कभी नहीं करेंगे हमला… पाकिस्तानी राजदूत ने भारत का नाम लेकर क्यों कहा ऐसा? तारीफ भी की
रूस में पाकिस्तान के राजदूत ने भारत के परमाणु सुरक्षा रिकॉर्ड की सराहना की है। वहीं इस दौरान उन्होंने यह भी कहा है कि पाकिस्तान ब्रिक्स का हिस्सा बनना चाहता है।

पाकिस्तान के राजदूत ने नई दिल्ली और इस्लामाबाद के परमाणु सुरक्षा रिकॉर्ड की जमकर तारीफ की है। इस दौरान उन्होंने दावा किया है कि दोनों देशों ने एक-दूसरे की परमाणु सुविधाओं पर हमला ना करने की पारस्परिक गारंटी दी है। पाक के राजदूत फैसल नियाज तिरमिजी ने एक निजी समाचार पोर्टल आरटीवीआई डॉट कॉम को दिए गए एक इंटरव्यू में यह बातें कही हैं।
फैसल नियाज ने बातचीत के दौरान कहा कि पश्चिम एशिया में वर्तमान संघर्ष के मद्देनजर ऐसी गारंटी का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा,''भारत और पाकिस्तान के बीच आपसी गारंटी का एक बहुत अच्छा इतिहास रहा है कि हम एक-दूसरे की परमाणु सुविधाओं पर हमला नहीं करेंगे।''
इजरायल ईरान का जिक्र
तिरमिजी ने आगे कहा, ''पश्चिम एशिया में हुए हालिया संघर्ष में, हमने दुर्भाग्यवश देखा कि इजरायल ने बुशहर पर हमला किया। अगर बुशहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर सीधा हमला होता, तो इसके परिणाम ना केवल ईरान बल्कि फारस की खाड़ी और पाकिस्तान के लिए भी गंभीर होते। मुझे उम्मीद है कि इजराइल इससे सबक लेगा, परमाणु संयंत्र अभेद्य होने चाहिए। इस पर कभी हमला नहीं किया जाना चाहिए।''
रूस की भूमिका पर क्या कहा?
इस बीच तिरमिजी ने पाकिस्तान और भारत के संबंधों को बेहतर बनाने में रूस द्वारा मध्यस्थ की भूमिका निभाने के सवाल का भी जवाब दिया। उन्होंने कहा, ''खैर, रूस की हमेशा से इसमें भूमिका रही है क्योंकि भारत के साथ उसके बहुत करीबी संबंध हैं। हम भारतीय पक्ष को बताते हैं कि हम पहले से ही एससीओ (शंघाई सहयोग संगठन) में साझेदार हैं और हम ब्रिक्स में भी शामिल होना चाहते हैं। इसलिए भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों को बेहतर बनाने में रूस हमेशा एक निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है।''
वहीं पाक के राजदूत ने मई 2025 में भारत-पाकिस्तान संघर्ष को रोकने में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका के बारे में पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए कहा, ''हमने भारतीयों से कहा कि हम बातचीत करना चाहते हैं। और हां, राष्ट्रपति ट्रंप ने तनाव कम करने में भूमिका निभाई।'' हालांकि भारत ने ट्रंप और पाकिस्तान के इस दावे को सिरे से खारिज किया है और यह स्पष्ट किया है कि पाक की विनती के बाद दोनों देशों के बीच डीजीएमओ स्तर पर हुई वार्ता के बाद ही संघर्षविराम पर सहमति बनी थी।
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