5 महीने पहले ही बना ली थी योजना, अमेरिका ने वेनेजुएला पर क्यों किया हमला; जानें असली मकसद
सूत्रों ने बताया, सीआईए की ओर से पुख्ता जानकारियां मिलने और डेल्टा फोर्स की तैयारियां पूरी कर लेने की पुष्टि के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने अभियान को मंजूरी दी। बताया गया कि चार दिन पहले ही इस अभियान को स्वीकृत किया गया था।
Why US strikes on Venezuela: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार सुबह 04:21 बजे ट्रुथ सोशल प्लेटफार्म पर एक मैसेज जारी किया, ‘वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी को पकड़ने के लिए साहसी मिशन को अंजाम दिया गया है।’ इस संदेश ने पूरी दुनिया को चौंका दिया। दुनिया के लिए भले ही यह कार्रवाई अचानक उठाया गया कदम था, लेकिन सूत्र बताते हैं कि अमेरिका ने करीब पांच माह पहले ही ‘ऑपरेशन एब्सॉल्यूट रिजॉल्व’ शुरू कर दिया था।
शनिवार को अमेरिकी डेल्टा फोर्स ने कुछ ही मिनटों में मादुरो को हिरासत में लिया तो इसकी एक बड़ी वजह महीनों की तैयारी ही थी। खुफिया एजेंसी सीआईए से लेकर डेल्टा फोर्स के चयनित जवानों तक ने अगस्त 2025 से एक-एक कदम का अभ्यास किया था।

सूत्रों ने बताया, सीआईए की ओर से पुख्ता जानकारियां मिलने और डेल्टा फोर्स की तैयारियां पूरी कर लेने की पुष्टि के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने अभियान को मंजूरी दी। बताया गया कि चार दिन पहले ही इस अभियान को स्वीकृत किया गया था। हालांकि, बेहतर मौसम के इंतजार में इसे शनिवार तक टाला गया। ट्रंप ने कहा, सेफ हाउस में रह रहे मादुरो ने स्टील के भारी दरवाजे के पीछे बने गुप्त कमरे में छिपने की कोशिश की थी पर सेना ने इसे नाकाम कर दिया।
कोर कमेटी बनी
सूत्रों के अनुसार, ट्रंप के वरिष्ठ सहयोगी स्टीफन मिलर, विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और सीआईए निदेशक जॉन रेडक्लिफ ने एक कोर टीम बनाई। यह टीम रोजाना अपडेट लेती और नियमित जानकारी राष्ट्रपति को दे रही थी।
मादुरो के नजदीक पहुंचे
सूत्रों के अनुसार, अगस्त 2025 से ही सीआईए ने मादुरो के बारे में सूचना जुटानी शुरू कर दी थीं। सीआईए टीम ने मादुरो के बिल्कुल नजदीक तक अपना एक एजेंट पहुंचाया। यह मादुरो की हर गतिविधि पर नजर रखे हुए था।
सेफ हाउस की नकल
सीआईए से मिले इनपुट के आधार पर डेल्टा फोर्स ने मादुरो के सेफ हाउस की हूबहू नकल तैयार की। इसके बाद जवानों ने इस सेफ हाउस में घुसने व मादुरो को हिरासत में लेने का कई बार, कई तरीके से अभ्यास किया।
अभियान के लिए पेंटागन ने कैरेबियन में सेना का एक बड़ा सैन्य जमावड़ा किया। एक विमानवाहक पोत, 11 युद्धपोत और एक दर्जन से अधिक एफ-35 विमान भेजे गए। कुल मिलाकर 15,000 से अधिक सैनिक इस क्षेत्र में भेजे गए थे, ताकि किसी भी स्थिति से निपटा जा सके। शनिवार को अभियान शुरू हुआ तो काराकस पहुंची डेल्टा फोर्स के साथ संघीय जांच एजेंसी एफबीआई की टीमें भी थीं। अभियान के दौरान एजेंट मादुरो की सटीक लोकेशन भेजता रहा।
अमेरिका ने क्यों किया हमला?
वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले के कारणों और तौर-तरीकों से राजनयिक विशेषज्ञ सहमत नही हैं। उनका मानना है कि अमेरिका की यह कार्रवाई न सिर्फ अंतरराष्ट्रीय कानूनों के विरुद्ध है बल्कि इसके पीछे असल मंशा वहां अमेरिका की मनपसंद सरकार गठित करना है। पूर्व राजदूत अशोक सज्जनहार के अनुसार, अमेरिका यह आरोप लगाता रहा है कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की मिलीभगत से ड्रग का कारोबार फैलाया जा रहा है, जो अमेरिका की सुरक्षा के लिए खतरा है। इसके चलते अमेरिका पिछले कुछ समय से वेनेजुएला के तटीय इलाकों में हमले कर रहा था। इसमें सौ से अधिक लोग मारे भी जा चुके हैं। उसने कई पोत और ऑयल टैंकर भी जब्त किए हैं।
आरोप है कि तेल कारोबार के पैसे को ड्रग कारोबार में इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में अमेरिका ने कोई ठोस सुबूत सामने नहीं रखे। इसलिए सिर्फ ड्रग कारोबार की वजह से यह हमला हुआ नहीं लगता है। दरअसल, अमेरिका संपूर्ण महाद्वीप में अपना वर्चस्व स्थापित करना चाहता है। दिसंबर में उसने जो अपनी नई सुरक्षा रणनीति जारी की है, उसमें यह परिलक्षित भी होता है। ऐसे में यह जरूर है कि मादुरो अमेरिका की अनदेखी कर रहे थे और चीन-रूस के साथ नजदीकियां बढ़ा रहे थे। अमेरिका के लिए यह चिंताजनक स्थिति थी। वह चीन-रूस का दखल वहां नहीं चाहता।
वेनेजुएला से अमेरिकी सीमा में बड़ी घुसपैठ होती है, इसलिए ट्रंप के लिए यह जरूरी हो गया था कि वह मादुरो को सत्ता से बेदखल करें। आखिरकार उन्होंने यही किया। सज्जनहार ने कहा कि जिस प्रकार से वेनेजुएला पर बिना किसी ठोस प्रमाण के हमले किए और एक देश के राष्ट्रपति एवं उनकी पत्नी को गिरफ्तार किया गया, इसकी इजाजत अंतरराष्ट्रीय कानून नहीं देते हैं। किसी राष्ट्र की संप्रभुता पर चोट करने की अनुमति किसी देश को नहीं है, इसलिए, अब मामला यूएन में जाएगा।
वैश्विक राजनीति पर बुरे प्रभाव देखने को मिलेंगे
जेएनयू में एसोसिएट प्रोफेसर और विदेश मामलों के जानकार अमित सिंह ने कहा, इस हमले के विश्व राजनीति पर बुरे प्रभाव होंगे। दरअसल, इसके जरिये राष्ट्रपति ट्रंप लैटिन अमेरिका पर वर्चस्व कायम करना चाहते हैं। वह विश्व को संदेश दे रहे हैं कि अमेरिका की चौधराहट ही चलेगी पर इससे ट्रंप की खुद की इमेज गिरी है। वे तमाम युद्ध रुकवाने का दावा कर रहे थे पर खुद उन्होंने एक देश की संप्रभुता का सम्मान नहीं किया।
(एजेंसी इनपुट के साथ)

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Himanshu Jhaलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




