चीन की मध्यस्थता वार्ता में पाक ने लगाया अड़ंगा? सीमा सुलह पर रख दीं तीन बड़ी शर्तें; भौंचक तालिबान

Apr 06, 2026 05:09 pm ISTPramod Praveen पीटीआई, लाहौर
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हाल के महीनों में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच संघर्ष तब और बढ़ गया जब इस्लामाबाद ने काबुल पर टीटीपी और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के आतंकवादियों को पनाह देने का आरोप लगाया।

चीन की मध्यस्थता वार्ता में पाक ने लगाया अड़ंगा? सीमा सुलह पर रख दीं तीन बड़ी शर्तें; भौंचक तालिबान

भारत के दो पड़ोसी देश पाकिस्तान और अफगानिस्तान लंबे समय से सीमा विवाद में उलझे हुए हैं। इस बीच, पाकिस्तान ने मांग की है कि अफगानिस्तान, तहरीक-ए- तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) को औपचारिक रूप से आतंकवादी संगठन घोषित करे और उसके बुनियादी ढांचे को खत्म करे। तभी दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को सुलझाया जा सकता है। पाकिस्तान ने विवाद को सुलझाने के लिए इसे बुनियादी शर्त के तौर पर पेश किया है। पाक की स्थानीय मीडिया में सोमवार को यह खबर प्रकाशित हुई है।

'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' अखबार ने बताया कि इस्लामाबाद ने पिछले हफ्ते चीन के शहर उरुमकी में पाकिस्तान और अफगान तालिबान के प्रतिनिधियों के बीच हुई एक बैठक के दौरान तीन मुख्य मांगें रखीं। चीन की मध्यस्थता में हुई ये बातचीत, फरवरी के आखिर में पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान में आतंकवादी 'ठिकानों' को निशाना बनाने के लिए 'ऑपरेशन गजब लिल-हक' शुरू करने के बाद से दोनों पड़ोसी देशों के बीच पहली बड़ी कूटनीतिक बातचीत है।

पाकिस्तान की तीन बड़ी मांग क्या?

सूत्रों के हवाले से खबर में कहा गया है, ''इस्लामाबाद द्वारा रखी गई तीन मांगों में काबुल द्वारा तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) को औपचारिक रूप से एक आतंकवादी संगठन घोषित करना, उसके बुनियादी ढांचे को खत्म करना और इस कार्रवाई का पुख्ता सबूत देना शामिल है।'' सूत्रों ने बताया कि ये मांगें पाकिस्तान की बातचीत की स्थिति का आधार हैं, जो लगातार सुरक्षा चिंताओं के चलते और सख्त हो गई हैं।

खबर के अनुसार, एक ऐसे ढांचे पर चर्चा चल रही है जो दोनों पक्षों के बीच संभावित सहमति का रास्ता खोल सकता है। इसमें ''संघर्ष विराम की व्यवस्था, अफगान तालिबान से आतंकवाद विरोधी आश्वासन, अफगानिस्तान के अंदर आतंकवादी पनाहगाहों को खत्म करना और सुरक्षित व्यापार मार्गों को सुगम बनाने के उपाय'' शामिल हैं। इसमें इस्लामाबाद और काबुल के बीच एक अधिक व्यवस्थित और संस्थागत बातचीत तंत्र स्थापित करने की भी परिकल्पना की गई है, क्योंकि दोनों पक्षों ने उरुमकी में तकनीकी स्तर के प्रतिनिधिमंडल भेजे जो चर्चाओं की व्यावहारिक प्रकृति को दर्शाता है।

दोनों देशों के बीच संघर्ष बढ़ा है

हाल के महीनों में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच संघर्ष तब और बढ़ गया जब इस्लामाबाद ने काबुल पर टीटीपी और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के आतंकवादियों को पनाह देने का आरोप लगाया। अफगानिस्तान ने इन समूहों के पाकिस्तान में सक्रिय होने का दावा करते हुए लगातार इन आरोपों से इनकार किया है और पड़ोसी देश से कार्रवाई करने को कहा। अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी ने रविवार को स्वीकार किया कि बातचीत अभी जारी है और तालिबान शासन पाकिस्तान के साथ मुद्दों को बातचीत के जरिए सुलझाना चाहता है।

अब तक कोई बड़ी सफलता नहीं मिली

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा कि बातचीत में इस्लामाबाद की भागीदारी को नीति में बदलाव के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए, खासकर सुरक्षा अभियानों के संबंध में। एक सरकारी अधिकारी का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि अफगान तालिबान ने पाकिस्तान को बातचीत में शामिल करने में मदद के लिए चीन से संपर्क किया था, और बीजिंग ने इस विवाद को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने की ज़रूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा, ''हालांकि उरुमकी में अब तक कोई बड़ी सफलता नहीं मिली है, लेकिन दोनों पक्ष कम से कम बातचीत तो कर रहे हैं जो कि महत्वपूर्ण है और इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाना चाहिए।''

Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

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