नोबेल ना हुआ चिप्स का पैकेट हो गया, अब पाकिस्तान को भी चाहिए शांति पुरस्कार; किसने कर दी मांग?

Apr 09, 2026 01:19 pm ISTJagriti Kumari लाइव हिन्दुस्तान
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इससे पहले ख्वाजा आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान को अब क्षेत्र में और वैश्विक स्तर पर एक भरोसेमंद मध्यस्थ के रूप में मान्यता मिल रही है। उन्होंने कहा कि अरब देशों और ईरान और अमेरिका ने भी पाकिस्तान में भरोसा दिखाया।

नोबेल ना हुआ चिप्स का पैकेट हो गया, अब पाकिस्तान को भी चाहिए शांति पुरस्कार; किसने कर दी मांग?

ईरान और अमेरिका के बीच हुई हालिया जंग को रुकवाने का क्रेडिट लेने की कोशिश कर रहे पाकिस्तान की तरफ से अब एक ऐसी मांग आई है, जिसे सुनकर आप भी अपनी हंसी नहीं रोक पाएंगे। सीजफायर होने के अगले दिन ही भले ही इसके टूटने का खतरा मंडरा रहा है, लेकिन पाकिस्तान में इस सीजफायर के लिए नोबेल शांति पुरस्कार की मांग उठी है। यह मांग पाकिस्तान की मीडिया और वहां की कुछ संस्थाओं ने उठाई है, जिसका मजाक बनना तय माना जा रहा है।

बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर की घोषणा की थी। ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान ने 10 बिंदुओं का प्रस्ताव दिया है, जो बातचीत के लिए एक मजबूत आधार बन सकता है और उम्मीद जताई कि दो हफ्तों के भीतर कोई अंतिम समझौता हो सकता है। अब कराची चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री और पाकिस्तानी मीडिया के अलग-अलग वर्टिकल ने बुधवार को प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को नोबेल शांति पुरस्कार देने की बात कही है।

किसने मांगा नोबेल?

हुआ कुछ यूं कि इस ऐलान में ट्रंप ने शहबाज शरीफ और मुनीर का भी नाम ले लिया। फिर क्या था पाकिस्तानी मीडिया उछलने लगी। पाकिस्तानी मीडिया ने बीते कई दिनों से यह मुद्दा उठाया है कि इस युद्धविराम में पाकिस्तान की मध्यस्थता अहम रही है और इसके लिए शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर को नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए।

‘द नेशन’ में प्रकाशित एक लेख में रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल सैयद अहमद नदीम कादरी ने लिखा कि पाकिस्तान ने संभावित बड़े युद्ध को रोका, अमेरिका और ईरान के बीच भरोसेमंद मध्यस्थ की भूमिका निभाई, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और बाजारों को स्थिर करने में मदद की और सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीति को बढ़ावा दिया। उन्होंने कहा कि ये सभी पहलू नोबेल शांति पुरस्कार की मूल भावना के अनुरूप हैं। वहीं कराची चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री, KCCI ने भी बयान जारी कर कहा कि यह सीजफायर प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर के प्रयासों से संभव हुआ।

पाकिस्तान के बस की बात ही नहीं

पाकिस्तान भले ही सीजफायर का दावा कर रहा हो, लेकिन यह साफ है कि इसके पीछे बड़ा झोल है। रिपोर्ट्स में इस बात की पुष्टि हुई है कि पाकिस्तान यह सब कुछ अमेरिका के इशारों पर कर रहा है और शहबाज और मुनीर अमेरिका की कठपुतली मात्र हैं। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री का ‘ड्राफ्ट वाला ट्वीट’ भी वायरल हो रहा है, जिसे कथित तौर पर अमेरिका से भेजा गया था। ऐसे में पाक की क्रेडिबिटी पर सवाल उठने तय हैं।

ईरान को चीन ने मनाया

ईरान को सीजफायर के लिए मनाने में चीन ने असली भूमिका निभाई। इसकी पुष्टि खुद ट्रंप ने की थी। ट्रंप ने बुधवार को कहा कि उन्हें लगता है कि चीन ने ईरान को बातचीत के लिए राजी किया और सीजफायर कराने में अहम भूमिका निभाई। यह बयान उस समय आया जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या बीजिंग ने तेहरान को समझौते के लिए तैयार किया था। ट्रंप ने कहा, “मैंने भी यही सुना है।” ईरानी अधिकारियों ने भी बाद में न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि चीन ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए ईरान पर दबाव डाला कि वह अमेरिका के साथ सीजफायर स्वीकार करे। चीन ने ईरान से लचीलापन दिखाने और तनाव कम करने को कहा था।

Jagriti Kumari

लेखक के बारे में

Jagriti Kumari

जागृति को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 2 साल पहले लाइव हिन्दुस्तान के साथ करियर की शुरुआत हुई। उससे पहले डिग्री-डिप्लोमा सब जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में। भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और संत जेवियर्स कॉलेज रांची से स्नातक के बाद से खबरें लिखने का सिलसिला जारी। खबरों को इस तरह से बताना जैसे कोई बेहद दिलचस्प किस्सा, जागृति की खासियत है। अंतर्राष्ट्रीय संबंध और अर्थव्यवस्था की खबरों में गहरी रुचि। लाइव हिन्दुस्तान में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शानदार कवरेज के लिए इंस्टा अवॉर्ड जीता और अब बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर रोजाना कुछ नया सीखने की ललक के साथ आगे बढ़ रही हैं। इसके अलावा सिनेमा को समझने की जिज्ञासा है।

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