ईरान जाएंगे पाकिस्तान के आसिम मुनीर, मक्का समझौते के बीच अचानक क्यों बढ़ी हलचल?
पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर सोमवार को तेहरान पहुंचेंगे। ईरान के विदेश मंत्रालय ने रविवार को इसकी घोषणा की। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब पाकिस्तान अमेरिका-ईरान शांति वार्ता बहाल करने की कोशिश कर रहा है…

पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर सोमवार ( 24 अगस्त ) को द्विपक्षीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा के लिए तेहरान पहुंचेंगे। ईरान के विदेश मंत्रालय ने रविवार को इसकी आधिकारिक घोषणा की। यह यात्रा ऐसे समय पर हो रही है जब पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच रुकी हुई शांति वार्ता बहाल करने के लिए नई मध्यस्थता कोशिशें कर रहा है। पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच दोबारा सैन्य हमलों से तनाव बढ़ने के कारण पिछले महीने वह अंतरिम शांति समझौता टूट गया था, जिसमें पाकिस्तान गारंटर देश था।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने रविवार को संवाददाताओं से कहा कि फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के साथ एक प्रतिनिधिमंडल भी आएगा, जो ईरानी नेतृत्व के साथ उच्च-स्तरीय वार्ता करेगा। उन्होंने बताया कि इस दौरे का उद्देश्य ईरान-पाकिस्तान सहयोग को मजबूत करना और क्षेत्र में शांति तथा सुरक्षा बढ़ाने में पाकिस्तान की भूमिका को आगे बढ़ाना है।
इस बीच, लेबनान के टीवी चैनल अल-मायदीन ने एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी के हवाले से बताया कि ईरान को सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान द्वारा इस महीने की शुरुआत में स्थापित नए सुरक्षा गठबंधन ‘मक्का समझौते’ में शामिल होने का निमंत्रण मिला है। ईरानी संसद की समाचार एजेंसी ‘खानेह मेलत’ के प्रमुख मेहदी रहीमी ने अल-मायदीन को बताया कि ईरान को मक्का समझौते में शामिल होने का निमंत्रण मिला है और इस पर समीक्षा चल रही है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के देश क्षेत्रीय सुरक्षा कवच बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। यह ईरान के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, क्योंकि तेहरान लंबे समय से क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था की वकालत करता रहा है।
मक्का समझौते पर सात अगस्त को सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप अर्दोआन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते में पारस्परिक रक्षा का सिद्धांत शामिल है, जिसके तहत तीनों में से किसी एक देश पर हमला सभी सदस्य देशों पर हमला माना जाएगा। तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने इसकी तुलना नाटो के अनुच्छेद पांच से की थी, लेकिन स्पष्ट किया कि यह समझौता ईरान या किसी अन्य देश के खिलाफ नहीं है।
सदस्य देशों ने कूटनीतिक और सैन्य समन्वय के तंत्र विकसित करना शुरू कर दिया है। इसमें विदेश और रक्षा मंत्रियों तथा सैन्य कमांडरों की बैठकें, संयुक्त सैन्य अभ्यास और रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग शामिल हैं। तुर्की ने कहा है कि भविष्य में अन्य देशों को भी गठबंधन में शामिल किया जा सकता है। मिस्र का नाम संभावित सदस्य के रूप में सामने आया है, जबकि बांग्लादेश ने भी रुचि दिखाई है। बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर ने शुक्रवार को सरकारी समाचार एजेंसी बीएसएस को दिए साक्षात्कार में कहा कि ढाका ‘बांग्लादेश फर्स्ट’ और संतुलित विदेश नीति पर चल रहा है तथा राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर रक्षा समझौते पर विचार कर सकता है।
ईरान ने अब तक इस समझौते पर सावधानीपूर्वक सकारात्मक रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने 10 अगस्त को कहा था कि तेहरान को गठबंधन के गठन को लेकर कोई चिंता नहीं है। उनके अनुसार, यह कदम क्षेत्रीय देशों के बीच सुरक्षा तंत्र विकसित करने की बढ़ती आवश्यकता को दर्शाता है। अगर ईरान के निमंत्रण की आधिकारिक पुष्टि होती है, तो उसकी सदस्यता गठबंधन की प्रकृति को काफी बदल सकती है।


