Explainer: PoK में बगावत से घुटनों पर शरीफ सरकार, क्या हैं वो 38 मांगें जिनकी वजह से इतना बवाल

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भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में जारी प्रदर्शनों को इस्लामाबाद के दशकों लंबे शोषण और दमन का प्रत्यक्ष परिणाम बताया है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराने की अपील भी की है।

POK protest JAAC 38 demands Charter

पाकिस्तान की काली करतूतें एक बार फिर पूरी दुनिया के सामने आ गई हैं। इस बार मामला पीओके का है। पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर में लंबे समय से लोगों के दमन और अत्याचार का जीता जागता प्रमाण है वहां बीते एक महीने से जारी विरोध प्रदर्शन। बरसों से प्रताड़ना झेल रहे लोगों का गुस्सा अब आंदोलन में बदल चुका है और पाकिस्तानी हुकूमत घुटनों पर है। इस आंदोलन को दबाने के लिए कई हथकंडे अपनाने के बाद भी लोग अब चुप बैठने को तैयार नहीं हैं। हालात यह हैं कि प्रदर्शनों की अगुवाई कर रहे लोगों ने भारत से मदद की गुहार लगा रहे हैं। इन सब के बीच सवाल यह है पीओके के लोग आखिर ऐसी क्या मांग कर रहे हैं जो शहबाज शरीफ की सरकार पूरा नहीं कर सकती?

पीओके में आंदोलन की आवाज के पीछे है 38 मांगों वाला एक चार्टर। इस 38 सूत्रीय 'चार्टर ऑफ डिमांड्स' ने ही पाकिस्तान हुकूमत की नींद उड़ा दी है। संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेतृत्व में हो रहा यह आंदोलन ना सिर्फ रोटी-कपड़े की लड़ाई है, बल्कि यह सीधे तौर पर पाकिस्तानी हुकूमत के खिलाफ एक बड़ा विद्रोह है। जानिए ये मांगें हैं क्या।

1. बिजली का हक और संसाधनों पर नियंत्रण

स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर गुस्सा है कि उनके प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल पाकिस्तान हमेशा से करता है, लेकिन यहां के लोगों को उसका लाभ नहीं मिलता। लोग चाहते हैं कि PoK की जलविद्युत परियोजनाओं से पैदा होने वाली बिजली उन्हें उसी दर पर मिले, जितने में वह बनती है। मंगला बांध जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स से मिलने वाली रॉयल्टी सीधे इसी क्षेत्र को दी जाए। इसके अलावा, बिजली के बिलों में लगने वाले एक्स्ट्रा टैक्स, फ्यूल एडजस्टमेंट और मनमाने सरचार्ज को तुरंत खत्म किया जाए और बिना बताए होने वाली लोड शेडिंग बंद हो। इसके अलावा आटे और दाल जैसी बुनियादें जरूरत की चीजों के दाम कम करने की मांग की जा रही है।

2. पाकिस्तान का राजनीतिक दखल बंद हो

राजनीतिक अधिकारों को लेकर भी जनता में गहरा आक्रोश है। लोग PoK विधानसभा में क्षेत्र से 12 सीटें आरक्षित करने के नियम को खत्म करने की मांग कर रहे हैं। बता दें कि पीओजेके विधानसभा में कुल 53 सीट हैं, जिनमें 45 सीट पर प्रत्यक्ष चुनाव होते हैं और आठ सीट पर सदस्य मनोनीत होते हैं। निर्वाचित 45 सीट में से 12 सीट पाकिस्तान में बसे जम्मू कश्मीर के शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं। इनमें छह सीट कश्मीर घाटी के शरणार्थियों और छह जम्मू क्षेत्र के शरणार्थियों के लिए हैं। जेएएसी का कहना है कि ये 12 सीट पीओजेके में बसे शरणार्थियों को विधानसभा में पहुंच देता है और इसके जरिए पाकिस्तानी सरकार सिर्फ अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रही हैं।

3. वीआईपी कल्चर और भ्रष्टाचार पर लगाम

चार्टर में सरकारी पैसे की बर्बादी और मंत्रियों-अधिकारियों की अय्याशी पर रोक लगाने की मांग की गई है। मांग है कि मंत्रियों की संख्या सीमित की जाए और सरकारी अफसरों को मिलने वाली आलीशान व लग्जरी सुविधाएं तुरंत बंद हों। इसके अलावा पिछले 10 सालों में सरकार ने जो भी खर्च किए हैं, उसकी किसी स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि भ्रष्टाचार सामने आ सके।

4. अस्पतालों में आधुनिक सुविधाएं और शिक्षा में सुधार

लोग यहां बुनियादी जरूरतों के लिए भी मोहताज हैं। स्वास्थ्य और शिक्षा की बदहाली को दूर करने के लिए ठोस मांगें रखी गई हैं। ग्रामीण इलाकों के अस्पतालों में डॉक्टरों की तैनाती और मुफ्त स्वास्थ्य कार्ड लागू करने की मांग की गई है। वहीं नए शिक्षा बोर्ड और तकनीकी संस्थान भी खोले जाने की मांग है।

5. कार्यकर्ताओं की रिहाई की मांग

आंदोलन के दौरान पाकिस्तान ने बर्बरता की सीमाएं लांघ दीं। पाक पुलिस ने निहत्थे लोगों पर गोलियां चलाईं। इस दौरान दर्जनों लोगों की मौत हो गई है। वहीं सैकड़ों लोगों को हिरासत में ले लिया गया है। अब JAAC ने प्रदर्शनकारियों पर दर्ज किए गए आतंकवाद के मुकदमों को तुरंत वापस लेने, गिरफ्तार कार्यकर्ताओं को रिहा करने और पुलिस की बर्बरता की न्यायिक जांच करने की मांग की है।

फिलहाल पाकिस्तानी सरकार पर दबाव लगातार गहराता जा रहा है। सूत्रों ने जमीनी जानकारी का हवाला देते हुए पीटीआई भाषा को बताया है कि पाकिस्तान सरकार को दिया गया अल्टीमेटम खत्म होने के बाद बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक अगर संगठन की मांगें पूरी नहीं होती हैं तो 15 जुलाई को अलग-अलग जिलों से आने वाले काफिले मुजफ्फराबाद में जमा हो सकते हैं। इससे आंदोलन की आग और भड़कने की संभावना है। सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक स्थिति बिगड़ने से पीओजेके में राजनीतिक अस्थिरता को और बढ़ा सकती है और पाकिस्तान को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी दबाव झेलना पड़ सकता है।

भारत से मांगी मदद

इस बीच पीओके के आंदोलनकारी नेता भारत से मदद मांग रहे हैं। बीते सप्ताह रावलकोट में रैली संबोधित करते हुए जेएएसी के नेता सरदार अमान खान ने भारत से मानवीय सहायता की अपील की। उन्होंने कहा कि पीओके के लोगों के पास खाने तक की कमी हो गई है। खान ने कहा, “हमें भारत की मदद की जरूरत है। यहां राशन की किल्लत है... और हमें आपकी मदद चाहिए।” इसके साथ ही उन्होंने नियंत्रण रेखा (एलओसी) के दूसरी तरफ पुंछ, मेंढर, राजौरी और डोडा के लोगों से पीओके के प्रदर्शनकारियों का समर्थन करने की भी अपील की। उन्होंने नियंत्रण रेखा खोलने की मांग करते हुए कहा कि सीमा पार आवाजाही आसान होने से मानवीय स्थिति को सुधारने और आवश्यक वस्तुओं तक पहुंच बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। JAAC नेता के भाषण का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था।

क्या बोला भारत?

इस बीच भारत ने कहा है कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में चल रहे विरोध प्रदर्शन पाकिस्तान द्वारा उसके अवैध कब्जे वाले क्षेत्रों में दशकों से किए जा रहे शोषण, मौलिक अधिकारों के हनन और उत्पीड़न का नतीजा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को एक प्रेस ब्रीफिंग में सवालों के जवाब में कहा कि पाकिस्तान दशकों से स्थानीय आबादी का शोषण और मौलिक अधिकारों का हनन कर रहा है।

उन्होंने कहा , "पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में चल रहे विरोध प्रदर्शन, पाकिस्तान द्वारा अपने अवैध और जबरन कब्जे वाले क्षेत्रों में दशकों से चले आ रहे शोषण ,मौलिक अधिकारों के हनन और उत्पीड़न का सीधा परिणाम है। स्थानीय आबादी की जायज शिकायतों का समाधान करने के बजाय, पाकिस्तानी प्रशासन ने पुलिस क्रूरता का सहारा लिया है। इसमें असहाय महिलाओं और बच्चों के खिलाफ की गई कार्रवाई, भोजन और दवाओं जैसी आवश्यक चीजों को रोकना, इंटरनेट ब्लैकआउट लागू करना और निहत्थे नागरिकों के खिलाफ बल का प्रयोग करना शामिल है। कई लोगों की मौतें हुई हैं। हम उम्मीद करते हैं कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से लेकर पाकिस्तान को पूरी तरह से जवाबदेह ठहराएगा।"

Jagriti Kumari

लेखक के बारे में

Jagriti Kumari

जागृति को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 2 साल पहले लाइव हिन्दुस्तान के साथ करियर की शुरुआत हुई। उससे पहले डिग्री-डिप्लोमा सब जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में। भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और संत जेवियर्स कॉलेज रांची से स्नातक के बाद से खबरें लिखने का सिलसिला जारी। खबरों को इस तरह से बताना जैसे कोई बेहद दिलचस्प किस्सा, जागृति की खासियत है। अंतर्राष्ट्रीय संबंध और अर्थव्यवस्था की खबरों में गहरी रुचि। लाइव हिन्दुस्तान में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शानदार कवरेज के लिए इंस्टा अवॉर्ड जीता और अब बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर रोजाना कुछ नया सीखने की ललक के साथ आगे बढ़ रही हैं। इसके अलावा सिनेमा को समझने की जिज्ञासा है।

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