हंगरी में बड़ा उलटफेर, 16 साल बाद गई ट्रंप के करीबी की सत्ता; विक्टर ओरबान हारे
ओरबान के रूस से नजदीकी संबंध हैं जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी उनके समर्थकों में गिने जाते हैं। लेकिन मीडिया की आजादी, भ्रष्टाचार के आरोप, सख्त माइग्रेशन नीति और अहम नीतियों पर यूरोपीय संघ से टकराव जैसे मुद्दों को लेकर उनके खिलाफ रोष बढ़ रहा है।

हंगरी में रविवार को हुए आम चुनावों में विपक्षी तिसा पार्टी को दो तिहाई बहुमत हासिल हो गया है। इस तरह बीते 16 साल से सत्ता में बने हुए प्रधानमंत्री विक्टर ओरबान की फिडेस पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा है। रविवार देर रात हंगरी के चुनाव आयोग ने बताया कि 84।91 प्रतिशत वोटों की गिनती के बाद तिसा पार्टी ने 199 में से 138 सीटें जीत ली हैं। इस तरह, उसे संवैधानिक बदलावों के लिए जरूरी बहुमत मिल गया है।
इससे पहले हंगरी के प्रधानमंत्री ओरबान ने अपनी हार स्वीकार करते हुए बुडापेस्ट में अपने समर्थकों से कहा, 'भले जो हो, हम विपक्ष में रहकर मातृभूमि की सेवा करेंगे।' उन्होंने तिसा पार्टी के नेता पीटर मागयार को फोन कर जीत की बधाई दी। इस जीत के साथ माग्यार हंगरी में जरूरी सुधार कर पाएंगे जिसके लिए संवैधानिक बदलाव करने होंगे। इनमें ओरबान के दौर में नियुक्त किए अहम अधिकारियों को हटाना भी शामिल है। अगर मागयार के पास दो तिहाई बहुमत ना होता, तो इस तरह के कदमों को संवैधानिक अदालत रोक देती।
माग्यार ने जीत को ऐतिहासिक बताते हुए कहा, 'हमने कर दिखाया... मिलकर हमने ओरबान की सत्ता को गिरा दिया... एक साथ मिलकर।' 45 साल के माग्यार ने बुडापेस्ट में अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा, 'हमने हंगरी को आजाद करा दिया। हमने अपनी मातृभूमि को वापस ले लिया है।'
जीत पर बधाई
माग्यार को शानदार जीत पर जर्मन चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स ने बधाई दी है। उन्होंने एक्स पर लिखा, 'हंगरी ने जनादेश दे दिया है। मैं एक मजबूत, सुरक्षित, और सबसे जरूरी एकजुट यूरोप के लिए आपके साथ मिलकर करने को उत्सुक हूं।' जर्मनी और दूसरे यूरोपीय देशों का प्रधानमंत्री ओरबान के साथ टकराव होता रहा है क्योंकि उन्होंने यूक्रेन को दी जाने वाली मदद को बार बार रोका और यूरोपीय संघ से उच्च स्तर की सूचनाएं रूस को मुहैया कराईं।
रूस और अमेरिका के करीबी थी विक्टर ओरबान
ओरबान के रूस से नजदीकी संबंध हैं जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी उनके समर्थकों में गिने जाते हैं। लेकिन मीडिया की आजादी, भ्रष्टाचार के आरोप, सख्त माइग्रेशन नीति और अहम नीतियों पर यूरोपीय संघ से टकराव जैसे मुद्दों को लेकर उनके खिलाफ रोष बढ़ रहा है।
अब हंगरी के चुनाव नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फॉन डेयर लायन ने कहा कि हंगरी ने यूरोप को चुना है। उन्होंने कहा कि इस नतीजे से यूरोपीय संघ और मजबूत होगा। वहीं, फ्रांस के राष्ट्रपति एमानुएल माक्रों ने माग्यार को बधाई दी और उन्हें "अधिक संप्रभु यूरोप की तरफ" जाने के लिए आमंत्रित किया।
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