जंग रुकवाने चला था पाकिस्तान, खुद ही उलझा; ईरान के दोस्त पर अब बम गिराने को क्यों बेकरार?
पाक रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने चेतावनी दी कि अगर यमन का संघर्ष सऊदी इलाके में यूं ही जारी रहा, तो समझौते की सामूहिक रक्षा वाली शर्त लागू हो सकती है। सूत्र ने बताया कि पाक हमलों प्राथमिकताओं में से एक सादाह और अन्य इलाकों से हूती विद्रोहियों को खदेड़ना होगा।

ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने बुधवार (9 सितंबर) को कहा कि सऊदी अरब ने यमन के कई हिस्सों में 30 से अधिक हवाई हमले किए हैं। यह कार्रवाई हूती लड़ाकों द्वारा एक दिन पहले सऊदी अरब पर किए गए बड़े हमलों में दर्जनों लोगों के घायल होने के बाद हुई है। दूसरी तरफ, ईरान-अमेरिका जंग को रुकवाने के लिए मध्यस्थता कर रहे पाकिस्तान भी अब इस मोर्चे पर उलझ गया है। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि मक्का समझौते यानी इस्लामिक नाटो के तहत पाकिस्तान अब ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों पर बमबारी करने को बेकरार है। इसके संकेत पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने दिए हैं।
दरअसल, पिछले महीने 7 अगस्त को सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान के बीच एक त्रिपक्षीय सुरक्षा समझौता हुआ था। इसकी मुख्य शर्तों के अनुसार, अगर इन तीनों देशों में से किसी एक पर भी सैन्य हमला होता है, तो उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। माना जा रहा है कि इसी मक्का समझौते की वजह से अब पाकिस्तान फंस गया है क्योंकि ईरान समर्थित हूतियों ने सऊदी अरब पर मंगलवार को भी जोरदार हमला बोला। दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातक सऊदी अरब पर हूतियों ने हाल के सप्ताहों में दबाव बढ़ा दिया है। जुलाई में 2022 में शुरू हुआ संघर्षविराम कमजोर पड़ने के बाद से समूह ने कई बार सऊदी तेल प्रतिष्ठानों और टैंकरों को निशाना बनाया है।
जल्द लागू होगा मक्का समझौता
इस बीच, चर्चा है कि पाकिस्तान मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट (संयुक्त रक्षा समझौता) को जल्द ही लागू कर सकता है और यमन पर हमला बोल सकता है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने चेतावनी दी कि अगर यमन का संघर्ष सऊदी इलाके में यूं ही जारी रहा, तो समझौते की सामूहिक रक्षा वाली शर्त लागू हो सकती है। बुधवार को 'तुर्की टुडे' ने एक सूत्र के हवाले से बताया कि ईरान के प्रॉक्सी हूती विद्रोहियों पर पाकिस्तान जल्द ही हवाई हमले कर सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, इन हमलों की जानकारी जल्द ही सार्वजनिक की जाएगी।
हूती विद्रोहियों को खदेड़ना मकसद
एक पाकिस्तानी सूत्र ने 'तुर्की टुडे' को बताया, "पाकिस्तानी हमलों की सैन्य प्राथमिकताओं में से एक सादाह और अन्य इलाकों से हूती विद्रोहियों को खदेड़ना होगा।" ख्वाजा आसिफ की यह टिप्पणी मंगलवार को सऊदी अरब में ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर किए गए हूती ड्रोन और मिसाइल हमले के बाद आई है, जिसमें कम से कम 73 लोग घायल हुए थे। बता दें कि तुर्की के अलावा पाकिस्तान और सऊदी अरब भी मक्का समझौते का हिस्सा हैं। इस्लामाबाद और रियाद ने 2025 में एक रणनीतिक आपसी रक्षा समझौते पर भी हस्ताक्षर किए थे, जिस पर मक्का समझौते के सिद्धांत आधारित थे।
कोई शक नहीं है
ईरान समर्थित हूती समूह, खाड़ी देश यमन में सत्ता हासिल करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। 2015 में, रियाद ने हूती विद्रोहियों को कुचलने के लिए यमन में एक असफल सैन्य हस्तक्षेप किया था, जिसके बाद से दोनों पक्षों के बीच रुक-रुक कर मिसाइल और हवाई हमले होते रहे हैं। कराची स्थित जियो न्यूज से बात करते हुए, आसिफ ने इस सवाल का सकारात्मक जवाब दिया कि क्या हालिया हूती हमलों के बाद मक्का समझौते को लागू किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इसमें कोई शक नहीं है क्योंकि समझौते में यह प्रावधान है कि किसी एक सदस्य के खिलाफ आक्रामकता की किसी भी कार्रवाई को सभी के खिलाफ हमला माना जाएगा।
हम समझौते की शर्तों और नियमों से बंधे: आसिफ
आसिफ ने जियो न्यूज से कहा, "हम इस समझौते की शर्तों और नियमों से बंधे हैं, और जरूरत पड़ने पर हम उनका पालन करेंगे।" 'जियो न्यूज़' से बात करते हुए आसिफ़ ने कहा कि अगर किसी सदस्य देश पर बिना उकसावे के हमला होता है या यमन का संघर्ष सऊदी अरब तक फैलता है, तो समझौते के तहत सामूहिक सुरक्षा के नियम लागू हो जाएंगे। इससे पहले इस्लामाबाद में पत्रकारों से बात करते हुए ख्वाजा आसिफ़ ने कहा था कि सऊदी अरब पर हूतियों का हमला पाकिस्तान पर हमला माना जाएगा।


