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नहीं सुधर रहा पाकिस्तान, युद्धविराम के बीच अफगानिस्तान में दागे गोले; पड़ोसियों में तनाव बढ़ा

नहीं सुधर रहा पाकिस्तान, युद्धविराम के बीच अफगानिस्तान में दागे गोले; पड़ोसियों में तनाव बढ़ा

संक्षेप:

अफगान सैन्य सूत्र ने गोलाबारी के बारे में कहा कि पाकिस्तान ने हल्के और भारी हथियारों का इस्तेमाल किया और नागरिक इलाकों को निशाना बनाया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार गोलाबारी 10-15 मिनट तक चली। 

Thu, 6 Nov 2025 08:47 PMMadan Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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पाकिस्तान ने गुरुवार को सीजफायर लागू होने के बावजूद अफगानिस्तान में गोले दागे हैं। एक अफगान सैन्य सूत्र और प्रत्यक्षदर्शियों ने न्यूज एजेंसी 'एएफपी' को बताया कि गुरुवार को पाकिस्तान से अफगानिस्तान में गोले दागे गए। पाकिस्तान ने यह हरकत दोनों देशों के बीच तुर्की में नाजुक युद्धविराम को मजबूत करने के लिए फिर से बातचीत से ठीक पहले की है। अफगान सैन्य सूत्र ने गोलाबारी के बारे में कहा, 'पाकिस्तान ने हल्के और भारी हथियारों का इस्तेमाल किया और नागरिक इलाकों को निशाना बनाया।' प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार गोलाबारी 10-15 मिनट तक चली। दोनों पड़ोसियों में सीजफायर लागू है, लेकिन इसके बाद भी पाकिस्तान सुधरने का नाम नहीं ले रहा। ऐसे में पड़ोसियों में तनाव बढ़ गया है

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नाम न छापने की शर्त पर सूत्र ने कहा, 'इस्तांबुल में चल रही बातचीत के सम्मान में हमने अभी तक जवाबी कार्रवाई नहीं की है।' संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, पिछले महीने की शुरुआत में काबुल में हुए विस्फोटों के बाद सीमा पर हुई झड़पों में लगभग 50 अफ़ग़ान नागरिकों सहित 70 से ज़्यादा लोग मारे गए थे। यह दोनों पड़ोसी देशों के बीच वर्षों में हुए सबसे घातक टकरावों में से एक था, जिनके संबंध 2021 में तालिबान के काबुल में सत्ता में लौटने के बाद से, विशेष रूप से सीमा पार उग्रवाद और सुरक्षा चिंताओं को लेकर, बिगड़ गए हैं।

पाकिस्तान और अफगान तालिबान के बीच बृहस्पतिवार को इस्तांबुल में शांति वार्ता फिर से शुरू हो रही है, जिसका उद्देश्य सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे से निपटना और दोनों पक्ष के बीच तनाव को और बढ़ने से रोकना है। सीमा पर तैनात सैनिकों के बीच 11 अक्टूबर को हुई झड़प में दोनों पक्षों को जनहानि हुई थी। पाकिस्तान का दावा है कि इस झड़प में कम से कम 206 अफगान तालिबान और 110 तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के सदस्य मारे गए थे, जबकि पाकिस्तान के 23 सैनिकों की भी मौत हुई थी।

दोनों पक्षों के बीच 15 अक्टूबर को संघर्षविराम पर सहमति बनी थी, जिसे 19 अक्टूबर को दोहा और 25 अक्टूबर को इस्तांबुल में हुई वार्ताओं के दौरान आगे बढ़ा दिया गया था। अस्थायी संघर्षविराम अब भी प्रभावी है, लेकिन दोनों पक्षों के अधिकारियों के बयानों और सोशल मीडिया पर पारस्परिक कटुता साफ झलक रही है। इस्तांबुल में हुई वार्ता असफल होने की कगार पर थी, लेकिन तुर्किये के हस्तक्षेप से स्थिति संभल गई तथा एक और दौर की बातचीत पर सहमति बनी, जिसके लिए दोनों देशों के अधिकारी इस्तांबुल पहुंच चुके हैं।

Madan Tiwari

लेखक के बारे में

Madan Tiwari

लखनऊ के रहने वाले मदन को डिजिटल मीडिया में आठ साल से अधिक का अनुभव है। लाइव हिन्दुस्तान में यह दूसरी पारी है। राजनीतिक विषयों पर लिखने में अधिक रुचि है। नेशनल, इंटरनेशनल, स्पोर्ट्स, यूटीलिटी, एजुकेशन समेत विभिन्न बीट्स में काम किया है। लगभग सभी प्रमुख अखबारों के संपादकीय पृष्ठ पर 200 से अधिक आर्टिकल प्रकाशित हो चुके हैं। खाली समय में लॉन टेनिस खेलना पसंद है।

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