एक घंटे में तबाह कर देंगे सभी पुल और पावर प्लांट; एक तरफ वार्ता, दूसरी तरफ ईरान को ट्रंप की धमकी

Pramod Praveen रॉयटर्स, वॉशिंगटन
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राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी दावा किया है कि उन्होंने ईरान को पूरे पश्चिमी एशिया पर कब्जा करने से रोक दिया है। अपने साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि  वे पश्चिमी एशिया पर कब्जा करने जा रहे थे और हमने उन्हें रोक दिया।

एक घंटे में तबाह कर देंगे सभी पुल और पावर प्लांट; एक तरफ वार्ता, दूसरी तरफ ईरान को ट्रंप की धमकी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को फिर धमकी दी है और कहा है कि एक घंटे के अंदर वह ईरान के सभी पुल और पावर प्लांट तबाह कर सकते हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने बुधवार को फॉक्स बिजनेस नेटवर्क के "Mornings with Maria" कार्यक्रम में ये धमकी दी और कहा कि अमेरिका एक घंटे के अंदर ईरान के सभी पुलों और पावर प्लांट को तबाह कर सकता है। उनकी यह नई धमकी तब आई है, जब एक तरफ चर्चा है को दोनों देश दूसरे दौर की शांति वार्ता की तरफ कदम बढ़ा रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने संकेत दिया है कि शांति वार्ता का अगला दौर अगले दो दिनों के भीतर पाकिस्तान में शुरू हो सकता है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी दावा किया है कि उन्होंने ईरान को पूरे पश्चिमी एशिया पर कब्जा करने से रोक दिया है। अपने साक्षात्कार में उन्होंने कहा, "वे पश्चिमी एशिया पर कब्जा करने जा रहे थे और हमने उन्हें रोक दिया।" उन्होंने कहा कि इसका श्रेय उनके उस फैसले को जाता है, जिसमें उन्होंने ईरानी परमाणु केंद्रों पर हवाई हमले करने का आदेश दिया था। उनका मानना है कि इसी कदम की वजह से ईरान का रास्ता रुका।

पश्चिमी एशिया के देशों पर हमला कर देता ईरान

ट्रंप ने कहा कि अगर अमेरिका ने कदम नहीं उठाया होता, तो ईरान कुछ ही हफ्तों के भीतर पश्चिमी एशिया के देशों पर हमला कर देता। साथ ही उन्होंने एक बार फिर 2015 में ओबामा प्रशासन के समय हुए ईरान परमाणु समझौते की आलोचना भी की। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, "उनके पास एक महीने या शायद दो हफ्ते के भीतर परमाणु हथियार होता और वे इसका इस्तेमाल इजरायल और मध्य पूर्व पर करते। वे इसका इस्तेमाल हम पर भी करते। न केवल इजरायल, बल्कि कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जैसे देश भी इसके निशाने पर होते।" उन्होंने उन जवाबी हमलों का जिक्र किया जो 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने के बाद ईरान ने खाड़ी देशों पर किये थे।

हमने उन्हें रोका

ट्रंप ने दोहराया, "इन देशों को हमले की उम्मीद नहीं थी, क्योंकि ईरान इन्हीं देशों के पीछे पड़ा था। वे पश्चिमी एशिया को हथियाने वाले थे और हमने उन्हें रोका।" अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस युद्ध के दौरान ईरान को हुए भारी नुकसान का विवरण देते हुए कहा कि वहां के सैन्य और नागरिक ढांचे को इतना नुकसान पहुंचाया गया है कि उसे ठीक होने में दशकों लग जाएंगे। उन्होंने कहा, “अगर मैं अभी पीछे हट जाऊं, तो उन्हें अपना देश फिर से खड़ा करने में 20 साल लगेंगे। मुझे लगता है कि वे अब हर हाल में समझौता करना चाहते हैं।”

युद्ध से आर्थिक रफ्तार थोड़ी धीमी होगी

जब ट्रंप से अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर इस युद्ध के असर के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने माना कि युद्ध से आर्थिक रफ्तार थोड़ी धीमी होगी। उन्होंने कहा, "असर तो पड़ेगा, लेकिन हम फिर से संभल जाएंगे।" उन्होंने वादा किया कि पेट्रोल-डीजल के दाम जल्द ही बहुत कम हो जाएंगे। दूसरी ओर, अमेरिका के उप राष्ट्रपति जे डी वेंस ने एक कार्यक्रम में कहा कि पिछले सप्ताहांत बातचीत में 'काफी प्रगति' हुई है। उन्होंने साफ किया कि सरकार किसी छोटे-मोटे समझौते के पक्ष में नहीं है। उनका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम बंद करे और हमास तथा हिजबुल्लाह जैसे समूहों को मदद देना बंद करे।

Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

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