
ट्रंप की नई धमकी के बीच भारत को पोलैंड का समर्थन, जयशंकर के सामने रूसी तेल खरीदने पर क्या कहा
वीमर ट्रायंगल (Weimar Triangle) ग्रुपिंग के साथ भारत की पहली बातचीत के बाद पेरिस में बोलते हुए, पोलैंड के विदेश मंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की ने कहा कि वह इस बात से संतुष्ट हैं कि भारत ने रूसी तेल आयात में कटौती शुरू कर दी है।
रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर अमेरिका के साथ बढ़ते तनातनी और नई टैरिफ की धमकियों के बीच भारत को पोलैंड का समर्थन मिला है। पोलैंड ने कहा है कि भारत ने रूसी तेल आयात में कटौती शुरू कर दी है। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका ने भारत पर 500 फीसदी तक टैरिफ लगाने की चेतावनी को और तेज कर दिया है।
बुधवार को वीमर ट्रायंगल (Weimar Triangle) ग्रुपिंग के साथ भारत की पहली बातचीत के बाद पेरिस में बोलते हुए, पोलैंड के विदेश मंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की ने कहा कि वह इस बात से संतुष्ट हैं कि भारत ने रूसी तेल आयात में कटौती शुरू कर दी है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अन्य यूरोपीय नेताओं की मौजूदगी में सिकोरस्की ने कहा,“मैंने इस बात पर संतोष जताया कि भारत ने रूसी तेल आयात घटाया है, क्योंकि इससे पुतिन की युद्ध मशीन को ईंधन मिलता है। इस मुद्दे पर हम और विस्तार से चर्चा करेंगे, जब मैं अगले हफ्ते भारत आऊंगा।”
अमेरिका-भारत रिश्तों में बढ़ती तल्खी
सिकोरस्की का बयान ऐसे समय आया है जब भारत और अमेरिका के रिश्ते तनावपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही भारतीय आयात पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगा चुके हैं। इसके अलावा, अमेरिका में एक द्विदलीय (बाइपार्टिसन) बिल को भी मंजूरी दी गई है, जिसके तहत उन देशों पर 500 प्रतिशत तक दंडात्मक शुल्क लगाया जा सकता है, जो “जानबूझकर” रूस से तेल या यूरेनियम खरीदते हैं।
अगले हफ्ते हो सकता है अमेरिकी संसद में वोट
रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक "सार्थक" बैठक के बाद इस कानून को मंजूरी दे दी है, और अगले हफ्ते ही इस पर वोटिंग संभव है। बता दें कि ट्रंप प्रशासन पहले भी भारतीय उत्पादों पर 25% का रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया है। इसके अलावा रूस से तेल खरीद के चलते 25% का अतिरिक्त जुर्माना भी भारत पर लगा चुका है, जिससे कुछ भारतीय उत्पादों पर कुल टैरिफ 50% तक पहुंच गया है।
हाल ही में ट्रंप ने चेतावनी भरे लहजे में कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी “जानते थे कि मैं खुश नहीं हूं” और संकेत दिया कि टैरिफ “बहुत जल्दी” और बढ़ाए जा सकते हैं। इससे साफ है कि अमेरिका एक ओर भारत पर रूस से तेल खरीद को लेकर दबाव बढ़ा रहा है, वहीं पोलैंड जैसे यूरोपीय देश भारत के रुख को समझते हुए समर्थन के संकेत दे रहे हैं। आने वाले दिनों में सिकोरस्की की भारत यात्रा और अमेरिकी संसद का फैसला इस मुद्दे पर अहम साबित हो सकता है।

लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।
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