आशा भोसले का सम्मान पाक आर्मी को नहीं हुआ बर्दाश्त, चैनल को भिजवाया नोटिस; भड़के वहीं की लोग

Amit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, इस्लामाबाद
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भारतीय गायिका आशा भोसले के निधन पर भावभीनी श्रद्धांजलि प्रसारित करने के कारण पाकिस्तान के मीडिया नियामक 'पेमरा' ने जियो न्यूज को कारण बताओ नोटिस थमा दिया है। पेमरा को 'सेना की कठपुतली' कहा जा रहा है।

आशा भोसले का सम्मान पाक आर्मी को नहीं हुआ बर्दाश्त, चैनल को भिजवाया नोटिस; भड़के वहीं की लोग

हाल ही में भारतीय संगीत जगत की महान गायिका आशा भोसले का 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके जाने से पूरी दुनिया के साथ-साथ पाकिस्तान में भी उनके प्रशंसकों ने गहरा शोक व्यक्त किया। लेकिन, पाकिस्तान के प्रमुख समाचार चैनल 'जियो न्यूज' को आशा भोसले को उनके गीतों के जरिए श्रद्धांजलि देना भारी पड़ गया है। पाकिस्तान के इलेक्ट्रॉनिक मीडिया नियामक प्राधिकरण (PEMRA) ने जियो न्यूज को 'भारतीय कंटेंट' प्रसारित करने के आरोप में कारण बताओ नोटिस थमा दिया है। इस तानाशाही कदम के बाद पेमरा को पाकिस्तान के भीतर ही फजीहत का सामना करना पड़ रहा है। नोटिस के बाद सोशल मीडिया पर लोग भड़ास निकाल रहे हैं कि पाकिस्तान की सेना को आशा भोसले का सम्मान बर्दाश्त नहीं हुआ। इसीलिए अपनी कठपुतली पेमरा के जरिए न्यूज चैनल को नोटिस भिजवाया है।

क्या है पूरा मामला?

आशा भोसले के निधन की खबर के दौरान, जियो न्यूज ने उनके सम्मान में एक विशेष रिपोर्ट प्रसारित की थी। इस प्रसारण में उनके कुछ सदाबहार गीत और भारतीय फिल्मों के विजुअल्स दिखाए गए थे। पेमरा ने जियो न्यूज को नोटिस जारी करते हुए इसे 'पाकिस्तान के माननीय सर्वोच्च न्यायालय के फैसले की जानबूझकर की गई अवहेलना' करार दिया।

दरअसल, 2018 में पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने देश के टीवी चैनलों पर किसी भी प्रकार की भारतीय सामग्री (फिल्म, गाने, विज्ञापन आदि) के प्रसारण पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। इसी नियम का हवाला देते हुए यह कार्रवाई की गई है। वैसे बता दें कि PEMRA और खुद Geo News को आमतौर पर पाकिस्तान की सेना और PML-N सरकार का करीबी माना जाता है, फिर भी यह नोटिस जारी हुआ।

पेमरा के नोटिस में क्या कहा गया है?

नियामक संस्था ने अपनी कार्रवाई को सख्त बनाते हुए कई निर्देश दिए हैं। नोटिस में कहा गया है कि जियो न्यूज का यह प्रसारण पेमरा अध्यादेश, 2002 की धारा 20(f) और अन्य संबंधित नियमों का सीधा उल्लंघन है। पेमरा ने इंडिपेंडेंट मीडिया कॉरपोरेशन (जियो न्यूज) के सीईओ मीर इब्राहिम रहमान को 27 अप्रैल को पेश होने का आदेश दिया है। चैनल को 14 दिनों के भीतर लिखित स्पष्टीकरण देने को कहा गया है कि उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई (जुर्माना, निलंबन या प्रसारण लाइसेंस रद्द करना) क्यों न की जाए।

लोगों की तीखी प्रतिक्रिया- सेना की कठपुतली का आरोप

पेमरा के इस असहिष्णु कदम की पाकिस्तान के पत्रकार जगत, कलाकारों और नागरिक समाज ने कड़ी निंदा की है। सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर पेमरा को 'सेना की कठपुतली' बताते हुए कला और संस्कृति को सीमाओं में बांधने का कड़ा विरोध किया जा रहा है। जियो न्यूज के प्रबंध निदेशक और पाकिस्तान में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया संपादकों के संगठन के अध्यक्ष, अजहर अब्बास ने 'एक्स' पर लिखा- जब किसी महान कलाकार के बारे में रिपोर्टिंग की जाती है, तो उनके काम का जश्न मनाना एक आम बात है। आशा भोसले जैसी कद वाली कलाकार के लिए, हमें उनके और भी अधिक यादगार गीत शेयर करने चाहिए थे। लेकिन, पेमरा ने इसे प्रतिबंधित करने का विकल्प चुना है।

अजहर अब्बास ने कहा कि 'कला, ज्ञान की तरह मानवता की एक साझा विरासत है और इसे युद्ध या सीमा विवादों की बलि नहीं चढ़ना चाहिए। अब्बास ने भोसले के पाकिस्तान से गहरे व्यक्तिगत और पेशेवर संबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आशा भोसले महान पाकिस्तानी गायिका नूरजहां को प्यार से 'बड़ी बहन' कहती थीं और दिवंगत नुसरत फतेह अली खान के साथ उनके सहयोग का विशेष स्थान रखता है।

पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार रऊफ क्लासरा ने पेमरा के इस फैसले को तानाशाह जनरल जिया-उल-हक के क्रूर दौर यानी 1980 के दशक की वापसी बताया। उन्होंने कहा- यह नेटफ्लिक्स और एआई का युग है। इस दौर में ऐसे फैसले लेकर खुद को दुनिया के सामने मूर्ख मत बनाइए।

अहसान खान और अदनान सिद्दीकी जैसे पाकिस्तानी अभिनेताओं ने भी आशा भोसले को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि कला और संस्कृति की कोई सीमा नहीं होती, और उनकी आवाज हमेशा दिलों को जोड़ती रहेगी।

पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के सांसद शेरी रहमान ने निंदा में सुर मिलाते हुए पेमरा से अपील की कि वह अपना दृष्टिकोण न खोए और सांस्कृतिक बदलावों पर पुलिसिंग करना बंद करे।

कानूनी दबाव के बावजूद, पाकिस्तान के मीडिया जगत में यह भावना प्रबल है कि कला और कलाकार नफरत और विभाजन के खिलाफ एक महत्वपूर्ण आवाज होते हैं। आलोचकों ने चेतावनी दी है कि इस तरह के कालजयी कलाकारों को निशाना बनाकर, प्रशासन देश को एक सांस्कृतिक जेल में बदलने का जोखिम उठा रहा है, जहां करोड़ों लोगों की साझा कलात्मक विरासत को जानबूझकर मिटाया जा रहा है।

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डिजिटल पत्रकारिता की बदलती लहरों के बीच समाचारों की तह तक जाने की ललक अमित कुमार को इस क्षेत्र में खींच लाई। समकालीन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पैनी नजर रखने के साथ-साथ अमित को जटिल विषयों के गूढ़ विश्लेषण में गहरी रुचि है। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के रहने वाले अमित को मीडिया जगत में एक दशक का अनुभव है। वे पिछले 4 वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।


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अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।

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