
पाकिस्तान युद्ध की स्थिति में है... इस्लामाबाद धमाके के बाद बौखलाए रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ
संक्षेप: पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने दावा किया कि देश इस वक्त युद्ध की स्थिति में है, और इस्लामाबाद के जिला न्यायिक परिसर के पास हुए ताजा आत्मघाती बम विस्फोट को उन्होंने पूरे राष्ट्र के लिए चेतावनी करार दिया। इस दौरान उन्होंने तालिबान पर भी निशाना साधा…
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने दावा किया कि देश इस वक्त 'युद्ध की स्थिति' में है, और इस्लामाबाद के जिला न्यायिक परिसर के पास हुए ताजा 'आत्मघाती बम विस्फोट' को उन्होंने पूरे राष्ट्र के लिए 'चेतावनी' करार दिया। उन्होंने हमले की सीधी जिम्मेदारी अफगानिस्तान के शासकों पर डालते हुए कहा कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच चल रहा 'युद्ध' अब डूरंड रेखा की सीमा तक सीमित नहीं रह गया है। इस विस्फोट में कम से कम 12 लोगों की जान चली गई, हालांकि अभी तक किसी संगठन ने इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है।

आसिफ ने कहा कि इस तनावपूर्ण माहौल में काबुल के नेताओं के साथ कोई सफल बातचीत की उम्मीद करना बेकार है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा कि हम युद्ध की स्थिति में हैं। जो कोई यह मानता है कि पाकिस्तानी सेना केवल अफगान-पाक सीमा और बलूचिस्तान के दूरदराज इलाकों में यह जंग लड़ रही है, उसे इस्लामाबाद की जिला अदालतों के बाहर आज हुए आत्मघाती हमले को चेतावनी के रूप में समझना चाहिए। यह पूरे पाकिस्तान के लिए युद्ध है, जहां हमारी सेना रोजाना कुर्बानियां दे रही है और नागरिकों को सुरक्षित रखने का प्रयास कर रही है। उन्होंने आगे कहा कि काबुल के शासक पाकिस्तान में आतंकवाद को रोकने की क्षमता रखते हैं, लेकिन इस युद्ध को इस्लामाबाद तक पहुंचाना उनके लिए एक संदेश है, जिसका पाकिस्तान पूरी ताकत से जवाब दे सकता है।
पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच बढ़ते तनाव
बता दें कि अक्टूबर में पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के क्षेत्रों पर हवाई हमले किए थे, जिसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव चरम सीमा पर पहुंच गया। पाकिस्तानी अधिकारियों ने इन हमलों को टीटीपी (तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान) आतंकवादियों के खिलाफ 'कार्रवाई' बताया, जो कथित रूप से अफगानी जमीन का इस्तेमाल कर पाकिस्तान में हमले कर रहे थे। उन्होंने खुफिया सूचनाओं का हवाला देते हुए कहा कि ये आतंकी घुसपैठ की योजना बना रहे थे। वहीं, अफगान तालिबान सरकार ने इन हमलों की कड़ी निंदा की और इन्हें अपनी संप्रभुता का 'घोर उल्लंघन' करार दिया। उन्होंने इस्लामाबाद पर क्षेत्रीय स्थिरता को नुकसान पहुंचाने और सच्ची शांति की कोई मंशा न रखने का आरोप लगाया।
इन हवाई हमलों से कूटनीतिक संकट पैदा हो गया। अफगानिस्तान ने कई पाकिस्तानी राजदूतों को निष्कासित कर दिया और विरोध में अपने दूतावासों को वापस बुला लिया, जबकि पाकिस्तान ने सीमा पर अपनी सैन्य तैनाती बढ़ा दी। हिंसा के बीच 8 नवंबर को इस्तांबुल में मध्यस्थता से हुई वार्ता का लक्ष्य तनाव कम करना था, लेकिन यह बिना किसी ठोस परिणाम के असफल रही।

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