटन
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जब उनसे  पूछा गया कि क्या रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ईरान का समर्थन कर रहे हैं, तो ट्रंप ने Fox News Radio को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि हां, मुझे लगता है कि वह शायद ईरान की थोड़ी-बहुत मदद कर रहे हैं।

अमेरिका-इजरायल के खिलाफ ईरान की मदद कर रहे रूसी राष्ट्रपति पुतिन, ट्रंप ने जताया शक

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उन्हें इस बात का शक है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अमेरिका और इज़राइल के खिलाफ चल रहे युद्ध में ईरान की मदद कर रहे हैं। ट्रंप ने यह टिप्पणी Fox News रेडियो को दिए एक इंटरव्यू में की, जो शुक्रवार को प्रसारित हुआ। शुक्रवार को प्रसारित इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, "मुझे लगता है कि वह शायद उसकी थोड़ी-बहुत मदद कर रहे हैं, हाँ, मेरा ऐसा ही अंदाज़ा है। और शायद उन्हें लगता है कि हम यूक्रेन की मदद कर रहे हैं, है ना?"

जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या अमेरिका और इज़रायल के हमलों के बाद रूस ईरान का समर्थन कर रहा है, तो उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि वह शायद थोड़ी मदद कर रहा होगा। और शायद वह यह भी सोचता है कि हम यूक्रेन की मदद कर रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अक्सर देश अपने-अपने सहयोगियों की मदद करते हैं। उन्होंने कहा, “हम यूक्रेन की मदद कर रहे हैं। वह भी यही कहेगा कि हम ऐसा कर रहे हैं, तो वे भी ऐसा कर सकते हैं।”

खुफिया सहयोग की रिपोर्ट

कुछ अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि रूस ईरान को अमेरिकी सैन्य ठिकानों से जुड़ी खुफिया जानकारी दे रहा है। रिपोर्ट के अनुसार यह जानकारी अमेरिकी सैनिकों, जहाजों और विमानों की लोकेशन और गतिविधियों से संबंधित हो सकती है, जिससे ईरान को अपने हमलों की योजना बनाने में मदद मिल सकती है।

पेंटागन का अलग रुख

हालांकि अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने पिछले सप्ताह पेंटागन में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा था कि मौजूदा संघर्ष में रूस और चीन फिलहाल कोई बड़ा कारक नहीं हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यदि रूस वास्तव में ईरान की मदद करता है, तो यह संघर्ष केवल मध्य-पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि इसमें वैश्विक शक्तियों की प्रतिस्पर्धा भी और स्पष्ट हो सकती है। इस समय अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी तनाव ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति को एक नए मोड़ पर ला खड़ा किया है, जहां हर बड़ी शक्ति अपने रणनीतिक हितों को ध्यान में रखते हुए कदम उठा रही है।

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लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

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