पाक के मंसूबों पर आखिरी घड़ी में दोस्त ईरान ने ही फेर दिया पानी; अटक गई US संग वार्ता? क्या था इस्लामाबाद का प्लान

Pramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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US-Iran Second Round Talk: पाक अधिकारियों ने कहा कि उन्हें अभी भी उम्मीद है कि वे दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर वापस लाने में सफल हो सकते हैं। इस्लामाबाद, बातचीत के दूसरे दौर की मेज़बानी की तैयारियों में जुटा हुआ है।

पाक के मंसूबों पर आखिरी घड़ी में दोस्त ईरान ने ही फेर दिया पानी; अटक गई US संग वार्ता? क्या था इस्लामाबाद का प्लान

US-Iran Second Round Talk: पड़ोसी देश पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की शांति वार्ता की तैयारियां तेज हैं। इसी सिलसिले में एक बार फिर से इस्लामाबाद को छाबनी में तब्दील कर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी गई है लेकिन इन सबके बीच ईरान ने पाकिस्तान और अमेरिका को झटका देते हुए कहा है कि तेहरान की अभी तक इस वार्ता में शामिल होने की कोई योजना नहीं है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सोमवार को कहा कि ईरान ने अभी तक अमेरिका के साथ वार्ता में शामिल होने की कोई योजना नहीं बनाई है।

बड़ी बात यह है कि यह अहम घटनाक्रम ऐसे वक्त सामने आया है, जब ईरान-अमेरिका के बीच हुआ सीजफायर समाप्त होने में 48 घंटे से भी कम समय बचा है। लगे हाथ ईरान ने बातचीत की मध्यस्थता कर रहे पाकिस्तान की कोशिशों पर भी संदेह जताया है। ईरान ने संकेत दिया है कि अमेरिका के साथ बातचीत के नए दौर के लिए इस्लामाबाद में अपने वार्ताकार भेजने की उसकी कोई योजना नहीं है। हालांकि, ईरान ने दोस्त पाकिस्तान को 10 सूत्री प्रस्ताव भेजा है। दूसरी तरफ ईरान को इस बात का भी शक है कि अमेरिका और इजरायल बातचीत में उलझाकर सरप्राइज अटैक का प्लान बना रहे हैं।

ईरान की अमेरिका-इजरायल को चेतावनी

अल जज़ीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने दूसरी तरफ चेतावनी भी दी है कि अगर अमेरिका और इजरायल ने फिर से कोई आक्रामक कार्रवाई की, तो ईरानी सेना "उसी के अनुरूप जवाब देगी। बगाई ने कहा, "अमेरिका अपने अनुभवों से कोई सबक नहीं सीख रहा है, और इसका परिणाम कभी भी अच्छा नहीं होगा।" उन्होंने बताया कि ईरान ने दोनों पक्षों के बीच मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे पाकिस्तान को इन उल्लंघनों के बारे में सूचित कर दिया है।

पाक को अभी भी उम्मीद

दूसरी तरफ, पाकिस्तानी अधिकारियों ने कहा कि उन्हें अभी भी सावधानीपूर्वक उम्मीद है कि वे दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर वापस लाने में सफल हो सकते हैं। इस्लामाबाद, अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध को समाप्त करने के उद्देश्य से होने वाली बातचीत के दूसरे दौर की मेज़बानी की तैयारियों में जुटा हुआ है। हालांकि, पाक अधिकारियों ने यह भी स्वीकार किया कि पिछले कुछ घंटों में बढ़ते तनाव के कारण बातचीत की संभावनाओं पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं।

क्या है पाकिस्तान का प्लान?

पाकिस्तान की योजनाओं से जुड़े सूत्रों ने अल जज़ीरा को बताया कि 11 अप्रैल को इस्लामाबाद में हुई बातचीत के पहले दौर से उलट इस बार पाकिस्तान का लक्ष्य अमेरिका और ईरान को कई दिनों तक बातचीत जारी रखने के लिए राज़ी करना है। यह बातचीत तब तक चलेगी, जब तक कोई अस्थायी समझौता (जिसे मध्यस्थ 'समझौता ज्ञापन' (MoU) कह रहे हैं) हस्ताक्षरित नहीं हो जाता; ऐसा होने पर संघर्ष-विराम की अवधि प्रभावी रूप से और आगे बढ़ जाएगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर इस MoU पर सहमति बन जाती है, तो इससे वार्ताकारों को एक दीर्घकालिक शांति समझौता सुनिश्चित करने के लिए अधिक समय यहाँ तक कि 60 दिनों तक का समय मिल जाएगा।

इस्लामाबाद की कोशिशों और वफादारी पर भी संदेह

हालांकि, यह सब ईरान पर निर्भर करता है, क्योंकि अब तक ईरान ने दूसरे दौर की वार्ता में शामिल होने के कोई संकेत नहीं दिए हैं। दरअसल, ईरान को अब इस्लामाबाद की वफादारी पर भी संदेह हो रहा है। उसे लग रहा है कि पाकिस्तान निष्पक्ष रहने की बजाय उसके दुश्मनों वॉशिंगटन और सऊदी अरब की तरफ झुक रहा है। और यह घटनाक्रम तब सामने आया है, जब ईरान के झंडे वाले मालवाहक जहाजों को अमेरिकी नौसेना ने जबरन जब्त कर लिया है। पिछले सप्ताह ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी शुरु होने के बाद से अमेरिकी नौसेना ने पहली बार किसी जहाज को रोका है। दूसरे दौर की वार्ता पर संशय के बादल मंडराने की यह एक तात्कालिक और बड़ी वजह भी है। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि अमेरिकी वार्ताकार ईरान के साथ एक और दौर की वार्ता के लिए सोमवार को पाकिस्तान रवाना होंगे। ट्रंप की इस घोषणा के बाद बुधवार को खत्म होने जा रहे युद्धविराम की अवधि बढ़ने की उम्मीदें पैदा हो गई थीं।

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लेखक के बारे में

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प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

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