'जिन्ना-इकबाल' से आजादी की तैयारी, बलूच नेता के ऐलान से पाकिस्तान में खलबली; जानें प्लान

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आजादी की घोषणा के कुछ दिनों बाद बलूचिस्तान गणराज्य ने सार्वजनिक स्थानों से पाकिस्तान से जुड़े नामों और प्रतीकों को हटाने की योजना की घोषणा की है। समूह का कहना है कि यह कदम बलूचिस्तान की अपनी ऐतिहासिक पहचान को बहाल करने का हिस्सा है।

Republic of Balochistan
बलूच नेता का बड़ा प्लान

बलूचिस्तान गणराज्य ने आजादी की घोषणा के कुछ ही दिनों बाद सार्वजनिक स्थानों, सड़कों, संस्थानों और सरकारी इमारतों से पाकिस्तान, ब्रिटेन तथा पूर्व विदेशी शासन से जुड़े नामों और प्रतीकों को पूरी तरह हटाने की व्यापक योजना की घोषणा कर दी है। समूह का दावा है कि यह कदम बलूचिस्तान की अपनी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय पहचान को बहाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है।

बलूच नेता मीर यार बलूच ने इस संबंध में विस्तृत बयान जारी करते हुए कहा कि बलूचिस्तान गणराज्य स्वयं को एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र मानता है, जिसकी स्वतंत्रता की नींव 11 अगस्त 1947 को रखी गई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीतिक स्वतंत्रता केवल घोषणा तक सीमित नहीं हो सकती। स्वतंत्रता का वास्तविक अर्थ तब पूरा होता है जब वह इतिहास, संस्कृति, भाषा, प्रतीकों, संस्थानों और सार्वजनिक जीवन के हर पहलू में दिखाई दे।

मीर यार बलूच ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य केवल नाम बदलना नहीं है, बल्कि बलूचिस्तान की अपनी ऐतिहासिक पहचान, राष्ट्रीय चरित्र और सांस्कृतिक विरासत को पूरी तरह बहाल करना है। स्वतंत्र भूमि की पहचान भी स्वतंत्र होनी चाहिए।

नाम परिवर्तन की प्रक्रिया कैसे होगी?

घोषणा के अनुसार, सबसे पहले उन सभी नामों की समीक्षा की जाएगी जो पाकिस्तान, ब्रिटेन या किसी पूर्व विदेशी शासन और कब्जे की पहचान या प्रतीक हैं। इन नामों को क्रमबद्ध तरीके से हटाया जाएगा और उनके स्थान पर बलूचिस्तान के प्राचीन इतिहास, भूगोल, संस्कृति, शहीदों, राष्ट्रीय नेताओं तथा ऐतिहासिक हस्तियों से जुड़े नाम रखे जाएंगे।

क्वेटा और बलूचिस्तान के अन्य क्षेत्रों में निम्नलिखित प्रमुख बदलाव प्रस्तावित हैं...

  • जिन्ना रोड का नाम बदलकर नवाब मेहराब खान रोड किया जाएगा
  • फातिमा जिन्ना रोड का नाम दोस्त मोहम्मद बलूच रोड रखा जाएगा
  • इकबाल रोड का नाम गुलाम मोहम्मद बलूच रोड होगा
  • ब्रिटिश अस्पताल का नाम खैर बख्श मर्री अस्पताल किया जाएगा
  • सर सैंडर्स एयरपोर्ट का नाम हम्माल बलूच एयरपोर्ट रखा जाएगा
  • कैंटोनमेंट रोड का नाम गुल बीबी एवेन्यू होगा
  • पाकिस्तान हाईवे का नाम हुरबैर हाईवे किया जाएगा
  • सिर्फ सड़कें ही नहीं, हर सार्वजनिक स्थान शामिल

मीर यार बलूच के बयान में स्पष्ट किया गया है कि नाम परिवर्तन की यह योजना केवल सड़कों और गलियों तक सीमित नहीं रहेगी। इसके दायरे में शामिल होंगे...

  • अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र
  • हवाई अड्डे और एयरलाइंस
  • बांध, खनिज परियोजनाएं, गैस क्षेत्र और तेल कुएं
  • बंदरगाह, राजमार्ग और चौक
  • पार्क, बैंक, रिसॉर्ट और मॉल
  • शैक्षणिक संस्थान, विश्वविद्यालय और कॉलेज
  • सरकारी भवन, प्रशासनिक कार्यालय और अन्य सभी सार्वजनिक स्थान

यह किसी राष्ट्र के खिलाफ नहीं

बयान में विशेष रूप से जोर देते हुए कहा गया कि नाम बदलने की यह कार्रवाई किसी भी राष्ट्र या उसके लोगों के खिलाफ निर्देशित नहीं है। इसे बलूचिस्तान की अपनी राष्ट्रीय पहचान को मजबूत करने और युवा पीढ़ी को ऐतिहासिक विरासत से फिर से जोड़ने के प्रयास के रूप में प्रस्तुत किया गया है। मीर यार बलूच ने साफ शब्दों में कहा कि हम किसी देश या समुदाय के प्रतीकों का अपमान नहीं कर रहे। हम केवल अपनी जमीन पर अपनी पहचान को स्थापित कर रहे हैं। स्वतंत्रता का अर्थ है कि सार्वजनिक स्थानों, संस्थानों और प्रतीकों पर भी हमारी अपनी छाप हो।

उन्होंने आगे कहा कि आधिकारिक और सार्वजनिक प्रतीकों को, जो बाहरी शासन, प्रभुत्व या विदेशी राजनीतिक पहचान का प्रतिनिधित्व करते हैं, धीरे-धीरे और व्यवस्थित तरीके से हटाया जाएगा। बलूचिस्तान गणराज्य का मानना है कि नाम परिवर्तन केवल प्रशासनिक कदम नहीं है, बल्कि यह एक गहरी सांस्कृतिक और मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया है। समूह का तर्क है कि जब सड़कों, अस्पतालों, हवाई अड्डों और सरकारी इमारतों के नाम स्थानीय नायकों, शहीदों और ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के नाम पर होंगे, तो नई पीढ़ी अपनी जड़ों से बेहतर जुड़ सकेगी। मीर यार बलूच ने कहा कि एक स्वतंत्र राष्ट्र की पहचान उसके प्रतीकों से बनती है। हम चाहते हैं कि बलूचिस्तान के हर कोने में हमारी अपनी कहानी, हमारा अपना इतिहास और हमारी अपनी विरासत दिखाई दे।

Devendra Kasyap

लेखक के बारे में

Devendra Kasyap

देवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।

देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।

मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।

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