PoK में हिंसा की आग… बीच सड़क नरसंहार; आसिम मुनीर ने चलवाई गोलियां?

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Pakistan News Today: पीओके में प्रतिबंध के विरोध में भड़की हिंसा में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की गोलीबारी में कम से कम 27 नागरिक मारे गए और दर्जनों घायल हो गए। यह घटना पाकिस्तान सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के 'कश्मीर रक्षक' वाले दावों की पोल खोलती है।

PoK में हिंसा की आग… बीच सड़क नरसंहार; आसिम मुनीर ने चलवाई गोलियां?

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर ( POK ) में संयुक्त अवामी एक्शन कमिटी (JAAC) पर लगाए गए प्रतिबंध के विरोध में पिछले तीन दिनों से लगातार हिंसा जारी है। पाकिस्तानी रेंजर्स और पुलिस की अंधाधुंध गोलीबारी में अब तक 27 से अधिक नागरिक मारे गए हैं, जबकि 70 से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं। यह घटना पाकिस्तान सेना के प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के बार-बार दोहराए जा रहे 'कश्मीर के रक्षक' वाले दावों को सीधे चुनौती दे रही है। जेएएसी नेताओं के अनुसार, यह कार्रवाई हाल के वर्षों में पीओके की सबसे हिंसक घटनाओं में से एक है। 6 जून को आतंकवाद विरोधी कानून के तहत जेएएसी पर प्रतिबंध लगाए जाने के तुरंत बाद से क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया। स्थानीय लोगों ने इसे नागरिक अधिकारों के आंदोलन को कुचलने की कोशिश करार दिया है।

जेएएसी क्या है और क्यों उठा विरोध?

दरअसल, सितंबर 2023 में गठित जेएएसी व्यापारियों, ट्रांसपोर्टरों, वकीलों, छात्रों और विभिन्न सामाजिक संगठनों का एक व्यापक गठबंधन है। यह पीओके में सबसे मजबूत और विश्वसनीय जमीनी स्तर का मंच बन चुका है। संगठन ने 38 सूत्री मांगों को लेकर 9 जून को पूरे क्षेत्र में बंद और लंबी पदयात्रा का आह्वान किया था। इन मांगों में सबसे महत्वपूर्ण है- पीओके विधानसभा की 12 आरक्षित सीटों को तुरंत समाप्त करना। ये 12 सीटें इस्लामाबाद द्वारा ‘भारतीय कश्मीर से आए शरणार्थियों’ के नाम पर भरी जाती रही हैं। वहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि कुल 53 विधानसभा सीटों में से ये 12 सीटें इस्लामाबाद के सीधे नियंत्रण में हैं और इन्हें पाकिस्तान सरकार अपने समर्थकों को सत्ता में बिठाने के लिए इस्तेमाल करती रही है, चाहे पीओके के स्थानीय लोग किसी भी पक्ष में वोट दें। वास्तविकता यह है कि इन सीटों पर दावा करने वाले ‘शरणार्थी’ क्षेत्र में लगभग न के बराबर रहते हैं।

रावलकोट नरसंहार

बता दें कि 6 जून की रात प्रतिबंध लागू होते ही पहले झड़प हुई, जिसमें एक स्थानीय व्यापारी की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इसके बाद विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए जो धीरे-धीरे हिंसक रूप लेते गए। 8 जून को रावलकोट में सबसे भयानक घटना घटी। जेएएसी समर्थक अस्पताल के मुर्दाघर के बाहर इकट्ठा हुए थे और पहले मारे गए लोगों के अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान पाकिस्तानी रेंजर्स ने उन पर अचानक गोलीबारी शुरू कर दी। जेएएसी के केंद्रीय नेता शौकत नवाज मीर ने एक वीडियो संदेश में कहा कि राज्य ने रावलकोट में हमारे लोगों का नरसंहार शुरू कर दिया है। हम प्रतिबंध के बावजूद अपनी मांगों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।

रिपोर्ट के अनुसार, रावलकोट में अकेले उस दिन सुबह तक 23 से अधिक नागरिक मारे गए और 32 से ज्यादा घायल हुए। पूरे पीओके में जेएएसी के अनुसार कुल मौतों की संख्या 27 पहुंच चुकी है। पाकिस्तानी अधिकारियों ने आधिकारिक रूप से 11 मौतों (7 नागरिक और 4 पुलिसकर्मी) की पुष्टि की है, जबकि कुछ स्वतंत्र मीडिया रिपोर्ट्स में मरने वालों की संख्या 30 से अधिक बताई जा रही है। घायलों में 23 पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। 8 जून की रात करीब 30 लोगों को हिरासत में लिया गया।

वहीं, हिंसा फैलने के साथ ही पूरे पीओके में मोबाइल डेटा, इंटरनेट और सोशल मीडिया सेवाएं पूरी तरह से निलंबित कर दी गई हैं। मुजफ्फराबाद, मीरपुर, भीमबर, कोटली, टाटा पानी, प्लांदारी और आसपास के कई इलाकों में पूर्ण हड़ताल और बंद का असर है। प्रशासन ने सार्वजनिक सभाओं पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है और पर्यटकों को 20 जून तक क्षेत्र छोड़ने की सलाह दी है। जेएएसी का केंद्रीय कार्यालय भी सील कर दिया गया है।

भारत ने की कड़ी निंदा

वहीं, भारत सरकार ने पाकिस्तानी बलों की बर्बरता की कड़ी निंदा की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में पुलिस की बर्बरता की खबरें आ रही हैं, जिसमें कई प्रदर्शनकारी मारे गए और कई घायल हुए हैं। हमें उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान को उसके कुकर्मों और मानवाधिकारों के हनन के लिए जवाबदेह ठहराएगा। इस दौरान जायसवाल ने इस्लामाबाद पर फर्जी खबरों और वीडियो का पैटर्न अपनाकर अपनी विफलताओं को छिपाने का आरोप भी लगाया।

दो साल में तीसरी बड़ी घटना

बता दें कि यह कोई अकेली घटना नहीं है। पिछले दो वर्षों में यह तीसरा बड़ा हिंसक दमन है। मई 2024 में महंगाई (आटे और बिजली की दरों) को लेकर हुए प्रदर्शनों में कई लोग मारे गए थे। इसके बाद सितंबर-अक्टूबर 2025 में मुजफ्फराबाद में घातक हिंसा हुआ, जिसमें कम से कम 9 लोग मारे गए थे और 100 से अधिक घायल हुए थे। हर बार एक ही पैटर्न दोहराया जा रहा है, जनता की जायज शिकायतें, घातक बल का प्रयोग, इंटरनेट बंद करना, समझौते का टूटना और फिर नया विरोध, जिसका परिणाम अब सबके सामने है।

बताया जा रहा है कि शुरुआत में जेएएसी केवल बिजली, सड़क, महंगाई और रोजगार जैसी बुनियादी मांगों तक सीमित था, लेकिन अब मांगें आगे बढ़ चुकी हैं। संगठन पीओके को वास्तविक स्वायत्तता देने और इस्लामाबाद तथा पाकिस्तानी सेना के प्रत्यक्ष शासन को समाप्त करने की मांग कर रहा है। दूसरी ओर हिंसा देखते हुए विदेशों में भी चिंता पैदा कर दी है। ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा ने सुरक्षा स्थिति बिगड़ने का हवाला देते हुए अपनी यात्रा सलाह जारी की है। इस्लामाबाद स्थित अमेरिकी दूतावास ने अपने नागरिकों को प्रदर्शनों से पूरी तरह दूर रहने की चेतावनी दी है।

दूसरी ओर ये घटनाएं आसिम मुनीर के उस रुख को पूरी तरह बेनकाब कर रही हैं, जिसमें वे खुद को कश्मीर विवाद का सबसे बड़ा रक्षक बताते रहे हैं। जबकि वास्तविकता में उनके ही देश के कब्जे वाले क्षेत्र में निर्दोष नागरिकों पर गोली चलाई जा रही है। स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है और आगे और हिंसा की आशंका जताई जा रही है।

Devendra Kasyap

लेखक के बारे में

Devendra Kasyap

देवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।

देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।

मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।

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