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फिल्म धुरंधर पर दो फाड़ हुए पाकिस्तानी, कोर्ट पहुंची भुट्टो की पार्टी; रहमान डकैत से क्या कनेक्शन?

फिल्म धुरंधर पर दो फाड़ हुए पाकिस्तानी, कोर्ट पहुंची भुट्टो की पार्टी; रहमान डकैत से क्या कनेक्शन?

संक्षेप:

भारतीय फिल्म 'धुरंधर' ने पाकिस्तान में विवाद खड़ा कर दिया है। PPP ने फिल्म के खिलाफ कोर्ट में आपत्ति जताई है, आरोप है कि यह पार्टी को एक गैंगस्टर से जोड़कर बदनाम कर रही है। जानें इस राजनीतिक हलचल के पीछे की सच्चाई।

Dec 13, 2025 10:31 am ISTAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, कराची
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भारतीय फिल्म 'धुरंधर' ने रिलीज के बाद न सिर्फ बॉलीवुड में धूम मचाई है, बल्कि पड़ोसी पाकिस्तान में भी राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। रणवीर सिंह, अक्षय खन्ना और संजय दत्त अभिनीत इस स्पाई थ्रिलर पर पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कोर्ट में केस दायर किया है। पार्टी का आरोप है कि फिल्म ने PPP को एक कुख्यात गैंगस्टर रहमान डकैत से जोड़कर बदनाम करने की कोशिश की है। फिल्म में रहमान डकैत के किरदार को PPP के समर्थन वाला दिखाया गया है। हालांकि जहां एक ओर पाकिस्तानी राजनीतिक दल ने फिल्म का विरोध किया है तो वहीं बड़ी संख्या में पाकिस्तानी फिल्म की जमकर तारीफ कर रहे हैं। उनका कहना है कि पहली बार किसी भारतीय फिल्म ने पाकिस्तान के एक मोहल्ले की असली सच्चाई को इतनी बखूबी से पेश किया है। आइए, इस पूरे विवाद को विस्तार से समझते हैं।

फिल्म 'धुरंधर' की कहानी और विवाद का केंद्र

आदित्य धर द्वारा निर्देशित फिल्म 'धुरंधर' 5 दिसंबर को भारत में रिलीज हुई। फिल्म भारत की खुफिया एजेंसी RAW के एक एजेंट (रणवीर सिंह) की कहानी है, जो पाकिस्तान के कराची शहर के ल्यारी इलाके में घुसकर आतंकी नेटवर्क को नेस्तनाबूद करने का मिशन लेता है। फिल्म में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद, गैंगवार और ISI के काले कारनामों को निशाना बनाया गया है।

फिल्म का सबसे विवादास्पद हिस्सा है अक्षय खन्ना का किरदार 'रहमान डकैत'। यह असली गैंगस्टर अब्दुल रहमान बलोच उर्फ रहमान डकैत पर आधारित है, जो 2000 के दशक में ल्यारी का 'राजा' था। फिल्म में इसे PPP का समर्थक और बेनजीर भुट्टो का करीबी दिखाया गया है। एक सीन में रहमान डकैत के ठिकाने पर PPP के पोस्टर लगे दिखते हैं, जिनमें बेनजीर भुट्टो की तस्वीर है। इससे पाकिस्तानी नेताओं में रोष फैल गया।

पाकिस्तान में फिल्म की रिलीज तो नहीं हुई, लेकिन सोशल मीडिया, पाइरेटेड वर्जन और ट्रेलर के जरिए यह वायरल हो गई। हालांकि कई पाकिस्तानी यूजर्स ने इस फिल्म को 'सच का आईना' बताया है। दूसरे देशों में फिल्म देखकर पाकिस्तानी भी इसकी जमकर तारीफ कर रहे हैं। इससे पाकिस्तानी ही दो फाड़ दिख रहे हैं।

PPP का कोर्ट केस: पार्टी की इमेज खराब की

‘धुरंधर’ के निर्देशक, निर्माता, कलाकारों और अन्य क्रू सदस्यों के खिलाफ पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) को बदनाम करने के आरोप में कराची की एक जिला अदालत में शुक्रवार को आवेदन दायर किया गया। पार्टी के वकील ने याचिका में कहा- फिल्म ने PPP को एक अपराधी सिंडिकेट से जोड़कर पाकिस्तानी राजनीति को बदनाम किया है। रहमान डकैत जैसे गैंगस्टर को हमारी पार्टी का समर्थक दिखाना ऐतिहासिक तथ्यों का अपमान है।

याचिका में मांग की गई है कि फिल्म के ट्रेलर और प्रचार सामग्री में PPP के कथित गलत चित्रण को लेकर संबंधित लोगों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाए। यह आवेदन PPP के कार्यकर्ता मोहम्मद आमिर की ओर से जिला एवं सत्र न्यायालय (साउथ) कराची में दायर किया गया। याचिका पाकिस्तान दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 22-A और 22-B के तहत दाखिल की गई है। इसमें फिल्म धुरंधर के निर्देशक, निर्माता, अभिनेता और अन्य क्रू सदस्यों को प्रस्तावित आरोपी जबकि संबंधित पुलिस अधिकारियों को प्रतिवादी बनाया गया है। बता दें कि बिलावल भुट्टो जरदारी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के वर्तमान अध्यक्ष है। वे पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत बेनजीर भुट्टो और आसिफ अली जरदारी के एकलौते पुत्र है।

'PPP को आतंकवाद के प्रति सहानुभूति रखने वाली पार्टी बताया'

आवेदक ने अदालत को बताया कि वह 10 दिसंबर को दरख्शां थाना क्षेत्र के अंतर्गत एक कैफे में मौजूद था, जहां उसने सोशल मीडिया पर फिल्म का आधिकारिक ट्रेलर और प्रचार सामग्री देखी। उसके अनुसार, फिल्म के ट्रेलर में PPP को आतंकवाद के प्रति सहानुभूति रखने वाली पार्टी के रूप में दिखाया गया है, जो पूरी तरह झूठा और मनगढ़ंत है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि फिल्म में कराची के इलाके ल्यारी को आतंकवादी युद्ध क्षेत्र के रूप में दर्शाया गया है, जो भड़काऊ, भ्रामक और पाकिस्तान तथा उसके नागरिकों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला है। आवेदक के मुताबिक, फिल्म में दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री और PPP की पूर्व अध्यक्ष बेनजीर भुट्टो की तस्वीरों, पार्टी के झंडे और रैली के दृश्यों का बिना किसी कानूनी अनुमति के इस्तेमाल किया गया है।

मोहम्मद आमिर ने दलील दी कि फिल्म में PPP और उसके नेतृत्व को आतंकवाद से जोड़कर दिखाने का उद्देश्य पार्टी, उसके नेताओं और समर्थकों के खिलाफ नफरत और दुश्मनी पैदा करना है। उन्होंने कहा कि यह सामग्री न केवल अपमानजनक है बल्कि समाज में अशांति फैलाने का कारण भी बन सकती है। याचिका में यह भी कहा गया है कि इस कथित सामग्री के कारण आवेदक को मानसिक पीड़ा, तनाव और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है, जो दरख्शां थाना क्षेत्र के अधिकार क्षेत्र में आता है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में SHO को लिखित शिकायत भी दी गई थी, लेकिन पुलिस ने FIR दर्ज नहीं की। आवेदक ने अदालत से आग्रह किया है कि वह SHO को FIR दर्ज करने का निर्देश दे और मामले की जांच की निगरानी सीनियर सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (SSP) साउथ द्वारा कराई जाए। अदालत ने मामले पर प्रारंभिक सुनवाई के बाद अगली कार्रवाई के लिए सुनवाई की तारीख तय कर दी है।

रहमान डकैत से PPP का कनेक्शन: सियासत और अपराध का घालमेल

रहमान डकैत (असली नाम: सरदार अब्दुल रहमान बलोच) का जन्म 1970 के दशक में कराची के ल्यारी में हुआ। ल्यारी, जो कभी मजदूरों की बस्ती था, वह 1990 के दशक में गैंगवार का केंद्र बन गया। यहां ड्रग्स, हथियार तस्करी, उगाही और अपहरण का कारोबार फल-फूल रहा था। रहमान ने 1995 के आसपास अपराध की दुनिया में कदम रखा और जल्द ही 'पीपुल्स अमन कमेटी' (PAC) का सरगना बन गया। PAC ल्यारी में 'शांति' का बहाना बनाकर अपराध करती थी।

PPP से कनेक्शन: ल्यारी PPP का मजबूत गढ़ रहा है। 1988 से यह इलाका पार्टी का वोट बैंक था। रहमान को PPP ने वोट संरक्षक बनाया। बदले में, पार्टी ने PAC को राजनीतिक संरक्षण दिया। 2007-08 के मुशर्रफ विरोधी आंदोलन में रहमान की भूमिका थी। सबसे चौंकाने वाला प्रसंग: 18 अक्टूबर 2007 को कराची में बेनजीर भुट्टो की रैली पर बम धमाके में 139 लोग मारे गए। ऐसा कहा जाता है कि रहमान ने ही बेनजीर को अपनी बुलेटप्रूफ गाड़ी में बिठाकर बिलावल हाउस पहुंचाया। आसिफ अली जरदारी (बेनजीर के पति) के साथ भी उसके करीबी रिश्ते थे।

लेकिन यह गठजोड़ टूटा। 2009 में पुलिस एनकाउंटर में रहमान मारा गया। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि PPP ने ही उसे 'धोखा' दिया, क्योंकि वह पार्टी के लिए 'लाइबिलिटी' बन गया था। रहमान की मौत के बाद PAC का उजैर बलोच (उसका चचेरा भाई) कमांडर बना, लेकिन 2014 में गिरफ्तार हो गया। फिल्म 'धुरंधर' इसी कनेक्शन को हाइलाइट करती है, जहां रहमान को PPP के पोस्टरों के बीच दिखाया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि यह ऐतिहासिक तथ्य पर आधारित है, लेकिन PPP इसे 'फिक्शन' बताकर बचना चाहती है।

पाकिस्तान में अन्य विवाद: चौधरी असलम की पत्नी की आपत्ति

PPP के अलावा, पाकिस्तानी पुलिस अधिकारी चौधरी असलम की पत्नी नूरीन ने भी फिल्म पर लीगल एक्शन की चेतावनी दी। संजय दत्त ने असलम का किरदार निभाया है, जो ल्यारी में गैंग्स के खिलाफ ऑपरेशन चला रहे थे। 2014 में असलम की हत्या हो गई। नूरीन ने कहा- फिल्म में 'जिन्न और शैतान की औलाद' जैसे डायलॉग असलम को अपमानित करते हैं। हम कोर्ट जाएंगे।

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फिल्म ने पाकिस्तान में राजनीतिक और सामाजिक विमर्श को प्रभावित किया है।

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PPP का कोर्ट में जाना दर्शाता है कि फिल्म के राजनीतिक प्रभाव को लेकर गंभीर चिंताएं हैं।

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फिल्म के प्रति पाकिस्तान में मिली-जुली प्रतिक्रियाएं हैं, जो फिल्म की प्रस्तुति और संदेश पर सवाल उठाती हैं।

Amit Kumar

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अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।

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