PoK में 'गोरिल्ला युद्ध' जैसे हालात! सैन्य अस्पताल पर कब्जा, 11 मरे; आज होगा महासंग्राम
PoK के रावलकोट में 9 जून के पूर्ण बंद से पहले पाकिस्तानी सुरक्षाबलों और JAAC प्रदर्शनकारियों के बीच भीषण खूनी झड़प हुई है। इस हिंसा में 4 पुलिसकर्मियों समेत 11 लोगों की मौत हो गई और 70 से ज्यादा घायल हैं।

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में एक बार फिर हालात बेकाबू हो गए हैं। सिविल सोसाइटी गठबंधन 'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JAAC) पर सरकार द्वारा बैन लगाए जाने के बाद पूरे इलाके में अशांति फैल गई है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 9 जून यानी आज बुलाए गए पूर्ण क्षेत्र बंद से पहले रावलकोट में प्रदर्शनकारियों और पाकिस्तानी सुरक्षाबलों के बीच हिंसक झड़प हुई है। इस संघर्ष में कम से कम 11 लोगों की जान चली गई है, जबकि 70 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। हालात को देखते हुए 'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JAAC) ने मंगलवार को पूर्ण रूप से 'शटर-डाउन' और चक्का जाम हड़ताल का आह्वान किया है, जिससे इलाके में एक बार फिर बड़े बवाल की आशंका पैदा हो गई है।
हिंसा उस वक्त भड़की जब JAAC के समर्थक एक अस्पताल के मुर्दाघर के बाहर इकट्ठा हुए थे, जहां इससे पहले हुई एक गोलीबारी में मारे गए एक कार्यकर्ता का शव रखा गया था। प्रशासन ने आतंकवाद विरोधी कानून के तहत पिछले हफ्ते ही JAAC को प्रतिबंधित संगठन घोषित किया था।
क्या है JAAC का प्लान और प्रशासन की तैयारी?
शुरुआती योजना के मुताबिक, JAAC ने ऐलान किया है कि प्रदर्शनकारी सबसे दक्षिणी जिले भिंबर से एक 'लॉन्ग मार्च' शुरू करेंगे। यह मार्च मीरपुर, कोटली और पुंछ से होते हुए 10 जून को मुजफ्फराबाद पहुंचेगा, जहां लेजिस्लेटिव असेंबली (विधानसभा) के बाहर धरना दिया जाएगा।
हालांकि, पाकिस्तानी अधिकारी इसे लेकर सख्त रुख अपनाए हुए हैं। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि किसी भी सूरत में इस मार्च की इजाजत नहीं दी जाएगी। प्रशासन की हालिया कार्रवाई में पूरे इलाके से 200 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है। अधिकारियों का मानना है कि संगठन के शीर्ष नेता इस समय फरार हैं, ऐसे में सड़कों पर भारी भीड़ जुटने की संभावना कम है, लेकिन छोटे स्तर पर कई जगहों पर प्रदर्शन हो सकते हैं।
रावलकोट में कैसे बिगड़े थे हालात? 'गोरिल्ला युद्ध' की तर्ज पर हमला
रविवार आधी रात को रावलकोट में प्रशासन और सुरक्षाबलों ने भारी मशक्कत के बाद प्रदर्शनकारियों को खदेड़ा। डिविजनल कमिश्नर सरदार वहीद खान के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने न सिर्फ कंबाइंड मिलिट्री हॉस्पिटल (CMH) का रास्ता रोक दिया था, बल्कि लगभग पूरे अस्पताल को अपने कब्जे में ले लिया था। इसके चलते डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को अपनी जान बचाकर वहां से भागना पड़ा।
हिंसा की जानकारी देते हुए कमिश्नर ने बताया कि उपद्रवियों के पास लंबी दूरी तक मार करने वाले हथियार, पेट्रोल बम और अन्य गोला-बारूद मौजूद थे। उन्होंने गलियों से छिपकर 'गोरिल्ला युद्ध' की तर्ज पर पूरी प्लानिंग के साथ सुरक्षाकर्मियों पर हमले किए।
बाकी इलाकों में कैसा है असर?
सोमवार को रावलकोट को छोड़कर बाकी लगभग सभी हिस्सों में जनजीवन सामान्य रहा। हालांकि, रावलकोट में लगातार दूसरे दिन दुकानें बंद रहीं और पब्लिक ट्रांसपोर्ट सड़कों से नदारद रहा। इसके अलावा मीरपुर जिले के डडयाल में आंशिक हड़ताल देखने को मिली।
कितनों की गई जान, पुलिस ने क्या कहा?
पुंछ सेक्टर के कमिश्नर सरदार वहीद खान ने बताया कि इस हिंसा में 4 पुलिसकर्मी और एक राहगीर की मौत हुई है। उन्होंने कहा, "उपद्रवियों की फायरिंग में चार पुलिसकर्मियों और एक राहगीर की जान गई। इसके जवाब में कानून लागू करने वाली एजेंसियों की कार्रवाई में छह प्रदर्शनकारी भी मारे गए हैं।"
वहीं, पुलिस चीफ लियाकत मलिक के अनुसार, 23 सुरक्षाकर्मी और करीब 50 प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं। पुलिस ने ऑपरेशन के दौरान कई लोगों को गिरफ्तार भी किया है। हालांकि, स्थानीय लोगों और JAAC समर्थकों ने इन आधिकारिक आंकड़ों को खारिज करते हुए दावा किया है कि मरने वाले आम नागरिकों की संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है।
PoK में क्यों भड़का है लोगों का गुस्सा?
इस ताजा विरोध प्रदर्शन की मुख्य वजह 45 सदस्यों वाली विधानसभा में उन शरणार्थियों के लिए 12 सीटें आरक्षित करने का फैसला है, जो कश्मीर से बाहर पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में रहते हैं। JAAC का तर्क है कि यह फैसला स्थानीय प्रतिनिधित्व को कमजोर करता है और उसने इस व्यवस्था को तुरंत रद्द करने की मांग की है।
इसके अलावा भी कई ऐसे मुद्दे हैं जिन पर पिछले दो सालों से लोग लगातार अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं:
महंगाई और बेरोजगारी: आटे की बढ़ती कीमतों, बिजली की किल्लत और बेरोजगारी से आम लोग त्रस्त हैं।
राजनीतिक उपेक्षा: इलाके में खराब गवर्नेंस और राजनीतिक तौर पर हाशिए पर धकेलने का आरोप।
ताजा मामले में JAAC पर बैन, इंटरनेट सेवाओं पर रोक और संगठन के एक नेता की हत्या ने आग में घी का काम किया है।
मानवाधिकार आयोग और JAAC की कड़ी प्रतिक्रिया
पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (HRCP) ने इस हिंसा पर गहरी चिंता जताई है और आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत JAAC को बैन करने के फैसले पर सवाल खड़े किए हैं। आयोग ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का सम्मान होना चाहिए और लोगों की शिकायतों को पारदर्शी तरीके से सुलझाया जाना चाहिए। HRCP ने हालात का जायजा लेने के लिए एक फैक्ट-फाइंडिंग टीम भेजने का भी ऐलान किया है।
दूसरी ओर, JAAC के नेता बैन के बावजूद अपना आंदोलन जारी रखने पर अड़े हैं। संगठन के नेता शौकत नवाज मीर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो संदेश जारी करते हुए कहा, "सरकार ने रावलकोट में हमारे लोगों का नरसंहार शुरू कर दिया है।"
3 बड़े देशों ने जारी की ट्रैवल एडवाइजरी
PoK में बिगड़ते सुरक्षा हालातों ने अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान खींचना शुरू कर दिया है। इसे देखते हुए ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा ने अपनी ट्रैवल एडवाइजरी अपडेट कर दी है। इन देशों ने अपने नागरिकों को सड़क बंद होने, भारी सुरक्षा तैनाती और संचार सेवाओं के ठप होने की चेतावनी दी है। विदेशी नागरिकों से प्रदर्शनों वाले इलाकों से दूर रहने और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है।
आपको बता दें कि 27 जुलाई को होने वाले चुनावों से पहले पूरे इलाके में सुरक्षा बेहद कड़ी कर दी गई है। कई इलाकों में मोबाइल इंटरनेट ठप है, भीड़ इकट्ठा होने पर रोक लगा दी गई है और कथित तौर पर JAAC के केंद्रीय कार्यालय को भी सील कर दिया गया है।
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